“स्वतंत्रता संग्राममे मिथिलाक भूमिका”

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कीर्ति नारायण झा।             

“स्वतंत्रता संग्राम में मिथिलाक भूमिका” “मिथिलाक घर सँ उठय आबाज। देश में बनय अप्पन सरकार।। सूखाएल रोटी भले खायब। अंगरेजबा के सभ सँ पहिले भगाएब।।”

समस्त मिथिला में स्वाधीनता केर बिगुल बाजल छल। सभक मुँह सँ एकहि टा शब्द गुंजि रहल छल जे ”गणेश भैया लड़ल छलाह अंगरेज सँ. नान्हिएटा मे गोरका सभ कें पानि पिया देने छलाह ओ. पूरा मधुबनी मे हुनक नाम चलैत छलनि. कहियो काल क’ ललका टोपीबला सिपाही अपनो गाम दिस अबैक. खोज-पुछारि क’ आपस चल जाइक. गणेश बाबू पर मोकदमा सेहो चलओने रहैक सरकार. एतबे नै, गोली हुनका छूबि क’ निकलि गेल रहैक एकबेर. जान ओ उसरगिए रखने छलाह,
जिनगी भरि ओ खुदीराम बोस जकाँ गोलगला सिया क’ पहिरैत छलाह, हुनका सं गप्प क’ लागि उठैत छल जे ई बहुत लग सँ गुलामीक आगि आ अजादीक इजोत तपने छैथि।
मधुबनीक वाट्सन स्कूल मे क्रांतिकारी गतिविधिक चलते हुनका मैट्रिकक शिक्षा लेल कलकत्ता जाए पड़लनि. कलकत्ता हुनका आओर पकिया क्रांतिकारी बना देने छलनि. कलकत्ता आबि ओ अनेक क्रांतिकारी लोकनिक संपर्क मे आबि गेलाह आ सशस्त्र क्रांतिकारी बनि गेलाह.।
देश भरि मे अंगरेजी सरकारक विरोधक स्वर गुंजय लागल छलैक. मैट्रिक पास क’ गणेश बाबू पुनः मधुबनी आबि गेलाह आ पूर्णकालिक स्वतन्त्रता सैनिक बनि गेलाह. छोट-छोट उमेरक बच्चा सबहक एक दल कें ल’ काज शुरू क’ देलनि जे ‘बाल सेना’ कहबैत छल.
1857 केर पहिल विद्रोह सं मधुबनीक आंदोलनी लोकनि स्वतंत्रता संग्राम मे उल्लेखनीय भूमिका निमाहलनि अछि.
1917 मे गाँधीजीक चंपारण सत्याग्रह मे मधुबनीक लौकहावासी बौएलाल दास ओ शिबोधन दास सक्रिय रूप सं भाग लेलनि. गांधीजीक डांडी मार्च मे कुशेश्वर स्थान केर बेढ गामक बिहार सँ एकमात्र गिरधारी चौधरी भाग लेने छलाह.
एही सभक गहींर प्रभाव गणेश चन्द्र झा पर पड़ल छलनि. 1930 केर नमक सत्याग्रह मे नमक क़ानून कें तोडैत एसडीओ कार्यालय कें समक्ष सर्वप्रथम गिरफ्तारी देने छलाह।
गणेश बाबू अगस्त क्रांतिक नायक छलाह. ई क्रांति मिथिला कें हलचल सं भरि देने छल. मिथिलाक 128 क्रांतिकारी शहादति देने छलाह, जाहि मे मधुबनीक कुल 19 आंदोलनी अपन आहुति देलनि. 10 गोटे कें फांसी सुनाओल गेल छलनि, जाहि मे सं 2टा सपूत फांसी चढलाह।
मधुबनी मे अगस्त क्रांति केर नेतृत्व गणेश चन्द्र झा क’ रहल छलाह. सूरज नारायण सिंह कें गिरफ्तार क’ दड़िभंगा पठा देल गेलैक. गांधीजी बंबइ मे ‘अंगरेज भारत छोड़ो’ आ ‘करो या मरो’ केर नारा देलनि. समूचा देश मे आंदोलनी सभ पर एकर व्यापक प्रभाव भेल. नेता सभ कें जेल मे बंद क’ देल गेल. मधुबनी जेलक फाटक तोड़ि क’ कैदी सभ बाहर आबि गेल छल. लोक गाम-गाम मे गणेश बाबू, सूरज बाबू केर लोकप्रियताक गीत गाबए लागल छल
“चलल गणेश तिरंगा ल’क’, दहकैत सूरज तेज प्रताप।
अंगरेजक छक्का छुटै छै, हेतै भारत आब आजाद”।।

सूड़ी स्कूल ताहि दिन आंदोलनक केन्द्र बनल छल. गणेश बाबू अनेक युवा क्रांतिकारी तैयार केने छलाह. जाहि सं अंगरेजी शासन कें भारी ड’र छलैक. हिनका गिरफ्तार क’ मधुबनी जेल मे बन्न क’ देल गेलनि. गांधीजीक आह्वान पर 10 अगस्त 1942 कें 11 बजे दिन मे गणेश बाबू जेलक फाटक तोड़ि क’ 88 बंदीक संग मुक्त भ’ भूमिगत भ’ गेलाह. भूमिगत रहैत मधुबनी थाना आ कचहरी पर कब्जा क’ तिरंगा फहरएबाक योजना बनाओल गेल।
14 अगस्त 1942 कें लगभग 5 हजारक संख्या मे किसान, मजदूर, छात्र सूड़ी स्कूल सं झंडा नेने थाना आ कचहरी दिस नारा लगबैत चलि पड़ल. आगू-आगू तिरंगा नेने गणेश बाबू चलि रहल छलाह. बैद्यनाथ पंजियार, इन्द्रलाल मिश्र, महावीर कारक, अनन्त महथा, भगवती चौधरी, तेजनारायण झा, राजकुमार पूर्वे, चतुरानन मिश्र, रामसुदिष्ट भगत, रामेश्वर दास, लक्ष्मी नारायण साह, मार्कंडेय भगत, महादेव साह, कामेश्वर साह आदि अनेक आंदोलनी भीड़क संग छलाह.।
जुलूस जखन नीलम सिनेमा चौक लग पहुंचल कि गोली चलय लागल. गणेश ठाकुर आ अकलू महतो तत्क्षण शहीद भ’ गेलाह. गणेश बाबू पर बर्बर तरीका सं लाठी आ बन्नूकक कुन्दा सं प्रहार होमए लागल. भीड़ आओर बेसी उग्र भेल जा रहल छल. गणेश बाबू लहुलुहान भ’ अचेत खसि पड़लाह. सिपाही हुनका घिसियबैत थाना अनलक. दारोगा राजबली ठाकुर निर्ममता पूर्वक हुनका पर बूट सं प्रहार करैत रहल।
स्वाधीनता दिवसक अवसर पर हमरा लोकनि मिथिलाक एहन सपूत जे मातृभूमिक सेवा मे जीवन भरि लागल रहलाह, नमन करैत छी!