“एक दोसरक सहयोगसँ होइत अछि काज आसान”

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— आभा झा।       

सहयोगकेँ अर्थ दू या दू सँ अधिक व्यक्ति या संस्थाकेँ मिलि क’ काज केनाइ होइ छैक। सहयोग एक-दोसर के माध्यम सँ होइत छैक। सहयोगक भावना हर मनुष्य में हेबाक चाही।समाजमें एक-दोसर के सहयोगे सँ देश या मनुष्यकेँ जीवन आगू बढ़ैत छैक। अहाँ समाजमें आर्थिक, शारीरिक कोनो रूप सँ सहयोग क’ सकैत छी।जरूरी नहिं कि अहाँ रूपैया पैसा सँ ही सहयोग करी।अहाँ घर पर होइ या बाहर कतौ सहयोग के आदान-प्रदान क’ सकैत छी।अपन विचार सँ सेहो सहयोग क’ सकै छी।सहयोगकेँ कोनो सीमा निर्धारित नहिं छैक। अहाँ कोनो संस्था, धर्म स्थान या कोनो शुभ कार्य जेना पाबैन तिहार, उपनयन, मुड़न या श्राद्ध कथु में सहयोग क’ सकैत छी।सहयोग कोनो जाति, धर्म या अमीर-गरीब देखि क’ नहिं कैल जाइत छैक।जकरा सहयोगक आवश्यकता छैक ओकरा सहयोग करबाक चाही।चाहे अप्पन होइ या आन किनको अहाँ सहयोग क’ सकैत छी।हर आदमी कोनो ने कोनो तरहे सहयोग करैत अछि।चाहे गामक समाज होइ या शहरकेँ सब में सहयोगक भावना रहैत छैक। मनुष्य एक सामाजिक प्राणी अछि।सहयोग केला सँ ककरो सफलता भेटैत छैक। सहयोग सँ आदमीकेँ मनोबल बढ़ैत छैक।सहयोग सबके एक-दोसर संग मिलि क’ करबाक चाही।सहयोगे एकटा एहेन चीज अछि जे अहाँ हर देश, गाँव, समाज या कोनो भी जाति वर्ग के क’ सकैत छी।अपन मिथिला में हरेक वर्ष प्राकृतिक आपदा बाढ़ि सँ कतेको गामक गाम तबाह भ’ जाइत छैक। ओहि बाढ़ि में फँसल लोककेँ ओहि समाजक लोकक सहयोग सँ सहायता भेटैत छैक। तहिना किनको घर में मृत्यु भेला पर ओहि समाजक लोककेँ सहयोग सँ हुनका श्मशान घाट पहुँचाओल जाइत छैन्ह। एखन जे कोरोना महामारी आयल छल तखन कतेक लोक एहि दुनियाकेँ छोड़ि क’ चलि गेल। कतेको बच्चा अनाथ भ’ गेल। ई महामारी कोनो एक धर्म या जाति लेल नहिं आयल छल।एहि में सब धर्म या जातिकेँ लोकक बच्चा अनाथ भेल।एहि महामारी में शहर हो या गाम सब जगह एहि समाजक लोककेँ सहयोग सँ उबरल।आइ जतेक उन्नति या प्रगति भ’ रहल अछि ओकर श्रेय समाजक सहयोगकेँ जाइ छै।ज्ञान-विज्ञान के आश्चर्यजनक उन्नति, समाज सेवा करै वाला संस्था, शिक्षा – प्रचार, सुरक्षा के व्यवस्थाकेँ क्षेत्र में आइयो पैघ-पैघ योजना सफल होइत देखा रहल अछि ओ सहयोगकेँ परिणाम अछि।सहयोग व्यक्तिकेँ जन्मजात आवश्यकता छैक। समाजक कोनो व्यक्ति ओ पैघ हो या छोट अपन-अपन क्षमतानुसार सहयोग करैत छथि।सहयोग सँ कोनो समस्याकेँ समाधान निकालल जा सकैत अछि। समाजक उत्थान आपसी सहयोग आ समानता सँ संभव अछि। सहयोग सँ होइत अछि काज आसान, सहयोग सँ बढ़ैत अछि मान सम्मान। जय मिथिला जय जानकी।

आभा झा
गाजियाबाद