“बेमेल विवाहक बदलैत रूप”

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— कीर्ति नारायण झा।                 

मिथिलाक एकटा प्रसिद्ध कहावत “लाख सुनराइ के एक गोराइ” कनियाँ के सुन्दरता केर कसौटी छलैक। अपना सभक घरक स्त्रीगण सभ अपना में चर्चा करैत रहैत छलीह जे कनियाँ के मुँह भगवती जकाँ लगैत छैन्ह अथवा सामा जकाँ सुंदर मुँह छैन्ह। गोर होयवाक संग संग नाक ठाढ होयवाक चाही नहिं तऽ ओ लोकनि चर्चा करैथि जे नाक नेपाली जकाँ पिचएल छैन्ह। अपना सभक ओहिठाम किछु जाति में कनियाँ बर केर लम्बाई खरही सँ नापल जाइत छलैक आ तखन ओ सम्बन्ध निश्चित कयल जाइत छलैक। बर कनियाँ केर जोड़ी सीता आ रामक जोड़ी सँ तुलना कयल जाइत छलैक। पहिले कनियाँ के साक्षात देखवाक प्रथा नहिं छलैक ।कनियाँ के फोटो पठाओल जाइत छलैक आ गताती में बिवाह होयवाक कारणे बर कनियाँ केर मेचिंग बहुत नीक जकाँ भऽ जाइत छलैक। हम सभ छ भाई छी, आ हमर पाँच टा भौजी आ कनियाँ के देखलाक बाद कियो मानवाक लेल तैयार नहिं होइत छैथि जे हमर पिता कोनो पुतोहु के बिवाह सँ पूर्व नहिं देखने छलाह। ओ एकर बहुत पैघ विरोधी रहैथि। हुनकर माननाइ छलैन्ह जे कोनो लड़की के बिवाह सँ पूर्व देखलाक बाद जँ बिवाह नहिं होइत छैक कोनो कारण सँ तऽ ओकरा में हीन भावना केर संचार होमय लगैत छैक जे नीक बात नहिं। हमरा गामक एकटा प्रसिद्ध घटना छैक जे हमरा गामक एकटा सम्मानित व्यक्ति अपन बेटाक बिवाह में पाइ लेलखिन आ कनियाँ कारी रहथिन्ह तऽ समूचा गाम में हल्ला भऽ गेलैक तऽ बरक बाबा सभ के कहने फिरथिन जे जेना कुनमा के बाँसक दाहा में जखन लाल पीयर पन्नी साटि दैत छियैक तऽ दाहा चमकय लगैत छैक तहिना कनियाँ के देह में दहेजक करकरौआ नोट साटि दियौन कनियाँ चमकय लगती आ कारी रंग गोर भऽ जाएत। पहिले के जमाना में बर कनियाँ के एतेक मेचिंग पर ध्यान देल जाइत छलैक। समय केर संग संग लोकक बिचार में परिवर्तन भेनाइ स्वभाविक छैक ।पहिले के जमाना में मूल गोत्र के बाद कनियाँ बरक मिलान पर ध्यान देल जाइत छलैक मुदा आब बरक सरकारी नोकरी ओकर मूल होइत छैक आ लक्ष्मी झा ओकर गोत्र होइत छैक। पहिले कन्यागत सँ मूल गोत्र खानदान पूछल जाइत छलैक आ आब पूछल जाइत छैक जे बेटी के बिवाह में अहाँक बजट की अछि? जकर कोनो आवश्यकता नहिं छैक कारण कन्यागत के तऽ सभटा बजट कन्या के उच्च शिक्षा देवाक पाछू खर्च भऽ चूकल छैन्ह मुदा कन्या के शिक्षा के महत्वहीन मानि बरागत बेटाक बिवाह करवा सँ मना करैत छैथि जकर दुष्परिणाम हुनका भोगय पडैत छैन्ह। बेसी दहेजक प्रतीक्षा में बरक उम्र बढल जाइत अछि जे बाद मे ओहि अवस्था केर कनिया भेटवा मे बहुत दिक्कत होइत छैक। फेर बेमेल बिवाह भेनाइ आरम्भ होमय लगैत अछि। बेसी अवस्था में बिवाह भेला पर डाक्टर सेहो एकरा अनुचित मानैत छैथि। धिया पूता के बेसी स्वतंत्रता देवाक कारणे सेहो बेमेल बिवाह होइत अछि। एकटा हिन्दी में कहावत छैक जे “दिल लगी गदही से तो परी क्या चीज़ है”? माता पिता के बात नहिं मानलाक उपरान्त अंतरजातीय बिवाह, बेमेल बिवाह सभटा होइत अछि जाहि मे अपन सभ संस्कार के धज्जी उड़ैवैत आन संस्कार के स्वीकारि बिवाह होइत अछि जे सर्वथा अनुचित आ आवय बला पीढी के लेल बहुत खराब स्थिति उत्पन्न भऽ रहल अछि। सभ अभिभावक के अपन धिया पूता के अपन संस्कृति अपन भाषा केर महत्व के बाल्यावस्था सँ बुझवय पड़तैन नहिं तऽ दिनानुदिन स्थिति आओर भयावह भेल जा रहल अछि जे कोनो स्थिति मे हमरा सभक लेल नीक संकेत नहिं अछि। एखनो समय अछि जे चेतू आ अपन संस्कृति केर प्रचार प्रसार अपन परिवार सँ प्रारम्भ करू तखने हमरा लोकनि अपन परम्परा के जीवित राखि सकब, अन्यथा एहिना २१ सालक बेटी के बिवाह ४० सालक प्रोढ सँ करवाक लेल हमरा लोकनि विवश होयव। अंतर्जातीय बिवाह केर कलंक सतत् मिथिलाक सभ्यता में कालिख पोतैत रहत……