“नेतृत्व क्षमता”

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— रेखा झा।                         

कोनो देश, समाज, समूह, घर के नेतृत्व क्षमता सम्हारै लेल किछु आवश्यक नियम आ बंधन सबस बेसी जरूरी अइ। नियम मतलब सिद्धांत के व्यवस्था। बंधन मतलब अपना पर नियंत्रण राखब। जे केयो कतउ के नेतृत्व करत स सबस पहिने ओकर काज शोषित के मुक्त केनाई बहुत जरूरी ई शोषण आर्थिक दृष्टि स बेसी शारिरिक आ मानसिक के लेल बेसी आवश्यक। नेतृत्व क्षमता के पहिल गुण हमरा बुझने खाली दूरदर्शिता के काज जे की भविष्य के लेल सकारात्मक बदलाव आनै एहन सोच बहुत उत्तम। एहन काज के शुरुआती दौर में बहुत मजबूत विपक्ष रहनाई जरूरी। कहबाक तात्पर्य इ जे केयो किछु बाजै ओहि पर कथमपि ध्यान नइ देबाक अइ। चूंकि अहि तरहक काज मे सबहक उत्थान छुपल रहैया अहि लेल जे नेतृत्व करै छथि या करय चाहै छथि हुनका गंभीर व्यक्तित्व आ फूहड़पन स दूर रहबाक चाही।
जेहन राजा के छत्रछाया भेटत प्रजा मे ओ गुण वा अवगुण समेटबाक लोभ बेसी रहत अहि लेल अपन देशक बहुत राज्य उदाहरण अइ।
दोसर गुण जे जबरदस्ती काज करेनाइ अयबाक चाही मुदा एकर मतलब इ नइ जे हिटलरशाही क फायदा निकालब । एहन तरहक नेतृत्व स बहुत राज्य के नीक कर्मचारी कोना विरोधाभास क पलायन करै छथि से अपने राज्य मे हम सब देख चुकल छी। जेकरा मे जे क्षमता अइ ओ नेतृत्व करै वाला के नजर मे रहबाक चाही आ तखन काज सही ढंग स चलत।
नेतृत्व क्षमता ओहि तरहक लोक बेसी सफल भ सकैया या दूरगामी भ सकैया जे फेवरिज्म के नजर नइ राखैथ नइ त अपन काज वा लक्ष्य स भटकि जायत उद्देश्य।
किछु मानव मे एहन गुण रहत जे दू महिना के बच्चा स अस्सी सालक बूढ तक स गप्प करबाक अंदाज रहत एहन लोक बेसी सफल रहै छथि जे की देश मे देखल जा रहल।
कार्यप्रणाली मे अपन छोट के छत्रछाया बनि ठार रही नइ की चाकर जकां हुकूमत करी।
संगठन या समाज खाली प्रशंसा करत नेता के त बुझि जाउ जे गलत नेतृत्व भ रहल। जमि क विरोधाभास जरूरी मुदा तकरबाद ओकरा अहां सम्हारि ली साम दाम दंड भेद स त अहांक क्षमता और बढत।
आइ काल्हि नेतृत्व क्षमता त विलुप्त भ खाली अपन क्षमता तक सिमटि गेल।
समाज, देश, गाम कोनो एहन जगह बाकी नइ जे सब अपन फायदा लेल अहि पद के इस्तेमाल क सब दिन फेवरिज्म करैत लोक के अपना दिस आकर्षित क अपने पीठासीन बनल रहै छथि। अपन नेतृत्व मे कहां केयो दोसर के कनिको घुसै देता अहि लेल बाद मे लोक एहन के आसन स उतारि दै छथि।
एक शब्द मे अगर कही त नेतृत्व क्षमता के बुझू त बस भेल “ह्रदय”
ह्रदय अगर रूकि जायत त सब किछु रहैत लाश रहत शरीर। आ ह्रदय लेल शरीर जरूरी।