“लोक की कहत इएह सोचैत कतेको प्रतिभा मारल जाइए”

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— पीताम्बरी देवी।           

मिथिला मे पहिने सब काज गृहउद्दोग से होई छल गाम मे हाट लगै छल आर सौसे परोपट्टा के लोक घर के आबश्यक सामान हाट से लय जाई छला ।हाट पर लोहार हासु खुरपी चक्कू सरोता कत्ता आदि अनेक तरहक सामान अपनै बना के अनै छला ।तहिना कमार काठ के सामान जेना कठौती ,दैब, चकला बेलना,रही, आदि अनेकों तरहक जीच अपनै बना के अनै छला ,डोम बास के छीट्टा,पथिया,सुप,डलिया, कोनिया, फुलडाली आदि सामान अनै छला ।मलाह माछ , कुम्हार माटिक बासन कुजरा तरकारी किसान अन्न सब अपन अपन सामान गाम में बेचै छला ।चमार जूता चप्पर ।आर लघु उद्योग फलै फुलै छले ।गाम में खाधि भंण्डार में सूत काटि के गृहणि सब बेचै छलि जाहि से खाधि के कपडा किनल जाई छल ।ब्राम्हणी सब जनौ काटि के बेचै छलि अखनों बेचै छथि । मिथिला पेंटिंग ,सीकी, मौनी, बिरहरा ,सब लघु उघुउद्दोग मिथिला में अछि ।अचार ,कुम्हरौरी, अदौरी,उपनयनक बिध के सामान विवाह के बिध के सामान सबटा घर बैसल भेट रहले । लेकिन अपन मिथिला में सब के ई जे बिमारी छनि जे लोक कि कहत ताहि कारण से उद्दोग बेसि बढ़ी नहि रहले।उद्दौग के बढ़बय लेल सब के आगु आबय परतनि ओना बहुत गोटे आगु एलिहे लेकिन सब नै आबि रहल छथि ।दोसर प्लेटफार्म नै सब के भेट रहल छनि ।जेना मिथिला पेंटिंग के कतौ दोकन ओना भ के नै अछि।सामान के दाम नूका के रखनाई से बहुत ग्राहक सामान नै खरिदय छथि ।अदौरी कुम्हरौरी अचार अमोट आदि जतेक सामान बेचै जाई छथि कियो दाम नै लिखै छथि। उपनयन वा विवाह के विध के सामान के कमे गोटे रेट लिखै छथि ।ओपेन क के खुलेआम कतौ दोकान नै रहलाक कारण लोक बौआ जाई छथि ।हरवरी में सामान नै ल पबै छथि गृहउद्दोग गृहणि सब घर से चलबै छथि । जाहि कारण से ई ओतेक आगु नहि बढ़ी रहले ।ऐहि से सिन्दूर टिकली ते भ सकैये लेकिन परिवार नै चलि सकैये ।एकरा लेल अभियान के जरूरत छै प्रचार प्रसार के जरूरत छै जगह जगह दोकान खुजय जतय आसानि से माल भेटजाय प्रचूर मात्रा में आर दील्ली मुम्बई कलकत्ता से लय के देश से बिदेश तक ब्यापार फैल जाय तखनि गृहउद्दोग सफल होएत । मिथिला के स्त्री पुरुष बहुत तरहक लुरि ब्यबहार से भरल छथि जेना माछ मारय लेल सरैली, टैप ,गाझ, बास से बनैये बहुत गोटे बनबय जनै छथि मुदा बनबै नहि छथि । सन सुतरी के सामान , मोथी के पटिया सबटा गृह उद्योग मिथिला से जा रहले ।एहि पर कियो ध्यान नै द रहल छथि । गृह उद्योग के प्रचार प्रसार हेबाक चाहि दोकान ठाम ठाम हेबाक चाहि तखनि गृह उद्योग फलत फुलत ।किछु गृह उद्योग ब्रांड के चक्कर में परी के डूवि रहले जेना बास के सामान महग भेटैये ते प्लास्टिक लोक किनय लागल ।लोहार से सामान नै किन के सुपर मार्केट से सामान किनब चक्कू कैची आदि ।
पीताम्वरी देवी