“शारीरिक, मानसिक आ बौद्धिक विकास के अवरुद्ध करैये ई घोर अपराध”

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— आभा झा।                       

बाल श्रम के मतलब अछि कम वयस में बच्चासँ लेल गेल काज जे कोनो क्षेत्र में हुनकर मालिक द्वारा कराओल जाइत छैक।ई एक दबावपूर्ण व्यवहार अछि जे अभिभावक या मालिक द्वारा कैल जाइत छैक। बचपन सब बच्चाकेँ जन्म सिद्ध अधिकार छैक, जे माता -पिता के प्यार और देख-रेख में सब के भेटबाक चाही।ई गैरकानूनी कृत्य बच्चाकेँ पैघ जेकां जीबै पर मजबूर करैत अछि।एकर कारण बच्चा के जीवन में कतेक रास जरूरी चीजक कमी भ ‘ जाइत छैक जेना – उचित शारीरिक वृद्धि और विकास, दिमाग के अनुपयुक्त विकास, सामाजिक और बौद्धिक रूपसँ अस्वास्थ्यकर आदि।बाल- श्रम नाम में एक बहुत पैघ अपराध छिपल अछि जे भविष्य के अंधकार दिस ल ‘ जा रहल अछि।बाल श्रम, भारतीय संविधानक अनुसार 14 वर्षसँ कम वयस के बच्चा के कारखाना , दोकान, होटल, रेस्तरां , कोयला खदान, पटाखा के कारखाना आदि जगह पर कार्य करेनाइ बाल श्रम छैक। बाल श्रम में बच्चाकेँ शोषण सेहो शामिल होइत छैक, शोषणसँ आशय बच्चासँ एहेन काज करवेनाइ जकरा लेल ओ मानसिक एवं शारीरिक रूपसँ तैयार नहिं अछि।भारतीय संविधान में मूल अधिकार के अनुच्छेद 24 के अंतर्गत भारत में बाल श्रम प्रतिबंधित छैक। बाल श्रम के मुख्य कारण बच्चाकेँ माता- पिता के लालच, असंतोष होइत छैक। अपन एशो- आरामक लेल बच्चासँ मजदूरी करबैत छथि।जाहि कारण बच्चा ने स्कूल जा पबैत अछि और ने ज्ञान प्राप्त क’ पबैत अछि।बचपन जिनगी के बहुत खूबसूरत सफर होइत छैक। कोनो चिंता ने फिकिर होइत छैक,एक निश्चिंत जीवनक भरपूर आनंद लेनाइ ही बचपन होइत अछि।लेकिन किछ बच्चाकेँ बचपन में लाचारी और गरीबी ओकरा मजबूर क ‘ दैत छैक जाहि कारणसँ ओकरा बाल श्रम जेहेन समस्या के सामना करय पड़ैत छैक। बाल श्रम वर्तमान समय में बच्चाकेँ मासूमियत के बीच अभिशाप बनि क ‘ सामने आबि रहल छैक। 2021 के बाल श्रम के उन्मूलन के लेल अंतरराष्ट्रीय वर्ष के रूप में घोषित कैल गेल छल। बाल श्रम के दुष्प्रभावसँ बचपन खतरा में –
1- बच्चा के विकास में रूकावट- बाल श्रम के सबसँ बेसी असर बच्चा के विकास पर होइत छैक। जे वयस में बच्चा के खेल-कूद करबाक चाही , शिक्षा लेबाक चाही ओहि वयस में ओकरा मजदूरी करय पड़ैत छैक।
2- बाल श्रमिक के अधिक शोषण- बाल मजदूर के हुनकर मालिक द्वारा बेसी शोषण कैल जाइत छनि।कम मजदूरी देलाकेँ संग काज बेसी करय पड़ैत छैक। दिन भरि तिरस्कार के सामना करय पड़ैत छैक।
3- बाल शिक्षासँ वंचित- परिवार में आर्थिक स्थिति नीक नहिं रहलासँ मजदूरी करय लेल मजबूर भ’ जाइत छथि।शिक्षा हुनकर जीवनसँ कोसो दूर रहैत छनि।भविष्य दाँव पर रहैत छनि।कखनो कोनो घटना घटित भ ‘ सकैत अछि किछ कहनाइ असंभव छैक।
बाल श्रमिक हेतु कि सब व्यवस्था हेबाक चाही – जेना श्रमिक स्कूल- सरकार द्वारा बाल मजदूरक लेल श्रमिक स्कूल खुजबाक चाही। जे हुनका काजकेँ बाद शिक्षा प्रदान करैन।
निःशुल्क शिक्षा – सरकार द्वारा सब सरकारी स्कूलक शिक्षा , दसवीं कक्षा तक निःशुल्क क’ देबाक चाही। एना केलासँ सब गरीब बच्चा हाई स्कूल परीक्षा उत्तीर्ण क’ सकैत छथि एवं हुनका रोजगार आसानीसँ प्राप्त भ ‘ जेतेन।हुनकर भविष्य उज्जवल हेतेन।
जागरूकता- बाल श्रम के रोकय लेल लोककेँ जागरूक भेनाइ अत्यंत आवश्यक छैक। बाल मजदूरी एक अपराध छैक तथा जे मालिक बाल मजदूरी करा रहल छथि हुनकर खिलाफ शिकायत दर्ज हेबाक चाही।हम मधुबनी जिलाकेँ होटल, दोकान सब में बाल मजदूर के काज करैत देखने छी।अहाँ जे होटल में खाना खा रहल छी अथवा दोकान पर सामान ल ‘ रहल छी ओहिठाम जे बच्चा काज क ‘ रहल अछि ओ बाल श्रम के शिकार अछि।अहाँ अपन घरसँ शुरूआत करू। हमर काजवाली बाई अपन बारह वर्ष के बेटी के काज करय लेल पठा देलक। हम ओकरा मना क ‘देलियै कि हम एकरासँ काज नहिं करायब।ओकरा बुझेलियै कि एखन एतेक छोट में कियैक एकरा काज करवा रहल छहि।एकरा शिक्षा नहिं देलहि त’ कम सँ कम सिलाई के शिक्षा दिया दियौ। तखन ओ हमर बातकेँ बुझलक। ओकरा सिलाई कढ़ाई के ट्रेनिंग दिया देलकै।आइ ओ एकटा बुटीक में काज क’ रहल अछि। पूरा विश्व बाल श्रम रोगसँ ग्रसित अछि। बाल श्रम के खिलाफ आवाज उठेनाइ आवश्यक अछि।प्रसिद्ध जर्मन विद्वान मैक्स मूलर कहने छथि कि” पश्चिम में बच्चा दायित्व बुझल जाइत छैक जखन कि पूर्व में बच्चा सम्पत्ति ” ई कथन भारत के संदर्भ में शत् प्रतिशत सही छैक। सरकार और आर्थिक रूपसँ समृद्ध लोककेँ बाल श्रम के खत्म करय में सहयोग करबाक चाही।हमरा सबकेँ मिलि क ‘ अपन आस-पास के वातावरण के शिक्षासँ जोड़बाक चाही। जाहि सँ हमरा सभके भविष्य में बाल श्रम के दृश्य देखय लेल नहिं भेटै।बाल श्रम एक अपराध अछि , एहि अपराध के जड़िसँ मिटाबैकेँ लेल हमरा सभकेँ आगू बढ़बाक चाही।

आभा झा
गाजियाबाद