“मिथिलाक विशिष्ट पाबनि- जूड़िशीतल”

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— अखिलेश कुमार मिश्र।         

मिथिलाक जे भौगोलिक स्थिति अछि से उत्तर हिमालय, दक्षिण गंगा, पूरब कोशी आ पश्चिम गंडक तक अछि। बीच कमला-बलान आ बागमती नदी सेहो अप्पन जल सँ अहि धरा कें सिंचित करैत छैथि। अर्थात ई क्षेत्र सदा प्राकीर्तिक रूप सँ परिपूर्ण रहल अछि। तै एतुका लोक कें प्रकृति सँ विशेष प्रेम भेनाइ स्वभाविक अछि। ई प्रकृति प्रेम एतुका हरेक पाबनि-तिहार में रचल बसल अछि। सभ पाबनि-तिहारक प्रकृति प्रेम के वर्णन संक्षेप में प्रस्तुत अछि।
जुड़-शीतल शब्द दू शब्दक जोड़ अछि। पहिल अछि जुड़, मतलब जुड़ेनाइ अर्थात केकरो सुख देनाइ या तृप्त केनाइ आ दोसर शब्द अछि शीतल अर्थात केकरो शीतलता प्रदान केनाइ। मिला जुला कs ऐह भेल जे अहाँ दोसर के कतेक हित कs सकै छी चाहे हो मनुष्य हो वा प्रकृति।
चलु तहन ई दिखियौ जे जुड़-शीतल पावनि में ई बात कोना निहित अछि। चैत महिनाक संक्रान्ति आ ओक्कर प्रातः जुड़ शीतल मनाओल जाइत अछि। ई पावनि दू दिनक होइत अछि। पहिल दिनकेँ टटका या सतुआइन कहल गेल अछि आ दोसर दिनक पावनि कें बसिया आ धुरखेल कहल गेल। पहिल दिन मुख्यतया दान पुण्य आ समयानुकूल भोजन के प्रधानता रहैत अछि। ग्रीष्मक आरम्भ भs गेल रहैत अछि तs नवका घैल में शीतल जल, नया उपजल जौ, आमक टिकुला, पाई आ अन्य सामग्री दान कैल जाइत अछि। भोर में सत्तू या चुरा दही सँ सुरुआत, दिन में बड़ी भात सँग नीक तरुआ तरकारी खास कs नवका परोर आ कटहर, आ राति में नबका बदाम (चना) आ गहूम सँ निर्मित दलीपुड़ी।
दोसर दिन भोरे भोर माँ-दादी द्वारा बसिया पानि सँ माथा पर थपकी दs कs जुड़ेनाइ, सभ कलम गाछी में घैल सँ पानि देनाइ, बसिया बड़ी-भात खेनाइ, सभ पोखडि झाँखुर कें साफ सफाई आ धुरखेलक प्रधानता अछि। साँझ कs कतौ कतौ कुश्ती दंगल कें सेहो प्रतियोगिता होइत अछि।
मिला-जुला कs ई पाबनि पूर्णतया प्रकृति सँ मिलि कs मनाओल जाइत अछि।
🙏🙏🙏🙏धन्यवाद🌹🌹🌹🌹
✍️अखिलेश “दाऊजी”, भोजपंडौल, मधुबनी।