“आउ नववर्षक स्वागत करी”

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— आभा झा।               

भारत के विभिन्न भाग में नव वर्ष अलग-अलग तिथि क ‘ मनाओल जाइत छैक। प्रायः ई तिथि मार्च और अप्रैल के महीना में पड़ैत अछि।अपन मिथिलाक लोक 14 अप्रैल क ‘ जुड़शीतल के रूप में नूतन नववर्ष मनबैत छथि।पंजाब में बैशाखी नाम सँ एहि नववर्ष के मनाओल जाइत छैक। जुड़शीतल या मैथिल नववर्ष या मिथिला दिवस मिथिलाक नववर्षक उमंगक दिन छी।हिंदू समाज में नूतन वर्ष बड्ड धूमधाम सँ मनाओल जाइत छैक। हिंदू पंचांगक अनुसार,
हरेक साल चैत्र माह के पहिल दिन यानी कि नवरात्रि के प्रतिपदा तिथि सँ ही हिंदू नववर्ष आरंभ भ ‘जाइत छैक। हिंदू नववर्षक शुरूआत अखंड भारत के चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य( विक्रम सेन परमार) के नाम पर भेल।विक्रमादित्य अपन प्रजा के लेल बेहद न्यायप्रिय शासक छल और अपन प्रजा के हितक रक्षा सेहो करैत छलाह। विक्रमादित्य के जन्म सँ पहिने उज्जैन पर अत्याचारी शक सबहक शासन छल। लेकिन शूरवीर विक्रमादित्य 57 BCE में
शक सब के हरा क ‘ जीतक उपलक्ष्य में नब काल सब के निर्माण केलनि , एकरे हिंदू पंचांग में विक्रम संवत या हिंदू नववर्ष कहल जाइत छैक। एहि नववर्षक प्राकृतिक महत्व सेहो छैक। बसंत ॠतु के आरंभ वर्ष प्रतिपदा सँ होइत छैक जे उल्लास, उमंग, खुशी तथा चारू दिस पुष्प के सुगंध सँ भरल होइत छैक। फसल पकय के प्रारंभ यानी किसान के मेहनतक फल भेटय के यैह समय होइत छैक। नक्षत्र शुभ स्थिति में होइत छैक अर्थात कोनो काज के प्रारंभ करय लेल ई शुभ मुहूर्त होइत छैक। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के एतिहासिक महत्व सेहो छैक। एहि दिन के सूर्योदय सँ ब्रह्माजी सृष्टिक रचना प्रारंभ केने छलाह। प्रभु श्रीराम के राज्याभिषेक के दिन यैह छनि।सम्राट विक्रमादित्य एहि दिन राज्य के स्थापित केने छलाह। शक्ति और भक्ति के नौ दिन अर्थात नवरात्रि के पहिल दिन यैह अछि। स्वामी दयानंद सरस्वती जी एहि दिन आर्य समाजक स्थापना केलनि एवं कृणवंती विश्वमआर्यम के संदेश देलनि। सिंध प्रांतक प्रसिद्ध समाज रक्षक वरूणावतार भगवान झूलेलाल यैह दिन प्रकट भेला।युधिष्ठिर के राज्याभिषेक सेहो एहि दिन भेलनि। सिख के द्वितीय गुरू श्री अंगद देवजी के जन्म दिवस अछि। सुप्तावस्था में पड़ल गाछ जड़- चेतन तत्व गतिमान भ ‘ जाइत छैक। नदी में स्वच्छ जलक संचार होइत छैक। सूर्य-रश्मिक प्रखरता सँ खड़ी फसल परिपक्व होइत अछि।बौरायल आम और कटहर नूतन संवत्सर के स्वागत में सुगंध बिखेरैत अछि।एहि ब्रह्म चैतन्यमय प्राकृतिक वातावरणक लाभ सँ व्यक्तिगत व सामाजिक जीवन में उपवास द्वारा शारीरिक स्वास्थ्य लाभ के संग-संग जागरण, नृत्य-कीर्तन आदि द्वारा भावनात्मक एवं आध्यात्मिक जागृति आनय लेल नूतन नववर्ष के प्रथम सँ ही माँ आद्यशक्ति के उपासनाक नवरात्रि महोत्सव शुरू भ ‘ जाइत छैक। नूतन नववर्ष प्रारंभ के पावन बेला में हमसब एक-दोसर के सत्संकल्प द्वारा पोषित करी कि सूर्यक तेज, चंद्रमाक अमृत, माँ शारदा के ज्ञान, भगवान शिव जी के तपोनिष्ठा , माँ अम्बे के शत्रुदमन सामर्थ्य व वात्सल्य, दधीची ॠषि के त्याग, भगवान श्रीरामचंद्रजी के कर्तव्यनिष्ठा व मर्यादा, भगवान कृष्ण के नीति व योग, हनुमान जी के निःस्वार्थ सेवाभाव, पितामह भीष्म एवं महाराणा प्रताप के प्रतिज्ञा, ब्रह्मज्ञानी सद्गुरु के सत्संग सान्निध्य व कृपा वर्षा ई सब अहाँ सब के सुलभ हो। अपन गरिमामयी संस्कृतिक रक्षा हेतु सामुहिक भजन-संकीर्तन व प्रभातफेरी के आयोजन करी। मंदिर में शंखध्वनि करि क ‘ नववर्षक स्वागत करी।

आभा झा ( गाजियाबाद)