“चैत हे सखी फूलल बेली, गमकय आमक गाछी हे”

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— कृति नारायण झा।               

“चैत हे सखी फूलल बेली, गमकय आमक गाछी हे। आमक मज्जर पर बाजय कोयली, गमकय महुआ के गाछ हे ” ई मधुर गीत हमरा लोकनि अपन बरहारा बाली काकी के मुँह सँ सुनियैन आ हमर सभक कान में लागय जेना कियो मिश्री के रस घोरि देने होइथ। हिन्दू पंचांग केर अनुसार नव वर्ष चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिन सँ आरम्भ होइत छल जकर सभ सँ बेसी अनुभव हमरा लोकनि करैत छलहुँ कारण जे हमर पिता ज्योतिष शास्त्रक प्रकांड विद्वान् छलाह आ एहि दिन रंग बिरंग केर पतरा सभ अपन पिताक हाथ में देखि बुझाइत छल जे कोनो नव दिनक शुभारम्भ भऽ रहल अछि। चैती दुर्गा हमर सभक गाम सँ तीन किलोमीटर दक्षिण बरहगोरिया बाबू साहेब के ड्योढी में बहुत धूमधाम सँ मनाओल जाइत छलैक आ हमरा लोकनि भरि राति जमि कऽ नाच तमाशा देखैत छलहुँ। पांच छओ गाम के लोक राति में ड्योढी में जुटैत छलाह तेँ पएर रखवाक स्थान नहिं रहैत छलैक। हमर मामा गाम ओहिठाम सँ नजदीक होयवाक कारणे हमर ममियौत भाई सभ सांझे सँ स्टेज के बगल में बोरा ओछा दैत छलाह आ हम सभ आराम सँ लग सँ नाटक देखैत छलहुँ। एहि समय में मौसम अनुकूल रहैत छैक अर्थात् ने ठंढी आ ने गर्मी। तें दुर्गा पूजा देखवा में बड्ड नीक लगैत छल। आमक छोट छोट टिकुला आ पटुआ सागक झोर पेट के हिमाल कऽ दैत छल। वास्तव मे नव वर्ष केर अनुभूति चैत मासक नवरात्रि सँ बुझाइत छैक। फगुआक पंद्रह दिनक पश्चात नव वर्ष केर आगमन होइत छैक। गहूँमक फसिल तैयार होयवाक सुरसार होइत रहैत छैक। आमक गाछ मज्जर सँ लदल बातावरण के सुगन्धित करैत रहैत छैक। कोयली केर कुहुकनाइ वातावरण में एकटा अत्यन्त आनन्द केर अनुभूति करवैत अछि। हिन्दू नववर्ष के शुभारंभ चैत मास के शुक्ल पक्ष के प्रतिपदा तिथि सँ आरम्भ होइत छैक जकरा गुङी पङवा सेहो कहल जाइत छैक। पौराणिक मान्यता के अनुसार एहि दिन ब्रम्हा जी एहि श्रृष्टि केर रचना कयने छलाह। चैत मास के प्रतिपदा के दिन महान गणितज्ञ भास्कराचार्य सूर्योदय सँ सूर्यास्त तक दिन, मास आ वर्ष के गणना करैत हिन्दू पंचांग केर रचना कयने छलाह आ वर्ष भरिक पावैन तिहार, धार्मिक अनुष्ठान, मुंडन, उपनयन, बियाह द्विरागमन इत्यादि केर मुहुर्त निश्चित कयल जाइत अछि। एहि दिन सँ नवसंवत्सर आरंभ भ जाइत छैक। एकटा मान्यता के अनुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन भगवान राम वानरराज बाली के बध कऽ कऽ ओहिठामक प्रजा के आतंक सँ मुक्ति दियाओने रहैथि जाहि खुशी में ओहिठामक प्रजा लोकनि अपन घर में उत्सव केर आयोजन कयने छलाह। एहि दिन महाराज विक्रमादित्य द्वारा विक्रमी संवत के शुरूआत भेल छल। चैत्र नवरात्रि केर आरम्भ एहि दिन सँ आरम्भ होइत अछि आ नवमी तिथि कऽ मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम केर जन्मोत्सव आ चैत्र पूर्णिमा कऽ भगवान राम के सभ सँ प्रिय भक्त हनुमान जी केर जयंती मनाओल जाइत अछि। शास्त्र केर अनुसार सभ सँ पहिल युग सतयुग केर प्रारम्भ एहि पवित्र तिथि चैत्र प्रतिपदा सँ आरम्भ भेल छल। श्रृष्टि कें कालचक्र केर प्रारम्भ एही तिथि सँ मानल जाइत अछि। आर्य समाज केर स्थापना महर्षि दयानन्द सरस्वती द्वारा एही दिन कयल गेल छल। एहि प्रकार सँ ई दिन सभ तरह सँ पवित्र आ उपयुक्त मानल जाइत अछि नववर्ष केर आरम्भ हेतु। जय मिथिला 🙏