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“मनक भाव व्यक्त करबाक एकटा नीक माध्यम”

278 भ्यूज

— आभा झा।           

लिखित रूप में अपन मन के भाव एवं विचार के प्रकट करै के माध्यम ‘चिट्ठी’ अछि। ‘पत्र ‘ के शाब्दिक अर्थ अछि,एहेन कागज जाहि पर कोनो बात लिखल अथवा छपल हो।पत्रक द्वारा लोक अपन बात के दोसर तक लिख कऽ पहुँचाबैत छल। व्यक्ति जे बात के बाजि कऽ कहै में संकोच करैत अछि,हिचकिचाइत अछि,ओहि बात के ओ पत्रक माध्यम सँ लिखित रूप में खुलि कऽ अभिव्यक्त करैत अछि।दूर रहै वाला बेटा के अपन माँ – बाबूजी अथवा संबंधिकक,मित्रक कुशलता जानय लेल तथा अपन कुशलता के समाचार देबय लेल पत्र एक साधन छल।पत्र जेहेन संतोष फोन या एस-एम-एस-कहाँ दऽ सकैत अछि।पत्रक अलग-अलग नाम छैक,उर्दू में ‘खत’ संस्कृत में ‘पत्र ‘ कन्नड़ में ‘कागद’ तेलगू में ‘उत्तरम’ तथा तमिल में ‘कडिद’ कहल जाइत छैक।पत्र याद के सहेज कऽ रखैत अछि।भारत में प्रतिदिन चारि करोड़ चिट्ठी डाक में डालल जाइत छैक। 9 अक्टूबर विश्व डाक दिवसक रूप में मनाओल जाइत छैक।पत्राचारक बड्ड महत्व छैक। पत्र साहित्यक ओ विद्या अछि जकरा मनुष्य समाज में रहितो अपन भाव एवं विचार के दोसर तक सम्प्रेषित करय चाहैत अछि।व्यवसाय,कार्यालय आदि सँ संबंधित अपन भाव एवं विचार प्रकट करै में पत्र अत्यंत उपयोगी होइत छैक।पत्र मित्र एवं परिजन सँ आत्मीय संबंध एवं संपर्क स्थापित करै लेल सेहो उपयोगी छैक।पत्रक माध्यम सँ मनुष्य अपन प्रेम,सहानुभूति,
क्रोध आदि प्रकट करैत अछि।सैनिक लेल सेहो पत्रक बड्ड महत्व छैक। छात्र जीवन में सेहो पत्र स्कूल सँ अवकाश लेल,फीस माफी लेल,स्कॉलरशिप लेल,व्यवसाय चुनै लेल महत्वपूर्ण अछि।पत्र सामाजिक संबंध के मजबूत करै के माध्यम अछि।पत्रक सब सँ बेसी उपयोगिता तखन अछि कि कखनो-कखनो पत्र भविष्यक लेल महत्वपूर्ण दस्तावेज बनि जाइत छैक। नेहरूजी के पत्र इंदिरा जी के लेल लिखल गेल,जे करोड़ों लोकक लेल प्रेरणा-स्रोत अछि।सब महान हस्ती के सब सँ पैघ यादगार या धरोहर हुनकर लिखल गेल पत्रे अछि।भारत में अहि श्रेणी में महात्मा गांधी के सब सँ आगू राखल गेल अछि।विश्व के लगभग सब संग्रहालय में जानल-मानल हस्ती के पत्रक संकलन अछि।पत्र एक संचार माध्यम ही नहिं अछि,ई मार्गदर्शक के भूमिका निभबैत अछि।चाहे गरीब हो या अमीर सब के अपन प्रियजन सँ प्राप्त पत्रक इंतजार रहैत छल। गाम सब में लाखों-लाख गरीबक चूल्हा मनीआर्डर अर्थव्यवस्था सँ ही जरैत अछि।गाम में मनीआर्डर आनै वाला डाकिया के देवदूत के रूप में देखल जाइत छैक। पति-पत्नी एक दोसर के अपन मनक भाव चिट्ठी के माध्यम सँ अभिव्यक्त करैत छलीह। पुरान सिनेमा सब में सेहो प्रेमी प्रेमिका एक दोसर के पत्र आदान -प्रदान करैत देखाओल गेल अछि।’ फूल तुम्हें भेजा है खत में’ और चिट्ठी आइ है आइ है चिट्ठी आइ है’ ई गीत सब खूब प्रचलित छल। निश्छल भाव और विचारक आदान-प्रदान चिट्ठी के माध्यम सँ ही संभव अछि।महाभारत सँ लऽ कऽ हिन्दी साहित्यक वीरगाथाकाल,
भक्तिकाल और रीतिकाल में सेहो पत्र लेखन के परंपरा भेटैत छैक।पुरान समय में कबूतर के द्वारा संदेश पठाओल जाइत छल। ई चिट्ठी कखनो सुख कखनो दुख कखनो वियोग कखनो संयोग सबहक दर्शन करबैत अछि।कतबो दूरी हुए दिल में सब के करीब आनैत अछि।ओ कागज के चिट्ठी जखन लग अबैत अछि।कखनो हँसाबैत कखनो कनबैत तऽ कखनो गुदगुदाबैत अछि।तकनीकी युगक एला सँ एकर प्रयोग में कमी तऽ आयल अछि लेकिन एकर महत्व कखनो कम नहिं भेल। जय मिथिला जय मैथिली।
आभा झा ( गाजियाबाद)

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