“दहेजक मारि”

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— अखिलेश कुमार मिश्रा।             

आई हम जे लिखि रहल छी ई कुनो कथा नै, सीधे बुझु जे सत्य घटना अछि जेक्कर साक्षी हमहू छी।
नाम छल हुनकर उर्मि, उर्मिला। जहिना लक्ष्मणजीक पत्नी उर्मिला चौदह बरख पति कें अछैत पति विहीन रहली, ई उर्मि तs जिनगी भरि पति विहीन रहली। उर्मि पाँच भाई बहिन में दोसर स्थान पर छलीह। हुनका सँ पैघ एक भाय आ छोट दू बहिन आ एक भाय रहथिन्ह। सामान्य ओहि समय में गरीब ही बुझु, परिवार में हुनकर जन्म भेलैन्ह। देखय-सुनै में सेहो लगभग सामान्य ही, नै कुनो दब या नै कुनो बड्ड सुन्दर। माय-बाप कें लेदे-गेदे अतेक धिया-पुता। बुझु जे भोजनों पर आफत। ताहि पर बेटी, आ बेटीक कन्यादानक चिन्ता। बिना दहेजे विवाह क़तs होयत। उर्मि जेखन मात्र पाँच छह वर्षक भेलीह तs हुनका लेल वर ढूंढनाई शुरू भs गेल। तहन तs विधिना जे नै करबै। हुनकर विवाह एक चालीस-पैंतालीस वर्षक गरीब ब्राम्हण जिनकर विवाह कतौ नै होइत रहैन्ह, सँ भs गेलैन्ह। बचिया उर्मि के परतारि कs जे ओय गाम में अहाँ कें खूब नीक गहना गुड़िया भेंटत, महफा में बैसा देल गेलैन्ह। बचिया के कुनो भान नै रहैन्ह जे हुनका सँग की भेलैन्ह। सासुर एलीह तs सिर्फ अधवयसु पति, आ एक विधवा सासु रहथिन्ह। टुटल फुटल घर। ई तs एतय आबि अछोहे कानैथि। माय माय कs कs भागि जाइथ। मुदा बचिया के किछु देखल सुनल नै रहैन्ह। लोक सभ हुनका कहुना क पकड़ि धकड़ी कs राखैत छल। ओतेक छोट बचिया संग एहेन बात, ओ तs आब बाजनाई भूकनाई बन्द क देलीह। बुझु जे एकदम गुम सुम रहs लगलीह। पैघ भेलीह तs पतिदेव कलकत्ता नौकरी करै लेल चलि गेल रहैथि। ओ ओतय महाराजजी रहैथि मतलब कुनो सेठ ओतय भनसियाक काज कड़ैथि।
एम्हर नैहर में आन बहिन सभ पैघ भेलीह तs सभक विवाह भेल। छोटकी सभक विवाह तs भेल गरीब घर में मुदा सभ वयस हिसाबे ठीक। एक बहिन के घरवाला तs बाद में गजेटेड अफसर भs गेलखिन्ह। उर्मि पर भितरे भीतर की बितैत छल से तs वैह जानती, मुदा ऊपर सँ निर्विकार भाव सँ खाली सभ के ताकैत रहैत छलीह। कहियो अप्पन माय-बाप कें नै दोष देलैथ। बस अप्पन कपार के दोष मानलीह।
हाँ, किस्सा आगाँ बढ़ाबी। उर्मि जेखन पैघ भेलीह पति सुख सँ पूर्णतया बंचित। एक तs पति सभ दिन कलकत्ते में, दोसर हुनकर शारिरिक स्थिति एहेन धिया-पुता बिल्कुले नै होइत। अहि बातक अनुचित लाभ गामक ओझा-गुणी सभ लेबs चाहलक मुदा उर्मि टस सँ मस नै भेलीह। गरीबी में कहुना कs दिन कटि रहल छल। घर मे बुढ़िया सासु। सेहो बुझु आब ओछाउन पर सँ उठि-बैसि नै कड़ैथि। उर्मि भाग्य के मानि हुनकर सेवा कड़ैथि। कहब जे ओहो सगी सासु नै, सत सासु रहथिन्ह। ई स्थिति करीब छह महीना तक रहैन्ह। तहन एक दिन सासु कें देहांत भs गेलैन्ह। दियाद बाद सभ तेहने जे आगि देब बूढ़ी के घर-घरारी हम्मर। तहन बेचारी अपने आगि देलीह। फेर जेखन घरवाला कलकत्ता सँ एलखिन त उत्तरी हुनकेँ। मुदा घरवाला के उम्र सेहो अस्सी पार। ओ जे गाम एलाह से आब गामे रहि गेलाह। दियाद में एक दियाद बड्ड नीक रहथिन्ह जे बिना कुनो लोभ सँ हुनका आर्थिक मदद कड़ैत कहुना क श्राद्ध कर्म सभ करबा देलखिन्ह।
ताबत किछु बहिन-बहनोई आ ओहि दियादक मदद सँ कहुना कs समय बीतs लागलैन्ह। आब तs हुनकर श्रीमान सेहो बिस्तर पकड़ि लेलाह। उर्मि की करती। भाग्य के की कहती। अप्पन भाग्य के कोसैत पति सेवा में लागल रहलीह। साल भरि के बाद पति सेहो अहि दुनियाँ के छोड़ि विदा भs गेलाह। फेर दियाद सभक वैह स्थिति। फेर ई पति कें अपने मुखाग्नि देलीह आ कर्म सेहो केलीह। जे नीक दियाद रहथिन्ह से हिनकर मदद कड़ैत रहलखिन्ह।
पहिले तs किछु खा पी कs गुजर कड़ैत रहैथि मुदा आब त विधवा। माछ मरुआ, मसुरी, घेरा आदि सभ सँ बंचित। तहन तs शरीर अछि, अपने तs लोक प्राण त्यागि नै सकै अछि, तs जी रहल छैथि। आब हुनकर आयु करीब सत्तर साल। तीस साल सँ वैधव्य के जिनगी जी रहल छैथि। आब हुनकर खर्च बहिन पूत सभ उठा रहल छतिन्ह। आब ई भेल जे बरसात में पिच्छर में ओ खसि पड़लीह। डांर में तेहेन चोट जे बैसाखी के सहारे चलैत छैथि। बस एक एक दिन काटि रहल छैथि अप्पन मृत्युक इंतजार में।
अहि कथा में अहाँ सभ कें दहेज कतौ नै बुझैल हैत। मुदा परोक्ष रूप सँ उर्मि कें जिनगी नर्कमय कराई लेल ई दहेज ही दोषी अछि। उर्मि के माता पिता दहेज के डरे ही बच्चिया उर्मि कें विवाह कs कs एहेन जिनगी जीवै लेल बाध्य केलैथि।
🙏🙏🙏इति🙏🙏🙏

अखिलेश “दाऊजी”, भोजपंडौल, मधुबनी।