“दहेजक दुष्प्रभाव”

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— आंचल झा।                     

कल्पना के जन्म छोट सन गाँव में भेल छलैन। हुनकर पिताजी एकटा किसान छलथि। माता सरल स्वभाव के महिला छलखिन। चार बेटा के बाद कल्पना के जन्म भेल छलनि। माता-पिता स बहुत लाड़-प्यार भेटलनि। देखय मे भी सुन्दरी। हुनकर भाई सब भी बहुत प्रेम करय छलखिन। बचपन बहुत सुखद बीतलनि।

भाई सबके संग ओहो स्कूल जा क पढ़ाई करय लगलि।पढ़ाई मे बहुत होशियार छलथि हमेशा नीक नम्बर स उत्तीर्ण भेलथि। आगू पढ़ाई के सेहो इच्छुक छलथि परन्तु आगा पढ़ाई लेल बाहर जाय परितैन मगर आर्थिक स्थिति ओहन नय छलनि जयके कारण पढ़ाई छोरय परलैन।

आब हुनकर पिता के सामने हुनकर विवाह के समस्या छलनि। योग्य पुत्री लेल योग्य वर के खोज में हुनकर पिता जमीन-आसमान एक क देलखिन। हुनकर परेशानी देख क कल्पना अपना सुन्दरता और योग्यता के कोसथी, परन्तु किछ क नय सकैय छलथि। आखिरकार हुनका लेल योग्य वर के तलाश पूर्ण भेल। लड़का नीक पढ़ल और सरकारी नौकरी मे छलथि। लड़का के पिता लग के गाँव के एकटा शिक्षक छलथि। घर में कुनू प्रकार दिक्कत नय छलनि।

कल्पना के विवाह भेल परन्तु हुनकर विवाह दहेज युक्त भेलनि ओय स अन्जान छलथि।हुनकर पिता धन स लक कुनू वस्तु दय मे पीछा नय हटलथि।

खैर, ओ सासुर आइब गेली और अपन व्यवहार स सबके खुश रखय के कोशिश करय लगली। लेकिन, विधि के त अलग ही विधान छल। हुनकर सास, ननद और पति, हुनका तरह-तरह स प्रताडित करय लगलखिन। ताना मारब त कखनो मार-पीट भी होव लगलनि। कारण ऐकेटा ही छल कि हुनका सबके मोटरसाइकिल चाही। ओ अपन दुख नैहर मे भी कोना बजती ओत के आर्थिक स्थिति ओय लायक नय छल जे मोटरसाइकिल द देथिन। कल्पना अपन भाग्य के विडंबना बुझि चुप रहलि।
हुनकर पिता के भी हुनकर स्थिति के भान भ गेल छलनि मगर ओ कि क सकय छलथि।

एक राइत, हुनकर सास, ननद और पति मिल क योजना बना क कल्पना पर मिट्टी के तेल डालि क हुनका जला देलखिन ताकि हुनकर बेटा के दोसर विवाह होइन और हुनका सबके और धन , दहेज भेटनि।

अय सब मे हुनकर पिता के यह दोष न कि ओ गरीब छलथि और इ दानव समाज और ओय मे रहय बला दहेज के ठेकेदार हुनकर योग्य बेटी के खा गेलनि।