“दहेजक प्रभाव”

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— किरण लता झा।             

# दहेज
निशा सामान्य कदकाठी के कन्या छलि , बचपन स़ पढाई, लिखाई के अलावा घरेलू काम काज में बहुत रूचि छलईन | जेना, जेना पईघ भेलि और होशियार, समझदार होईत गेली, मुदा हुनकर कद, काठी हमेशा हुनकर प्रतिभा के दबा देईत रह ईन, हुनकर माता पिता हमेशा हुनका आगू बढ़बथिन |अपना पढाई में अब्बल आब़ वाली निशा पढि़, लिख क़ डाक्टर बईन गेली, लक्ष्मी और सरस्वती जेना हुनका दूनू हाथ में बईस गेल रह ईन | धीरे, धीरे विवाह के उम्र में आईब गेली माता, पिता विवाह लेल प्रयास कऱ लगलथ, मुदा एक बेर फेर हुनकर कद, काठी हुनका प्रतिभा पर ग्रहण बन छा गेलईन, एहि कमी के आड़ में दहेज के से हो मांग होअ लग लईन, माता, पिता परेशान रहथ , जहाँ निशा के कान में दहेज के बात आबईन ओ विवाह स़ साफ इनकार क़ जाथिन |एहि परिवारिक परेशानी के बीच पिताजी के रिटायरमेंट भ़ गेलईन माताजी बीमार और छोट भाई बहिन के से हो विवाह के उम्र भ़ गेलईन | खैर समय के पहिया घूमईत रहल समय आगू बढ़ईत रहल | निशा आब सरकारी सेवा में अपन योगदान देब लगली और अपन निर्णय स्पष्ट क़ देली जे ओ विवाह नई करती | छोट भाई, बहिन के विवाह क़ देल जाय | ऐहि बीच में हुनका संग काज कऱ वाला एकटा डाक्टर हुनका स़ बहुत प्रभावित भ़ गेलईन और चट मँगनी, पट बियाह भ़ गेलईन |
शिक्षा के आगू दहेज बौना बनल तकईत रह़ गेलई और छोट कद, काठि के आगू दहेज विरोधी लेल प्रतिज्ञा के जीत भ़ गेलई |
किरण लता झा 🖋