“दहेजक आगि”

115

— आभा झा।                     

पिंकी अपन माँ बाबूजी के दुलरी बेटी छलीह। पिंकी पढ़य में बहुत नीक छलीह। मिश्रा जी अपन बेटीक विवाह गतातीये में तय केलनि।पिंकी के सासुर सं दहेजक मांग भेल छलनि।जखन पिंकी के एहि बातक पता चललेन तखन ओ अपन बाबूजी के ई विवाह करय सं मना कऽ देलखिन। मुदा बाबूजी हुनका समझा बुझा कऽ कि बहुत नीक घर वर अछि विवाहक लेल तैयार कऽ लेलखिन। पिंकी के अपन पढ़ाई के चिंता छलनि।हुनका होइत छलनि कि हमर विवाह भऽ जायत तऽ पता नहिं हम आगू पढ़ि पायब कि नहिं।हुनकर विवाह खूब धूमधाम सं भेलनि।पिंकी अपन सासुर अयली।सासुर अबिते एक दू दिनक बाद हुनका परिवारक लोक के उपराग सुनय पड़लनि।हमर बेटा के एतेक भरि सोना के चेन नहिं भेटल तऽ माँ बाप गहना किछ नहिं देलखिन। पिंकी किछ नहिं बाजैथ ओ चुपचाप सब सुनैत छलीह। हुनकर पति सेहो शराब पिबी कऽ मारैत छलखिन। पिंकी सब सहैत छलीह। अपन माँ बाबूजी के किछ नहिं कहैथ।पिंकी के भैंसूरआ दियादनी के ई बर्दाश्त नहिं भेलनि।ओ पिंकी के एहेन हालत देखि अपन घर लेने गेलखिन। पिंकी के बाबूजी के फोन पर कहलखिन कि अहाँ अपन बेटी के जीवित देखय जाहै छी तऽ हिनका अपना लग लऽ जाउ।पिंकी के बाबूजी हुनका सबके बहुत बुझेलखिन। मुदा ओ सब ततेक लोभी छलाह जे पुतौह के कष्ट देनाइ हुनकर सबके दिनचर्या में शामिल छलनि।अंत में पिंकी के ओ सब मरणासन्न स्थिति में अपना संगे नेने एलखिन। पिंकी गर्भवती सेहो छलीह। हुनका एकटा बेटी भेलनि।पिंकी ब्यूटी पार्लर में काज करय लगली।ओ अपन बेटी के पढ़ा लिखा रहल छथि और कहैत छथि कि जाबे हमर बेटी अपन पैर पर ठाढ़ नहिं भऽ जायत हम एकर विवाह नहिं करब।जे दहेज मांगत ओकरा सं तऽ हरगिज अपन बेटी के विवाह नहिं करब। जय मिथिला जय जानकी 🙏🙏

आभा झा (गाजियाबाद)