“सार्थक डेग”

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अंजू झा।                               

विनोद बाबू मध्यम वर्गीय सधारण प्राईवेट नौकरी करै वला, परिवार में दू संतान पत्नी आ माय छलखिन। ठीक ठाक गुजर-बसर करै छलाह। लेकिन कतेको तरहक अभाव में रहि दुनू संतान के शिक्षित केनाई ध्येय छलैन।बच्चो दुनू मेधावी छलखिन।बेटी सुधा के स्नातक पूरा भेलाक बाद ओकर विवाह लेल लड़का खोजय लगलाह। बेटी के इच्छा बी.एड. करै के रहैन लेकिन परिवार के विवशता देख चुप रहली। विनोद बाबू के अपने समतूल एकटा रिस्ता पसंद एलैन,ऋण कर्ज लऽ सामर्थ के हिसाब सं दहेज़ गिनलैन। विवाह तय भऽ गेल। घर में विवाह के ओरियान होमय लागल। बेटी देखलैन माँ बाबूजी गहना, महग महग साड़ी, बर्तन फर्नीचर टेंट कैटरिंग सबके लिस्ट बनबै छैथ, जाहि में लमसम पाँचो लाखक खर्चा के बात केलैन।

ओम्हर लड़का बला के सेहो फोन एलैन जे सुधा के संग लऽ गहना, साड़ी पसंद करय लेल जायब।सुधा किछु दिन तऽ सब देखैत-सुनैत रहली लेकिन एक दिन किछु सोईच भाई के कहि कहुना लड़का के फोन नंबर लेलैन।
हिम्मत कऽ घर में एकांत देख लड़का के फोन लगेलैन आ किछु बात केलैन।
अगिला दिन लड़का अपन माता-पिता संग अचानक हिनका घर अयलाह। लड़का के पिता बिनोद बाबू के कहलैन आहाँक होई बला जमाई सूरज के आहाँसं किछु बात करै के छैन।विनोद बाबू घबराईत सांस लैत बजला कहू की बात?हमरा तरफ सं कोनो चूक भेल की?
सूरज कहलैन घबराऊ नै हम जे कहऽ एलौं वो असल में आहांँ बेटी के इच्छा छैन लेकिन संकोचवश ओ नहिं कहि सकली। लेकिन हुनकर जायज इच्छा के मान रखनाई हमर कर्त्तव्य अछि तैं आवाज हमर अछि लेकिन विचार सुधा के। सूरज आगा बजला जे सुधा चाहै छथि जे हमरा विवाह में दुनू परिवार जे आडंबर में खर्च कऽ रहल छी,जकर कोनो परोजन नै, हमरा लग पहिले सं कपड़ा अछि,बस विवाह लेल नितांत जरूरी कपड़ा आ गहना लऽ लिय। घर में पहिले सं बर्तन फर्नीचर अछि तैं अहि पर फालतू खर्च करब उचित नञिं किछु जरूरत के सामान दिय। टेंट आ कैटरिंग पर जे फिजूलखर्ची हैत ओहि सऽ बढ़िया दुनू परिवार सहमति सं अपन नजदिकी संबंधी के बजाऊ आ कोनो मंदिर में साधारण ढंग सऽ विवाह संपन्न करू।आ जे खर्च अहि ताम-झाम में करब ओहि सऽ सुधा के बी.एड.के पढ़ाई पूरा करा दियौन, जाहि सं हिनका भविष्य में फायदा हेतैन।आ हिनकर अहि बात सं हमर परिवार पूर्ण सहमत छैथ,हम दहेज़ में भेटल पैसा हिनका नाम सऽ जमा करा दै छी ।आहाँ सब बाजू जे की विचार????
विनोद बाबू बजला:-लेकिन**आगा किछु बजितैथ ओहि सऽ पहिले हुनकर माय जे बैस कऽ सबटा सुनैत रहैथ बेटा सं बजली,देखू ई बेटी जमाई के इच्छा अछि।आ हम भागमंत छी जे सूरज हमरा सुधा के जिनगी में एला।बच्चा सब सच्चे कहैया ताम-झाम में जे खरचब ओहि सं नीक जे बेटी के बातक मान राखैत ओकर भविष्य के सुधारू।समैध बजला जाहि में बच्चा खुश ओहि में हमहूँ खुश। विनोद बाबू भावविभोर भऽ समैध के भरि पाँज पकैर लेलैन,आ बेटी दिस तकैत कनैत बजला आहाँ सही में सुधा छी आई हमरा नव जीवन देलौं।हम धन्य भऽ गेलौं।