“सहयोग : सृष्टि के विधान”

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– अखिलेश कुमार मिश्रा।                 

 

“सहयोग”
सभ सँ पहिले तs सहयोग शब्द कें अर्थ की भेल से बुझी। सहयोग बनल अछि सह+योग सँ। सह मतलब साथ आ योग मतलब भेल मिलि कs। अर्थात जे किछु मिलि-जुलि कs करी से एक दोसर के सहयोग केनाइ कहबैत अछि। देखियौ, ई सृष्टिये के विधान अछि जे एसगरे कुनो काज पूर्ण नै होयत। अगर एसगरे काज पूर्ण होइत तs सृष्टि कें सभ सँ मुख्य काज अछि जे जनरेशन के आगाँ बढ़ेनाई। इहो काज कियो एसगरे नै कs सकै छैथि। तैं अगर धरती पर जन्म लेने छी बिना सहयोगे जिनगीक गाड़ी आगाँ बढिये नै पैत, ई बात नीक सँ बुझू।
अहाँ सभ सँ पहिले प्रकृति कें तरफ देखु। सभ जीव-जन्तु, गाछ-वृक्ष सभ एक दोसरक जिनगीक पूरक अछि। सभ एक दोसर कें जिनगी जीबs में प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप में सहयोगी अछि। शाकाहारी हो वा मांसाहारी सभ झुण्ड बना बना रहैत अछि। सुरक्षा के लेल हो वा शिकार के लेल, सभ झुण्ड में एक दोसरक सहयोगी रहैत अछि आ तक्कर नीक परिणाम भेटैत अछि। कहल जाइत अछि जे सिर्फ पादप (गाछ-वृक्ष) अप्पन भोजन स्वयम बनबैत अछि, मतलब ओ केकरो आर पर निर्भर नै कड़ैत अछि। मुदा पादप के जीवन चक्र कें आगाँ बढ़ाबs में कीट पतंग, मधुमाछी कें मुख्य भूमिका होइत अछि। अगर कीट पतंग नै हो तs गाछ वृक्ष के फूलक परागण नै हैत, फल आ बीज नै बनत आ पादप सभक सभक जेनेरेशन आगाँ नै बढ़त। मतलब परोक्ष रूप सँ कीट पतंग सभ पादप कें जिनगी बढ़ाबs में सहयोग केलक।
मनुष्य तs जन्मे सँ सामाजिक प्राणी अछि। एसगरे मनुक्ख किछु नै कs सकैत अछि। कतौ नै कतौ ओकरा सहयोगी के आवश्यकता पड़बे टा कड़ैत अछि। सभ कहैत अछि जे एसगरे दशरथ मांझी पहाड़ खोदि कs सड़क बना देलैथि। बड्ड नीक बात। मुदा सोचू जे हुनका खाना के बना क देलक, अन्न के उपजा क देलक, कपड़ा पहिर लेल के देलक, जाहि कोदारि खुरपी सँ पहाड़ तोड़लक से के बनेलक। कहक तात्पर्य ई जे अप्रत्यक्ष रूप सँ सहायता सहयोग के जरूरत तs परबे केलैन्ह।
कहाबत अछि जे “एसकरे वृहस्पतियो झूठ”। अगर आगाँ बढ़s के अछि तs सहयोगी कें आवश्यकता अछिये। अगर विज्ञान कें मानैत छी, तs ई बुझु जे आदि मानव सभ सेहो झुण्ड बना कs रहैथि आ झुण्ड में ही जीवन जीबs के लेल शिकार कड़ैथि। क्रमिक विकास भेल तहनो सभ झुण्ड में ही रहैथि, आ झुण्डक नियम ऐह अछि जे सभ एक दोसर कें कुनो ने कुनो रूपें सहयोग करियौ।
आधुनिक युग में तs प्रत्यक्ष-परोक्ष सहयोगक आर बेसी आवश्यकता बढ़ि गेल अछि। अहाँ नजरि उठा कs देखि लीय जे दुनियाँ में किछु एहेन अछि जाहि में कियो बिना सहयोगे किछु केने हुये। दुनियाँ में जतेक कुनो काज भेल अछि, ताहि में केकरो ने केकरो सहयोगिता रहबे टा कैल अछि।
आब एक बात गौर करबाक अछि जे सहयोग आ उपकार में भेद की अछि कियैक तs दुनू बात एकरंगाहे लागैत अछि। सहयोग परस्पर होइत अछि। मतलब जे दुनू पक्ष एक दोसर के मदद कड़ैत अछि अथवा सहयोगक किछु दाम निर्धारित कैल जाइत अछि। मुदा उपकार एकतरफा होइत अछि आ दोसर पक्ष अहि के लेल कुनो दाम दै के लेल अथवा सहयोग करक लेल बाध्य नै रहैत अछि।