“गाम-घरक शोभाक प्रतीक – खरिहान”

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आभा झा।                              खरिहान जकरा खलिहान या बाड़ा सेहो कहल जाइत छैक। ओ स्थान जाहि में पशु मवेशी,खेती के औजार और काटल गेल फसल राखल जाइत अछि। खरिहान घरक आस-पास के जमीन के कहल जाइत छैक जतय अन्न-अनाज राखल जाइत अछि। खरिहान के बनावट क्षेत्र पर निर्भर करैत अछि। एकरा पाथर,माटि,घास और लकड़ी सब सँ बनाओल जाइत अछि। गाम घर में जाहि जगह पर खरिहान घास फूस या लकड़ी के बनल रहैत अछि ओतय हमेशा आगिक डर रहैत अछि,कयैकि ओकर अंदर राखल गेल अन्न-अनाज नष्ट भऽ जाइत अछि।आब गाम घर में ओ खरिहान बहुत कम देखय लेल भेटैत अछि। बचपन में ओहि खरिहान या दरबजा पर कतेक तरह-तरह के खेल सब खेलाइत रहि।

अपन देश में खेती के उत्तम काजक संज्ञा देल गेल अछि। भारत एक कृषि प्रधान देश अछि। एतय के अधिकांश जनसंख्या कृषक सभक अछि अथवा मजदूरक। कहलो गेल अछि “उत्तम खेती,मध्यम बान,निकृष्ट चाकरी,भीख निदान।” मिथिला में खरिहानक उपयोगिता अन्न संग्रह के अलावा शुभ-अशुभ काज जेना बर-बरियाती,पाहुन-परक,भोज-भातक लेल होइत अछि। खरिहान में गहुम,उड़ीद,मसुरी,धान,राहड़ी आदि फसल अनाजक रूप में तैयार होइत छल।आब तऽ शहर जेकां गामो में मशीनक उपयोगिता बढ़ि गेल अछि। पेहने अन्न-अनाज के दाऊन होइत छल,सूप सँ अनाजक छिलका के हौंक कऽ भुस्सा निकालल जाइत छल। एखनो जिनकर सबहक बड्ड खेती होइत छनि हुनकर खरिहान में अन्नक ढेर या अंबार लागल रहैत अछि।
आब तऽ गामो में दलाल सब खेत खरीदय लेल पहुँचि रहल अछि। उच्च शिक्षा और आरामदायक जीवनक अपेक्षा में गाम सँ जुड़ल लोक शहर दिस पलायन कऽ चुकल अछि। नतीजन खेती-बाड़ी छूटि रहल आर जमीन सब बंजर भऽ रहल अछि। खरिहान के विलुप्त होइ के कारण कृषि के प्रति लोकक रूचि कम भेनाइ,मजदूरक कमी,आर गाम में लोकक सेहो कमी अछि। आब शहर जेकां लोक गामो में घर बनाबैत छथि। पूरा जमीन के लोहाक ग्रील सँ घेर दैत छथि। जखन जमीने नहिं रहत तखन खरिहान कहाँ सँ रहत।
हम अपन संस्कृति में धरती के माता कहैत छी,खेत के अन्नपूर्णा आर किसान के अन्नदाता। अगला किछ वर्ष में शायद अन्न के खेत सँ खरिहान तक लऽ गेनाई,ओकरा ‘खरही ‘के रूप में सहेज कऽ रखनाइ आर दाना के सफाई-छंटाई के लेल हाथ सँ उड़बै वाला वाला मशीनक इस्तेमाल के जरूरत नहिं रहि जायत,तखन खरिहान शायद गैर-जरूरी भऽ जायत आर ओहि ठाम कोनो पक्का मकान ठाढ़ भऽ जायत। जेना आजुक समय में भऽ रहल अछि। तखन फेर खरिहान पर कविता के लिखत?खेत -खरिहानक महिमा पर गीत के गाओत?
अपन सबहक मिथिलाक गाम में पहिने संयुक्त परिवार छल,ताहि दुवारे अन्न-अनाजक उत्पादन नीक होइत छल आर खरिहानक उपयोगिता बेसी होइत छल। खेती में मेहनत बेसी छैक आर ओहि हिसाबे लाभ सेहो कम अछि। यैह कारण अछि कि खरिहान आब विलुप्त भेल जा रहल अछि।