“रोचक यात्रा वृत्तांत”

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अखिलेश कुमार मिश्रा

यात्रा वृतांत: एक अद्भुत कथा।         

तहन चलु आई अहाँ सभ कें 2002 ईसवी कें एक ट्रेनक यात्रा वृतांत सुनाबी। ओहि समय में हमर विवाह नै भेल छल, हम कुमार ही रही। हमर गाम भोजपंडौल (भोजपरौल) जे दरभंगा सँ करीब 27 किलोमीटर उत्तर अछि। त ट्रेन हम सभ दरभंगे सँ पकड़ै छी। हम ओहि साल कटवारिया सराइ, दिल्ली में अपन डेरा लs कs रहैत रही सिर्फ पढ़ाई के लेल।

बात ई भेल जे हम दुर्गापूजा में गाम गेल रही आ जतरा दिन वापस होइ के रहै। हमर घरक बगल में एक काका जी छैथि हुनको दिल्ली एबाक छलैन्ह कियैक तs दिल्ली में हुनकर भतीजा के नौकरी छलैन्ह आ ओतय जाइ के रहैन्ह। तs हमरा कहलैथि जे तोरा सँग हमहू दिल्ली चलब। हुनकर दिल्ली या गाम सँ बाहर जाई के पहिल अवसर छल। हुनकर नाम तs वकील (गामक लोक उकील कहै छैन्ह) छैन्ह, मुदा पढ़ल लिखल निपट। ओ दू दिन पहिले कहला जे हमहू जैब। हुनको टिकट छैन्ह ट्रेन में सरयू जमुना एक्सप्रेस। हमरा हुनका अपना संगे लs जाइ के इच्छा नै छल, कियैक तs गाम में हुनकर तेहने किरदानी रहैन्ह। कहुना भोरे हम हुनका बिना संग केने दरभंगा आबि ट्रेन में बैसि गेलौं। भगवान के नाम लेलौं जे हुनका सँ हमरा मुक्ति भेटल। ट्रेन खुजहे बाला रहै कि एक बड़का मोटा माथ पर लेने हौ दाऊजी (दाऊजी हमर निक नेम) हौ दाऊजी कड़ैत अनघोल मचेने रहैथि। धोती ठेहुन सँ ऊपर घामे पसीने तर बतर। संयोग एहेन जे हमर सीट खिड़की लग, हमरा देखि सीधे ट्रेन के अंदर आबि गेलाह। मुदा मोटा ततेकटा जे गेटे पर अटकि गेल। कहुना कs दुनू आदमी घसीट कs ओकरा अंदर केलौं। टी टी सँ कहि हुनकर दोसर बोगी के सीट अपना बगल में करेलौं।

खैर ट्रेन चलल। उकील काका कें उत्साह तs कहल नै जाइ। जेखन ट्रेन हायघाटक पुल लग ऎल आ जोर सँ शोर भेल तs एना चिचियेलाह जे लागल हुनकर प्राण निकलि गेल हो। कहुना कs हुनका सम्हारैत आगाँ बढलौं। समस्तीपुर में ट्रेन के इंजन आगाँ सँ पाँछा लागैत अछि तs करीब आधा घण्टा ट्रेन रुकल। ताधरि काका कें भोजन के लेल व्यग्रता जागि गेल। हम हुनका लेल खानाक थारी किनलौ तs देखs लागला जे एके थारी में कोना दालि, तरकारी भात आ रोटी सभ किछु अछि। एक थारी खेलाक बाद हमरा कहै छैथि जे खाना कनि कम छल। हम अपनो बाला थारी कें आग्रह केलौं तs लजाइत सकुचाइत ओकरो उदरस्थ कs लेलाह। ताधरि ट्रेन खुजि गेल। तक्कर बाद डकरैत कहला हौ दाऊजी हम कनि लघुशंका जैब। हम हुनका ट्रेनक शौचालय देखा आबि अप्पन सीट पर बैसि गेलौं। बड़ी काल भेल ओ नै ऐलाह तs चिंता भेल, गेलौं तs ओ अंदर सँ हौ दाऊजी हौ दाऊजी चिचया रहल छलाह। हुनका सँ शौचालय के गेट नै खुजैत छल। जेखन कि ओहि में दरबाजा मात्र बाहर या भीतर सँ अटकाबs बाला सँ ही बन्द छल। हम जेखने ओकरा बाहर सँ घुमेलौ कि भक्क़ दs गेट खुजि गेल। देखै छी जे उकील काका घामे पसीने भीजल छैथि। हुनका आब जान में जान एलैन्ह। हुनका गेट कोना खुजत आ बन्द हैत से सिखा देलियैन्ह। ओ अपन बेड पर आबि निढाल भs सुति रहला। हमहू एक अलग खाना खा सुति रहलौं। गाड़ी जेखन बिहार सँ आगाँ ऎल तs राति भs गेल। रतुका खाना खा लाइट बन्द कs सुति रहलौं कि अचानक राति करीब दू बजे हमर नींद खुजि गेल। देखै छी उकील काका अन्हार में ही हौ दाऊजी हौ दाऊजी चिचिया कs कखनो अहि कंपार्टमेंट तs कखनो दोसर कम्पार्टमेंट में जा रहल छैथि। भेलै ई जे हल्का ठंढ के कारण हम चादर ओढ़ि कs सुतल रही आ ताहि पर बोगी के लाइट बन्द। उकील काका राति में शायद शौचालय गेलाह तs अप्पन बर्थ बिसरि गेलाह। तहन चिचिया चिचिया कs तs बुझु पूरा बोगी के उठा देलैथि।

खैर, कहुना कँ रास्ता कटल, दोसर दिन करीब दू बजे दिल्ली पहुँचलौ। हम टेम्पू कs कs सीधे कटवारिया सराइ पहुंच गेलौं। काका के कहलियैन्ह जे स्नान कs लीय। हुनका बाथ रूम देखा आबि गेलौं। कनिके देरक बाद फेर उकील काका आ थु आ थु चिचियै लगलाह। हम कहलौ गेट खोलू, की भेल। फेर ओ भितरे फंसि गेलाह। हुनका बूते गेटे नै खुजैन्ह। खाली ओ आ थु आ थु कड़ैथि दरवाजा पिटि पीटि क अनघोल केने रहैथि। हुनका बड़ी देर लागलैन्ह कि अचानक गेट खुजल। ओ फेर घामे पसीने। फेर जोर सँ निसास छोड़ैत बाजलाह आरौ बाप रौ बा, हमरा नै बुझल छल जे शहरुआ मौध एहेन होइत छै। हमरा आश्चर्य लागल, हम कहलियैन्ह जे कुन मौध। ओ बाथरूम देखा कs कहला जे ओ। हम देखै छी जे ओ तs डेटोल हैंड वाश अछि। हे भगवान, हम माथा पिटलों। पुछलियैन्ह जे की भेल से कहु। ओ कहला जे जेखन हम लैट्रिन सँ एलौं तs साबुन सँ हाथ पैर धो कs निकलैत रही तs अहि शीशी पर नजरि गेल। हमरा भेल जे बाथरूम में मौध राखल अछि जे लैट्रिन के बाद कहीं कमजोरी नै हो तैं। हम ई सोचि एक्कर मुन्ना खोलि मुँह में लेलौं, हमरा नै बुझल छल जे ई एहेन बिचित्र स्वादक अछि।

हम तs खुद हँसैत हँसैत लोट पोट भs गेलौं। ओ हमर मुँह बकर बकर देखैत रहला। हुनका अपने सँ स्नान आदि करेलौं। बाद में खुद स्नान कs हुनका अपने सँग एक रेस्टुरेंट ल गेलौं भोजन करबाक हेतु। हम पुछलौं काका की ख़ैब? ओ कहलाह जे माछ भेट जेतs की। हम कहलौ नै, पुछलौं मुर्गा ख़ैब? ओ सीधे छिलमिला गेलाह। कहला हमर धर्म भ्रष्ट कड़बs की। तोहर काकी घरो नै घुस देती। तहन पुछलौं जे पनीर के तरकारी ख़ैब? ओ पुछलैथि पनीर की होइत अछि। हम कहलियैन्ह जे पहिले खाउ तहन बुझब। हम एक मटर पनीर आ मशरूम मटर आ नान के ऑर्डर केलौं। हुनकर नाक में जे ओक्कर सभक गन्ध लागै से आर क्षुधा व्याकुल भs गेलैन्ह। उचकि उचकि कs कखनो ई देखैथि आ कखनो ओ। कनि काल में सभ भोजन टेबल पर आबि गेल। हम अपने सँ हुनकर थारी लगा भोजल लेल कहलौ। शुरू में तs कनि धकचुकेलाह मुदा बाद में भोजन पर सीधे आक्रमण। खूब छकि कs खेलाह तहन पूछ लागला जे ई की आ ई की। हम कहलियैन्ह ई मशरूम आ ई पनीर। कहला बड्ड नीक होइत छै मशरूम गुजुर गुजुर। कहला ई आबै छै क़त सँ। हम कहलियैन्ह जे ई गोबरछत्ता के एक रूप अछि। बुझु कि अचानक ही हमरा पर बिगडि गेलाह जे हमरा गोबरछत्ता खुआ देलह। हम हुनका कहुना कs शांत केलौं। फेर स्थिर मन सँ पुछलौं काका आर की ख़ैब? त कहला भात। हम एक प्लेट चावल, दाल फ्राई आ मिक्स वेज ऑर्डर केलौं। कनि देर में सभ किछु खा डकार शुरू। ताबत वेटर एक एक बाउल में गरम पानि आ एक चौथाई नेबो दs गेल। हम कनि उठि काउंटर पर बिल के लेल बात करs गेल रही। एलौं तs हुनकर बाउल खाली। हम पुछलौं जे की भेल गरम पानि। ओ कहला नेबो गारि कs हम पीबि गेलौं। हम मोने मोन हे महादेव कहि हल्का बिहुसि लेलौं। ओ विस्मित भs गेलाह। हम हुनके सामने बाउल में नींबू निचोड़ी कs हाथ धो लेलौं। ओ पुछला जे पिबs बाला पानि सँ हाथ कियै धोलह। हम की उत्तर दितौ।
हुनका बेसिन पर हाथ धुआ, एक जर्दा बाला पान खुआ अप्पनरूम पर आनल। हुनकर भतीजा सेहो आबि गेल। ओकरा टेम्पू ठीक कs देलियै। ओ काका के लs कs विदा भेल। हम हुनका प्रणाम कs विदा केलौं। आशीर्वाद दै बदला कहला जे हम एखन दिल्लीये में रहब, आबैत जाइत रहबह। हम मूर्छित होइत होइत बचलौ। ओतय देवाल धs हुनका जाइत जाइत देखैत रहलौं। रूम आबि सीधे बेड पर। याद आबैत रहल हुनकर करनी, एसगरे हँसी लागै। मुदा हुनकर अंतिम वचन जे आबैत जाइत रहबह याद कs सभ हँसी गायब। नींद कखन ऎल पता नै।
🌹🌹🌹इति🌹🌹🌹

अखिलेश, भोजपंडौल, मधुबनी।