दहेज प्रथा : कारण आ निदान

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शिव कुमार सिंह।                         
दहेज प्रथा
दहेज प्रथा हमरा सब के लेल बहुत पगि समस्या अछि।ई हमरा समाज में विकराल रुप धारण कऽ देने छथि,जेकरा रोकनाय अति आवश्यक अछि।
वर पक्ष द्वारा कन्या पक्ष सँ विवाह सँ पूर्व जे माँग राखल जाई छै,रूपया,गाड़ी और अन्य सामान तेकरा दहेज कहल जाई छै।
पूर्व समय में दहेजक एहन रिवाज नय छल।विवाह भेला के बाद विदाई के समय अपना सामर्थ्य अनुसार कन्या के गहना-गुड़िया और अन्य सामान देल जाई छेलै उपहारस्वरुप।जखन माँ जानकी के विवाह भेलैन तखन राजा जनक जी सेहो विदाई में उपहारस्वरूप गहना गुड़िया और अन्य सामान दऽ विदा केलखिन।
अय में कोनो बुराई नय छल। माँ-बाप बेटी के पालि पोसि नम्हर कऽ जखन दोसरो घर विदा करैत छथिन्ह तऽ हुनको इच्छा रहैत छैन,कुछ दियै।बेटी के पसंद के ध्यान राखैत उपहारस्वरुप जे जुड़ै छैक से दय छै।मुदा आब एना नय होई छै एकर ठीक उल्टा छै।एना रहितै तऽ अय लेल अभियान चलाबऽ के कोनो आवश्यकता नय छल।
आब लोक दहेजक परिभाषा बदलि देलकै।आब जखन लड़का लड़की पसिन भेल तेकर बाद लेन-देन के बात होई छै।लड़की पक्ष सँ डिमांड राखल जाई छै,लड़की वाला ओतेक देबऽ में सक्षम होइ छैथ तऽ ठिक नय तऽ रिश्ता नय जुड़ि पाबै छै।लोक दहेज के मान-मर्यादा सँ जोड़ि कऽ देखऽ लगलै।जे जतेक पाय गिनबै छै ओ अपना आप के ओतेक पगि बुझै छै।
दहेज प्रथा सँ नुकसाने नुकसान छै। विवाह के खर्च और नगद पूरा करय लेल कतेक के जमीन तक बिका जाई छै।कर्जा से तड़ भऽ जाई छै,जय सँ परिवारिक स्थिति खराब भऽ गेल और आर्थिक समस्या के चलते बच्चा सब के निक सँ पढ़ाई-लिखाई नय भऽ पाबै छै,परिवार पिछड़ल रहि जाई छै।जेकरा तीन-चारि टा बेटी छै तऽ ओकर समस्या और बढ़ि जाई छै।जँ दहेज नय माँग हेतै तऽ यथाशक्ति खर्च कऽ विवाह कऽ सकै छै।ईहे कारण सँ भ्रूण हत्या बढिया रहल छै।जन्म सँ पहिले दहेजक चिन्ता सताबऽ लगै छै और भ्रूण हत्या एहेन दुष्कर्म करैत छै।कतेक बेटी के दहेज के खातिर प्रताड़ित केल जाई छै,जाहि सँ ओकर घर नय बसि पाबै छै।कतेक आत्महत्या कऽ लय छै,कतेक के मारि देल जाई छै। एहेन बहुत घटना सब सुनै के मिलैया।
एकर रोकऽ के सबसे मजबूत और प्रभावशाली उपाय छै,दहेज के प्रति लोकक मानसिकता बदलनाय। समाज में इ बात के बुझक चाही जे दहेज बहुत गलत चीज छै,सामाजिक,नैतिक कोनो दृष्टि सँ।जय ठाम रिश्ता जुड़ि रहल अय ओयठाम मोल भावक कोन काज।फेर ई रिश्ता कोन चीज के भेल। कियो अपन लक्ष्मी सन बेटी के पालि पोसि कऽ आहाँ के दऽ रहल अय और आहाँ पाय मांँगि रहल छी।
बस भावना बदलऽ के छैक,जागरूकता के जरुरी छै।स्वाभिमान और खुद्दारी केँ भावना रहक चाही।लड़का के परिवार के निस्वार्थ भाव सँ कोनो माँग नय राखक चाही।युवा वर्ग केँ सबसँ आगू आबऽ पड़तै।मन में बैसा लिय की दहेज नय लय कै छै,रिश्ता दू दिल् और दू परिवार के मेल होइ छै ,फेर रिश्ता में मोल भाव के कोनो सवाले नय छै।जँ आहाँक परिवार दहेज लेबऽ चाहै छै तऽ ओकरा सख्त विरोध करू।बस दृढ़ संकल्प राखू।