“मिथिला क विलक्षण व्यवहार”

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आशा चौधरी।                               
# सौजन
आइ के विषय पर हमर बहिन भाई सब लिखलथि बहुत नीक स आ सौजन के बहुत रास अर्थ सेहो उभरि क आयल, हमरा जनतबे एकर जतेक अर्थ लगाबी सौ+ जन यानि सौहार्द जन मतलब व्यक्ति
त ओहि व्यक्ति के सौहार्दपूर्ण वातावरण मे और बियाहक समय या बियाहक बाद समधि के अगर भात खुआयल जाइत अछि ओकरा कहै छै सौजन.
सौजन मे समधि के थारी सजाकय देल जाइए, थारी के काते काते अनगिनत बाटी कटोरी मे तरकारी तीमन देल जाइत अछि, कम स कम इक्कीस टा तरकारी तीमन रहक चाही जाहि प्रमुख अछि बऽड़ बऽड़ी ओल परोर बटबड़ घी बाटी मे, तरुआ के अलगे सचार, तखन भरि टोलक स्त्रगंण सब कने ओढ मे बैसि कय मिठकर मिकगर गीत गारि सब दै छथिन अपन गीतक माध्यम स, हाँ भात कोना साँठल अछि सेहो देखल जाइत अछि. हाथ में घ्यु लगाकय कसि खय एखदम गोल बनाकय साँठल जाइत अछि, गीतक शुरुआत एना होइत अछि – मेंही भात जतन भनसिया साँठिकय देवैनि हे
और ओहि गीतक माध्यम स सब तरकारी तीमन के नाम लेल जाइत अछि, जेना ओल परोर बटबड़ इत्यादि
तकर बाद हास्य विनोद के गीत होइत अछि जेना
अजगुत लागैयै गे दाई बुढ़बा टुपटुप खैयने जाइ
हैयो ककरा मांलहुं जुता हैयो केये जे देलक छाता
राजा दशरथ के सेहो मिथिला मे गारि भेलैनि आ बड नीक लागैन गारि सुनि सुनि क धीरे धीरे खाइथ.
गोरे दशरथ गोर कौशल्या राम भरत कियै कारी यौ
खीर खाय बालक जन्मौलनि अवधपुरी के नारी यौ
हमरा जनतबे यैह थिक सौजन उपर स पान सुपारी लौंग दक्षिणी सब देल जाइत अछि तकर बाद पाँचोटुक लत्ता कपड़ा विदाई जनेऊ सुपारी रुमाल सब किछु दय क समधि के विदा कैल जाइत अछि.
धन्यवाद🙏