“मिठगर बोली पान मखान : मिथिला के पहचान”

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आभा झा।                                 

मिथिला में पान के महत्व
मीठगर भाषा पान,मखान,यैह अछि मिथिला के पहचान।मिथिला में पान के उपयोग के वर्णन सदियों पुरान अछि।फूल-पान अर्पित करब,पान-प्रसाद वा पान सुपारीक आदान-प्रदान करब मिथिलाक सांस्कृतिक ओ सामाजिक जीवनक एकटा महत्वपूर्ण अंग थिक।देवता-पितरक अराधना होयब,वा भोज-भात होयब वा कोनो सामान्य अतिथि-अभ्यागतक आगमन होयब प्रत्येक अवसर पर पानक उपयोग अनिवार्य रहैत अछि।जहिना देवताक पूजा में ‘गन्ध-पुष्प,धूप-दीप ताम्बूल नान विधि नैवेद्यानि ‘अर्पित करबा में पान आवश्यक रहैत अछि।तहिना अतिथि-अभ्यागतक वा प्रिय-व्यक्तिक आगमन भेला पर सेहो हुनकर स्वागत में पान अर्पित करब आवश्यक शिष्टाचार मानल जाइत अछि।प्रत्येक सांस्कृतिक वा सामाजिक अवसर पर जाहि ठाम दस लोक जमा होइत छैथ हुनका लोकनि के स्वागतार्थ पान-सुपारी जँ नहि अर्पित कयल जाइत तँ ओ लोकनि अपना के अपमानित मानि सकैत छथि।भोजनक प्रबंध नहियो रहैन,केवल पान-सुपारी दऽ देला सँ ओ लोकनि अपना आप के सम्मानित बुझैत छथि।मुड़न-उपनयन विवाहादि अवसर पर चुमाओन करबा काल चुमाओनक डाला पर दहीक छांछ ओ दूवि धानक संग संग पानक पात राखल रहब आवश्यक रहैत अछि।भ्रातृ द्वितीया आर मधुश्रावणी में सेहो पान के पात शुभ मानल गेल अछि।मरणाशौच काल में पान खायब जे वर्जित मानल गेल अछि तकर कारण यैह छै जे ओहि अशुभ अवधि में पान सदृश शुभ वस्तु के उपयोग करब असंगत रहैत अछि।
पान खायब आर खोआयब आनंद-उल्लास वा रसिकताक सेहो द्योतक अछि।आनंदक अवसर पर मित्र लोकनि के पान खयबाक आग्रह करैत छथि,वा लोक सेहो उल्लासक क्षण में अपन शुभेच्छु व्यक्ति के पान अर्पित कऽ रसक काव्य में रसिके नायक ओ नायिका द्वारा पानक उपयोग अनेकों चमत्कारपूर्ण वर्णत प्राप्त होइत अछि।महाकवि विद्यापतिक गीत में जाहि ठाम ई उद्गार भेटैत अछि जे “बानरक मुँह की शोभय पान “ताहि ठाम यैह भाव अछि जे जेना बानर सदृश अछि तहिना अरसिक गमारक हृदय में रसविद्ध नायिकाक प्रति अनुराग पल्लवित-पुष्पित नहिं भ सकैत अछि।
सामान्य उपयोग में साधारणतः त्रिकोणाकार खिल्लीक उपयोग होइत अछि,मुदा देवार्चना में कनैलक फूलक सदश खिल्लीक तथा विवाह काल में बरियातीक हेतु अर्द्धवृताकार खिल्ली प्रदान कैल जाइत अछि ताहि में डंटी नहिं तोड़ल जाइत अछि आर प्रत्येक अवसर पर खिल्लीक लगयबा काल पानक डंटी ओ टड़नी तोड़ि देब आवश्यक मानल जाइत अछि।चांदी या पितर या फूल के बनल डिब्बा खिल्लीक बनायल पान के संग सुपारी,इलायची परसै लेल राखल जाइत अछि जकरा पनबट्टी कहल जाइत अछि।
पान में वाष्पशील तेल के अतिरिक्त अमीनो अम्ल,कार्बोहाइड्रेट आर किछ विटामिन प्रचुर मात्रा में होइत अछि।हितोपदेश के अनुसार पान के औषधीय गुण अछि बलगम हटेनाइ,मुख शुद्धि,अपच,श्वास संबंधी बीमारी के निदान।पानक पात में विटामिन ए प्रचुर मात्रा में होइत अछि।आयुर्वेदिक चिकित्सा में विभिन्न रोग में पानक रस के प्रयोग होइत अछि।
मध्यप्रदेश स्थित विभिन्न राजा बाड़ में मैथिल पंडित लोकनिक प्रवेश छल आ तैं ओहि ठाम सँ साँची क्षेत्रक विन्यस्त पान मिथिला में आयातित भेल होयत सेहो सम्भावित अछि।मिथिला बहुतो दिन मगधक अधीन छल तथा एखनो ई जाहि बिहार राज्यक अधीन अछि तकर राजधानी मगध में पटना नगर में वर्तमान अछि।तैं मगधक संग वाणिज्य-व्यवसाय चलैत रहय आ ओहिठाम खाद्य ओ पेय पदार्थ मिथिला में आयातित होयब स्वाभाविक अछि।वाराणसी में सेहो मिथिला निवासी लोकनिक आवागमन होइत रहल ओहिठामक विन्यस्त पान यदि मिथिला आयातित भेल अछि तँ स्वाभाविक थिक।माछ,पान आर मखान- तीनू मिथिला के संस्कृति में सदियों सं प्रयुक्त होइत अछि आर अपन महत्ता बनेने अछि।
आभा झा
गाजियाबाद