“बरियातीक अर्थपूर्ण वर्णन”

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अखिलेश कुमार मिश्रा।                     

सभ सँ पहिले बुझु जे बरियाती शब्द कें अर्थ। ई मैथिली के दू शब्द जोड़ि कs बनल अछि। पहिल शब्द वर मतलब दूल्हा, आ दोसर शब्द भेल अरयाती, अरयातनाइ मतलब शुरू के यात्रा में किछु दूरी तक सँग चलनाई। कहक मतलब ई भेल जे वर कें अप्पन गृहस्थ जीवन जीबs जे यात्रा आरंभ केलाह ताहि में किछु दूर तक सँग अर्थात विवाह पूर्ण होबs काल तक सँग देब बाला सभ व्यक्ति बरियाती के श्रेणी में आबै छैथि। चूँकि विवाह स्थल कन्या पक्ष ओतय रहैत अछि आ वर अप्पन घर सँ ओहि स्थल पर पहुँचैत छैथि, तैं एकरा अहाँ वर पक्ष सँ विवाहक साक्षी के रूप में कहि सकै छी।मैंथिल कें विवाह आ हुनकर विवाह के इतिहास कें तs बहुत जानकारी नै अछि मुदा दादी सभ सँ सुनल बात आ अप्पन अनुभव के आधार पर हम विवाह आ बरियाती के समय हिसाबे चारि श्रेणी में बाँटि सकै छी।
पहिल तs जे ऋषि काल सँ चलैत ऎल जाहि में विवाहस्थल पर दुनू तरफ सँ तात्कालिक बुद्धिजीवी आ सामान्य लोक सभ रहैत छलैथि। दुनू पक्ष के बीच किछु शास्त्रार्थ सेहो होइत छल तत्पश्चात हवन आदि के बाद विवाह। भोजन आदि सँभ सामान्य ही होइत छल। फेर समय बदलल आ सभागाछी के दौर आबि गेल। अहि समय में सौराठ सभा (आर जगह सेहो सभा लागैत छल मुदा हमरा सौराठ सभा ही बुझल अछि) में नियत करीब दस बारह दिन लेल मैथिल ब्राम्हण सभक सभा आयोजन होइत छल जे प्रायः जेठ-आषाढ़ महीना में होइत छल। मुहूर्त अनुसार अहि बीच में विवाहक दिन ज्यादा रहैत छल। सौराठ सभा के लेल घर सँ वर अप्पन अभिभावक सँग सभा के प्रवास के लेल बिल्कुल ओहिना निकलैत छलाह जे विवाह कs कs ही लौटता। प्रायः सभक विवाह भs जाइत छल। अहि में बाराती के नाम पर मात्र पाँच सात आदमी होइत छलाह सेहो जे सौराठ गाछी अथवा अगल बगल भेंट गेलाह। एम्हर कन्या पक्ष ओतय सेहो थोड़ बहुत तैयारी रहैत छल। विवाह चूँकि अचानक होइत छल तैं बाराती कें भोजन आ अन्य सभ कें बेसी आडम्बर नै रहैत छल। दोसर दिन हुनका सभ कें बिदाई (पाँचों टूक कपड़ा, अथवा मात्र एक जोड़ धोती), जनेऊ सुपारी आदि सभ दs कs विदा कैल जाइत छल। हां भोजन के समय में हुनका सभ कें डहकन (मैथिलानी सभ कें द्वारा गीत में ही गाडि पढ़नाई) सेहो सुनैल जाइत छल।
सौराठ सभा बन्द भेला सँ विवाह घर -कथा सँ होबs लागल। अहि वर पक्ष आ कन्या पक्ष कें विवाह के तैयारी करs के बेसी समय भेट लगलैन्ह। सादगी के जगह पर दिखाबा आबि गेल। बाराती के संख्या में बहुत बढ़ोतरी भs गेल। हुनकर सभक भोजन में विविधता बढ़ि गेल। विभिन्न व्यंजन सँग मांस-माछ सेहो भेटय लागल। बरियाती सभ आब एक टाइम के कहै तीन तीन समय भोजन डटाबs लागलाह। बरियाती के रहनाइ आ खेनाइ अनुसारे दू तरहक बरियाती भेलाह, एक संझु आ दु संझु। एक संझु में बरियाती विवाह सम्पन्न भेलाक बाद कन्या कें सुहाग दs प्रस्थान कs जाइत छैथि। दु संझु में बरियाती सभ विवाहस्थल पर रुकि जाइ छैथि। स्थिति एहेन जे पुछु जूनि। किछु रतुका भोजन पचाब में कतौ लागल छैथि तs कियो ताश आदि में मनोरंजन करैत रहै छलैन्ह। हुनकर सभक व्यवहार अहि तरहक रहैत छल जे बुझु हिनका सभ कें कन्यापक्षक लोक कें परेशान करक परमिट भेंट गेल छैन्ह। तहन तs कन्या पक्ष के किछु अतिउत्साही युवा सभ हुनको सँग बदला लैत अछि, जेना पाँछा सँ कबछुआ लगा देनाइ। हां, बरियाती सभ कें कपड़ा आदि सँ विदाई के लोप सेहो भs गेल।आबक विवाह तs दिखाबा सँ पूर्णतया भरि गेल अछि। घर कथा, नेट सँ जानकारी आदि ढंग सँ विवाह तय होमय लागल अछि। विवाह में दिखाबा के लेल नाच गाना, डीजे, बैंड आदि भs गेल। बरियाती में आब स्त्री सभ सेहो सम्मिलित होमय लागलीह। मिला जुला कs कहब जे मैथिल सभ दिखाबा के चक्कर में बुझु अप्पन संस्कार छोड़ के कगार पर छैथि, जे उछित नै।