“मिथिलाक भगवान”

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किरण झा।                                   

अतिथि तऽ सही में भगवान के रुप में अबैत अछि 🙏🏻

हमर नैहर एक विशाल वट वृक्ष अछी
हम दस भाई बहिन रही ।
हम त बच्चा स देखैत रहि माँ के अतिथि सत्कार करैत पिताजी आर एस एस में रहैत कखनो भोजन बनल में दूचारि टा लोग आबि जाय माँ के कनिको परेशान नै देखितौं बहुत प्रेम सऽ अतिथि के भोजन कराबै।
भाई बहिन सभ के विवाह के बाद तऽ हरदम दूटा पाहुन रहबे टा करैत।
अतः मुम्बई में छी त पाहुन नै के बराबर अछि तैयो जे अबैत अछि हुनकर स्वागत हम प्रेम सऽ करे छि 😊
हमरा तऽ विभिन्न प्रकार भोजन बनेनाइ पंसद अछि आस्कत नै अछि । मिथिला के भोजन ओकर त जवाब नै अछि संचार लगा क जमाय के आगा में देल जाएत अछि
तेनहीं समधी के विषेश अतिथि सत्कार करैत छि।