“निर्धन के बेटीक व्यथा”

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– कुमारी सोनी।                                   

सुरसा सन मुंह साजि बरियाति टक टक ध्यान लगौने छै
निर्धन कन्यागत केर जीवन फांसी पर लटकौने छै
काईन रहल छैथ कन्या कुमारी जिनका बितो नै बास छै सांझ परात ऊपास पड़ै छै चारक घर एक आस छै
तिलक दहेज आकाश छुबै छै बरके बाप मुंह बोने छै
निर्धन कन्यागत केर जीवन फांसी पर लटकौने छै
खेत बिकायल बरकी बेटी मे छोटकी मे माई के जेवर
लाखक लाख टका जे गिनतै तिनक समाज मे छै तेवर
गरीब के संग अन्याय बहुत ई बेटी जन्म जो देने छै
निर्धन कन्यागत केर जीवन फांसी पर लटकौने छै🙏🙏