“गरीबक बेटी- वरदान कि अभिशाप..?”

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– आभा झा                                         

गरीबकबेटी

गरीबी अपने-आप में एकटा अभिशाप अछि। गरीब के भोर सांझ मजदूरी केला के बाद भइरपेट खेनाई मुश्किल स भेटैत छैक। गरीबक बेटी या बच्चा सबके शारीरिक तौर पर निक पालन-पोषण नहि होइत छैक। गरीब लोक अपन बेटी के निक खान-पान,रहन-सहन तथा निक शिक्षा नहि द पबैत अछि। निक शिक्षा प्राप्त केनाई ओकरा लेल एकटा सपना जेकां होइत छैक। गरीबक बेटी घर-घर काज करि क अपन भरण-पोषण करैत अछि। ओकरा सबहक बड बात सुन परैत छैक।
गरीबक बेटी अपन बचपन बिसइर जाइत अछि। ओ कनिक पैघ भ जेकरजाइत अछि तखन ओकर माता-पिता विवाह लेल सोचै लगैत छैथ आर छोट उम्र में बेटी के विवाह क दैत छथिन। जेकर कारण बेटी के दहेज प्रथा जेहेन कुरीति के सामना कर पड़ैत छैक। छोट उम्र में बेटी के विवाह केला स ओकर शारीरिक विकास नहि भेल रहै छैक। निक खान-पान के अभाव में शरीर कुपोषण के शिकार भ जाइत छैक।
विवाह के बाद सेहो गरीबक बेटी के दहेज लेल सासूर में प्रताड़ित कैल जाइत छैक। ओकरा दहेज आनै लेल बेर-बेर ताना मारल जाइत छैक। गरीबक बेटी के पिता अपन जिंदगी भइर के जमा-पूंजी अपन बेटी के विवाह करय में लगा दैत छैक तइयो ओकर बेटी सासुर में खुश नहि रहि पबैत छैक। ओना आजुक युग में गरीबक बेटी होइ या अमीरक दहेजक लेल सब के प्रताड़ित कैल जाइत छैक। गरीबक बेटीक माय-बाप अपन बेटी के दहेजक डिमांड पूरा करै लेल असमर्थ रहैत छैक।
गरीबक बेटी के सेहो इज्जत होइत छैक। ओकरो लाज,शर्म होइत छैक। गरीबक बेटी प्रति इ सोच सबके बदलय पड़तै। सबके आगु आबि क गरीबक बेटी के मदद लेल हाथ बढ़ेबाक चाही। गरीबक कष्टक अनुभव धनवान नहि कय सकैत छथि।
लेकिन आब जमाना धीरे-धीरे बदैल रहल अछि। आब गरीबक बेटी सेहो शिक्षित भ रहल अछि। गाम-घर में सेहो गरीबक बेटी के शिक्षित करै लेल मां-बाप आगू बढ़ि रहल छैथ। बेटी सबके स्कूल जाइत देख बड निक लगैत अछि। गरीबक बेटी सेहो शिक्षित भ क आत्मनिर्भर बनै इ हमर सभक कामना अछि। पेहने गरीबक बेटी घर-घर जा क काज करैत छल। लेकिन आब जेकरा जतबे छैक ओ ओतबे में बेटी के शिक्षित क रहल अछि। गरीबक बेटी के जीय के पूर्ण अधिकार छैक।
कियो चाहत ऐहेन बचपन
ढोइत हुऐ जे कन्हा पर भार,कतउ घर में बरतन धोबै,
पैघ शहर होइ या छोट गाम,हर जगह इ करैत छैथ काज।
खाई के तलाश में इमहर उमहर भटकैत,
खलाई के उम्र में धूप में तपैत छैथ गरीबक बेटी।
गरीबक बेटी भेनाइ,कि कोनो पाप छैक,
फेर करैत अछि कियैक घृणा हमरा स
हमहुं त इंसान छी,हमरो में जान अछि,
सभक अत्याचार सहैत-सहैत दम तोइड़ दैत अछि बेटी।