गुरु

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  1. #लेखनि के धार #विषय
    गुरू
    ओना ते जीवन में जन्म स लय के मृत्यु तक हमेशा लोक सिखैत रहय अछि आर डेग डेग पर गुरू से ज्ञान प्राप्त करैत रहईये ।बच्चा जखनै जन्म लै ये तखनै से ओ सिखय लगैत अछि आर सबसे पहिले माय गुरू होई छथि ।माता नेना के उठनाई बैसनाई से लय के सब तरहक कर्म सिखबैत छथिन ।ओ सबसे पैघ गुरू होई छथि ।जीवन में अनेक तरहक गुरू अबैत छथि आर ज्ञान दैत छथि ।हमरो जन्मदातृ विद्दा दाता कर्म दाता अनेकों गुरू भेला ।जेना गुरू के सब शिष्य में एक दू टा शिष्य बहुत प्रिय रहै छथिन तहिना शिष्यो के जीवन में कोनो कोनो गुरू अति प्रिय रहैत छथिन ।हम जन्मदातृ गुरू के वारे में हम किछ नै लिख सकै छि ।ओ अनमोल छण छल जे हमरा हुनकर छत्र छाया भेटल छल ।हमर सबसे पैघ गुरू हमर सासु मां छलि।हम छोटे में सासुर एलौ मां के छत्र छाया में रहलौ ओ हमरा जीवन के हर संघर्ष में संग देलनि आर हर तरहक लुरि व्यवहार सब सिखौलनि ।घर के जतेक काज होईत अति ओ हम अपन सासु मां से सिखलौ ।ओ हमरा दुलार कके ,बिगैर के ,हाथ पैकरि के जेना नेना के भठ्ठा पकरवैत छै तहिना ओ हमरा कटाई, स्वेटर बूनाई ,क्रूस चलौनाई ,कसिदा केनाई आदि अनेकों तरहक ज्ञान देलनि ।तहिना भानस भात तीमन तरकारी बनवैक ज्ञान तहिना पकवान वनबैक ज्ञान तरह तरह के अचार अदौरी कुम्हरौरी सबटा हम अपन सासु मां से सिखने छि ।हमर जीवन के ओ हमर आदर्श छलि।जीवन में ओ हमरा आगु बढ़वय में ओ हमरा पूर्ण सहयोग देलनि ।हम अपन पूरा पढ़ाई सासुरे में केने छि ।हमरा सासु मां के पूरा सहयोग भेटल अछि। ओ एकटा कर्मठ महिला छलि।जेना परिक्षा दैले अपन बच्चा जाई छलनि ते चम्मच से दहि चीनी खुआ दै छलखिन तहिना हमहु परिक्षा दैले जाई छलौ ते ओ अपने हाथे खुआ दै छलि ।आर बाहर तक जतेक दूर तक देखाई छलनि देखैत रहै छलि ।सासु मां हमर सबसे पैघ गुरू छलि।ओहो हमरा ले अनमोल गुरू छलि ।हम जन्मदतृ मां के जेना जीवन भरी उऋण नै भ सकै छि ।तहिना हम सासुओ मां के जन्म भरि उऋण नै भ सकै छि ।दूनू गुरू माता के कोटि कोटि प्रणाम जे हमरा हुनकर स्नेह भरल दूलार भेटल
    पीताम्वरी देवी