सखी-बहिनपाक अन्तर्विभाजन, मध्यस्थता आ अन्तिम निष्कर्ष पर प्रवीण विचार

File Photo: Logo of Sakhi Bahinapa

“सखी-बहिनपा” सन्दर्भित विवाद पर हमर सुझाव सहितक निष्कर्षः

१. सखी-बहिनपा फेसबुक ग्रुप सँ आगू बढि गेल।
२. आपसी प्रतिस्पर्धा सँ मैथिली-मिथिलाक काज करबाक जिम्मेदारी सखी-बहिन लोकनि अपना-अपना भाग मे बढबैत बहुत जल्द काफी रास परिणाममुखी कार्यक्रम सब करती।
३. मिलन समारोह आ आपसी प्रेम आ सद्भावना बढेबाक पूर्ववत् चलि रहल क्रान्ति सँ आगू आब ठोस कार्य करबाक भार सेहो हिनका सब पर आबि गेलनि।
४. सामाजिक संजाल फेसबुक पर सर्वाधिक सक्रिय समूह मे मैथिलीभाषी महिला लोकनिक समूह “सखी-बहिनपा” आब वाराणसी सँ ‘सोसाइटीज एक्ट मे रजिस्टर्ड’ एकटा समूह केर रूप मे सेहो स्थापित भेल अछि।
हालहि एक गोट घटना दिल्ली मे “मैथिली साहित्य महासभा” मे विभाजन एबाक देखल गेल छल, कानूनी तौर पर ओ दुनू संस्था ‘रजिस्टर्ड’ होयबाक बात सुनने रही। संस्थापन पक्ष आ ओहि मे सँ टूटल किछु अन्य संस्थापक द्वारा गठित दोसर समूह दुनू अलग-अलग पंजीकरण एक्के राज्य ‘दिल्ली’ मे कएने छल। किछु तहिना आब “सखी-बहिनपा” समूह संस्थापन पक्ष केर बनाओल फेसबुक पर अछि, दोसर पक्ष बाकायदा सोसाइटीज एक्ट मे पंजीकृत करायल गेल अछि।
५. भ्रम केर स्थिति दुनू पक्ष मे अछि जे हम २० त हम २० – संस्थापन पक्ष केँ ई दाबी जे हम सर्वाधिक सक्रिय ग्रुप छी, १८ हजार मेम्बर्स अछि, ५ गोटे एडमिन छी, एडमिन लोकनिक पावर प्रयोग करैत ग्रुपक मर्यादा बनाकय राखब आर आब भाषा, संस्कृति, आर्थिक सबलता, मानव सेवा आदिक क्षेत्र मे सेहो धरातलीय कार्य सब करब, मैथिली भाषा छोड़ि आन भाषा मे ग्रुप पर पोस्ट नहि एप्रूव करब, आदि। दोसर पक्ष केर दाबी अछि जे संस्थापन पक्ष केर सीमित परिधि सँ काफी ऊपर वृहत् स्तर पर विधिसम्मत कार्य करब, सदस्य लोकनि केँ भरपूर स्वतंत्रता देबनि आर ग्रुप सेहो पूर्ण पारदर्शिताक संग सभक लेल ओपन रहत। पहिल पक्ष जतय सखी-बहिनहि धरि सिर्फ महिला-महिला बीच झाँपल-तोपल समूह (क्लोज्ड ग्रुप) मे कार्य करत, ओत्तहि दोसर पक्ष सखी-बहिनक संग सखा-बंधु लोकनि केँ सेहो जोड़िकय सब कार्य करत। आर, भ्रम केर स्थिति एहेन अछि जे आपसी द्वंद्वक बीच मे सभक पक्ष केँ सम्मान देनिहार लोक जे पीसा रहल अछि तेकरा अनदेखी करैत अपन दबाव बनाकय आगू बढबाक सोच हावी छैक, जे “सखी-बहिनपा” केर अवसान आ असफलताक जननी बनतैक, ई दुनू पक्ष नहि बुझि रहल छथि। कानून केर समझ किनका कतेक छन्हि से हम नहि जनैत छी, लेकिन दुनू पक्ष एक-दोसर केँ पटकबाक मानसिकता बना लेने देखाइत छथि। आर यैह कारण छैक जे कतेको निरपेक्ष लोक पर दुनू दिशक पक्षकार द्वारा दबाव बनैत गेला सँ “सखी-बहिनपा” केर अवमूल्यन होयब आरम्भ भऽ गेलैक अछि।
६. मतिभ्रम केर कारण कतेको बेर देखल गेल अछि जे अहंता बढि जाइत छैक, गलत समझ विकसित होइते दोसर केँ लोक छोट बुझय लगैत छैक आर एहि अवस्था मे कि सही आ कि गलत तेकर ठीक-ठीक अन्दाज नहि लगैत छैक। “सखी-बहिनपा” जाहि तीव्र गति सँ लोकप्रियता हासिल केलकैक, संभवतः तेकरे कारण छैक एहि तरहक भ्रम उपजनाय, एडमिन केर पावर उपयोग सँ एकर आरम्भ भेलैक से स्पष्ट अछि। तेकर बाद आत्मसमीक्षा करैत अपन गलती केँ सुधार करबाक बदला अपन अलग तरहक “तर्क” सँ गलतिये केँ न्यायोचित करार देल जाय लागल। आर अन्ततोगत्वा अन्तर्विभाजन आबि गेल। अन्तर्विभाजन उपरान्त प्रतिद्वंद्विता बढि गेला सँ गूटबाजी आ गलत आरोप-प्रत्यारोप मे एकटा अत्यन्त पैघ आ क्रान्तिकारी अभियानक सदस्य लोकनि फँसि जाय गेलथि।
७. एहि मामिला केँ प्रकाश मे एहि लेल आनल गेल जे ‘परोक्ष’ रूप सँ ई बहुत लोक लेल ‘तनाव’ केर विषय बनि गेल छल। कतेको बेर एहि सन्दर्भ मे आरती दीदी केँ परेशान देखलियनि, आरो किछु लोक सब सँ गप भेल त ओहो लोकनि काफी तनाव मे बुझेलथि। फुसियाँहीक झगड़ा मे बड बेसी तनाव देखैत हम सोचलहुँ जे एहि सब बात केँ सार्वजनिक मंच पर राखि देलाक बाद अपने आप सब गोटे अपन-अपन पक्ष राखि हल्लूक भऽ जेती। लेकिन, अवस्था ताहि सँ सेहो नियंत्रित होइत नहि बुझायल। किछु लोक त एतेक टेढ बुझेलथि जे बेर-बेर टैग करैत हुनकर जबाबक अपेक्षो कयला उत्तर ओ अपन उपस्थिति तक नहि देलनि। टेढ एहि लेल कहल जे जखन कियो समन्वयकारी भूमिका मे पंच मानय, अथवा अहाँक विचार व पक्ष राखय लेल अनुरोध करय आर अहाँ ओहि भावनाक बिपरीत अपन चरित्र देखायब… मुदा बाद मे मुंहपोछुवा दुलार कय “भाय-भाय” करब…. तऽ बुझि जाउ जे प्रवीण एहेन लोक अहाँ प्रति केहेन भावना राखत। ढकोसला स्नेह सँ कतहु स्नेह झलकल आइ धरि! खैर, हमर ईमानदार प्रयास रहल जे अपने सब बात बुझि जाय आर विभाजनक बदला गठजोड़ पर ध्यान दी। लेकिन से नहि भऽ सकल।
अन्त मे हम एतबे कहब, केकरहु स्वतंत्रता पर कियो गोटे अंकुश नहि लगा सकैत छी। आर नहिये कानूनन कियो अपन जोर-जबरदस्ती चला सकैत छी। एतेक तक हम अपन अनुभव सँ अनुमान लगा सकैत छी जे “अहाँ दुनू संस्था आगामी समय मे किछु उल्लेखनीय कार्य नहि कय सकब जँ एटीच्युड (रवैया) मे परिवर्तन नहि आनब तँ”। अहाँ लोकनिक दावी ए वेरी बिग जीरो सिद्ध होयत, जँ बात नहि बुझब तँ। जाहि तरहें एडमिन पावर केर दुरुपयोग करैत सदस्यक स्वतंत्रता केँ हनन करबाक दोष देखायल अछि, एकर दूरगामी प्रभाव वास्तविक विकास नहि होबय देत। अतः आपसी सामंजस्य केँ वार्ताक माध्यम सँ बढबैत सब कियो अपन शक्ति केँ आर एकजूट बनबैत मैथिली-मिथिला लेल प्रयोग करब, जीत अवश्य होयत। दुनू पक्ष लेल शुभकामना, अपन-अपन त्रुटि अपनहि समीक्षा करैत दूर कय लेब, आग्रह बेर-बेर।
एकर बाद, समस्त सम्बन्धित सँ, जे हमरा फोन करी वा मैसेज पठबी – सब केँ हम कर जोड़ि विनती करैत छी जे कृपया हमरा एहि विषय मे पुनः शामिल नहि करब।

हरिः हरः!!