सार्थक-सकारात्मक-सान्दर्भिक आलोचना – रंगकर्म ओ फिल्मक प्रसिद्ध सर्जक कुणाल केर शब्द मे

विचार

– कुणाल (पटना)

मैथिल संस्था गुण-कीर्तन – एक

हम जखन तखन मैथिल संस्था सभक अदखोइ बदखोइ करइत रहइ छी। से हमर दोसर मोन कहलक जे इ नीक बात नइ।गुण देखक चाही, अवगुण नइ…देखल त एह!बड़ बड़ गुण छइ यउ………

*विद्यापति पर आगू बढ़ि दावा केना करितथि, अपन बड़ाई हल्लुक लोक करइए।इ सब त धीर गंभीर। त बंगाली के तकर श्रेय लेब देलथिन।एखनो बंगाली सब रामकृष्ण मुखर्जी के सरापइए। से उचिते ने।

*लिखिआ करइ छली आंगनक लोक सब। दुलार मे ओकरा चिरचिरी पाड़ब कहइ छला। कोनो आरचर नामक अंगरेज के बड़ नीक लगलइ, फेर किछु बहरिया सब ओकरा प्रसिद्ध कर लागल त लिखिआ सन ठेठ भदेस मौगिआही नाम केना रहितइ, सेहो देश विदेश बला बात रहइ। त सहर्ष नामकरण केलनि, मधुबनी पेंटिंग। छइ ने मॉडर्न आ कैची! ऊपर स माता सीता क अनुकंपा देखू – मधुबनी, मिथिलांचल मे पड़इए।

*अइ स मोन पड़ल जे धन्य सुगौली संधि जे आइ अंतर्राष्ट्रीय हेबाक गौरब स भरल छी। तहिना धन्य मैथिली शुभचिंतक मुख्य मंत्री जे अंगिकांचल, बज्जिकांचल, सीमांचल के फराक क क मैथिली के दछिनाहा, पछिमाहा, सोलकन्हा, ठेठी स मुक्त कराओल। कृतज्ञ संस्था हुनका माथ पर पाग के तिमहला बनाओल से उचिते ने। शुद्ध मैथिली त ओएह ने जे संस्कृत मे बाजल जाए कि हिंदी मे बाजल जाए।

*पुरखा सब दूरदर्शी छला, तखने ने दरभंगा राज काज मे हिंदी रखलइन आ तिरहुता के भगा क देवनागरी स्थापित केलइन। आखिर ओ देवभाषा क लिपि छल। आब मैथिली शुद्ध भ गेल त ओ कर्मकांड क भाषा हैत त पुनः जानकी क माया देखू, भारत सरकार तिरहुता, नइ नइ, मिथिलाक्षर के संरक्षण करत। देखब, जगतजननी मैथिली क कृपा रहल, से रहबे करत, त संस्था सब एकजुट भ रहल अइ, प्रधानमंत्री क माथ पर तेरह टा पागक भवन ठाढ़ करत… तीन तिरहुतिया, तेरह पाग…!!

मैथिल संस्था गुण – कीर्तन – दू

आब जखन गुण देख लागल छी, त छगुनता लगइए… कत तोड़ करब बड़ाई बला बात छइ ।…

*आब विद्यापति पर्व समारोह के बात लिअ । कहांदन, मिथिलाक सांस्कृतिक पुनर्जागरण क उद्देश्य स कतिपय अभियानी साहित्यकार लोकइन, साइकिल के कैरियर पर सतरंजी बान्हि गामे गाम घुमि घुमि बइसार करइ छला… एकर माने त इएह ने भेलइ जे लोक सब बइस लेल सतरंजीओ, पटिओ नइ दइ छलइन….। आब देखू, ओहि दरिदराहा विद्यापति पर्व के इ लोकइन फाइव स्टार लेवल पर पहुँचा देलइन। तइयो किछु बुड़ी प्रचंड कहत जे विद्यापति पर्व स विद्यापतिए बिलाएल छथि!!  कहू त! हिनका सबके जम्बो साइज के फ्लेक्स प्रिंट पर फोटो नइ लखइ छइन ? सब वक्ता पहिने विद्यापति जी के फोटो पर फूल छीटइ छइथ, तखन किउछ भखइ छइथ… आर की चाही ?

*विद्यापति जी लिखबे की केलइन ? कटि, कुच आ कखन हरब दुख मोर ? तिनका इ लोकइन दैवत बना रहल छइथ! प्रतीक्षा करू। संघवद्ध भ प्रयास क रहल छइथ। यथाशीघ्र विद्यापति जी त्रयोदश रुद्र घोषित हेता। आब बला समय मे विद्यापति जी के पदावली फदावली नहियो रहत, हिनकर अर्चना-पूजा होइत रहतइन-यावचंद्र दिवाकरौ…. पांचसौ उनहत्तर बरख पहिने मुइल लोक के आर की चाही ?? इ लोकइन त सुआमी जी स विद्यापति जी आरती सेहो लिखा क रखने छइथ…. विद्यापति देवा/भज विद्यापति देवा/दीन दुखी के संकट, भजिते हइर लेबा …..अग्रसोची एकरे कहल जाइ छइ!!

*इ किछु लोक, हिनका सब के सत्ता क बगलबच्चा कहइए। ओ अपाटक की जान गेल जे सत्ता के वामांगी भेला पर की की ने भेटइ छइ! एकटा त इएह जे तखन सत्ताधरी महात्मा क चरण रज समारोह मंच पर पड़इए। ओ सब विद्यापति जी के विषय मे एक स एक अद्भुद बात सब स लोक सबहक ज्ञानवर्धन करइ छइथ। नइ अओता त मैथिल ओइ ज्ञान स वंचित भ जाएत। निंदा केनिहार कनखरल लोक अइछ। ओ मिथिला मैथिल क शत्रु अइछ….।

*आब त इ लोकइन विद्यापति जी क उद्धार क क जीवित विभूति सभक उदभेदन क रहल छइथ। नैना पसाइर क देखथु, विभूतिए विभूति अइछ आइ मिथिला मे….।

मैथिली संस्था गुण – कीर्तन – तीन

खिधांसी गैंग भाषा-व्यवहार के ल क संस्था सभक अदगोई बदगोई करइए। ओ सब की जान गेल जे एकरा पाछू बड़ गहन गंभीर तथ्य छइ….

*शुद्धता अति आवश्यक। सोंसा लेबा स बेसी आवश्यक। तैं ई अग्रसोची संस्था सब मिथिलांचल पर खुसी खुसी सेटल भ गेल। लाभ देखू, अंगिका, बज्जिका, ठेठी, नगपुरिया, सुरजपुरिया, पचपनिया प्रभृति दछिनाहा, पछिमाहा, सोलकनहा… स भाषा मुक्त भ गेल, अपवित्रो, पवित्र भ गेल। विश्व इतिहास मे भाषा शुद्धिकरण के एहन उदाहरण कत्तहु भेटए त कहब। अरे, मैथिल ओहिना नइ ने महान !!!! ओना, एहि लेल संस्था सब के कोनो घमंड नइ छइ। इ त हिनका लोकनिक नैसर्गिक कर्तव्य भेल….।

*आब देखू। सीता कत प्रकट भेली? मिथिलांचल मे। हिनकर पर्यायवाची की ? मैथिली। मैथिली माने मैथिली भाषा सेहो। सीता भेली देवी, छछात लछमी के अवतार । पुनौरा धाम बाली जय माता दी। देवी-देवता स नेह नइ लगाओल जाइ छइ। हुनका स डेरेबाक होइ छइ आ पूजा-अर्चना क क प्रसन्न क विदा कएल जाइ छइ… पूजतोसि प्रसीद स्वस्थानं गच्छ…. से पूजा मंत्र क भाषा शुद्ध होएब आवश्यक…। आन देवी-देवता क पूजा भाषा छइ संस्कृत। परंतु पुनौराधाम बाली माता दी के अर्चना के भाषा छइ मैथिली। एकरा संस्कृते सन शुद्ध होएब आवश्यक।

*एहि उदात्त भाव क अनुरूप सौ बरख पहिने स्थापित मिथिलाक ग्रामीण रंगमंच क स्थापना करइत महामना पुरखा सब मैथिली के मनोरंजन क भाषा नइ मानलइन। विकास देखू, गीत चलइए भोजपुरी ….. किम अधिकम ? आंदोलन के भाषा अइ हिंदी… प्रसन्नता के बात जे आन्दोलन पाग पहिरि क होइए… इएह छइ मिथिलावाद .. जय मैथिली !!

*एकटा बात कहू! देवी मैथिली के अतिरिक्त देव-देवी के पूजा करइ छी संस्कृत मे। की पूजा पर स उठलाक बादो संस्कृते भखइ छी ? नइ ने।तखन मंच पर मां मैथिलीक अर्चना क क नीचा उतइर महत्मा सब अपन लोक-वेद, बाल-बच्चा स हिंदी संभाषण करइए त इ कोन अपराध भेलइ? खिधांसी गैंग के माथा मे माइंडे नइ छइ त संस्था सब की करओ ……!!

*इ जे मंच आ जीवन बला भाषा-बिभेद परिघटना छइ तकरा पाछाँ एकटा अलौकिक लीला छइ-बिधना के बिधान। बिधना निश्चित केलइन जे समस्त हिंदीभाषी क पुनर्जन्म पंजीकृत मैथिल, खास क संस्था क सदस्य सभक घर मे हो। विशेष देखू कुणाल कृत नाटक-मिथिला मोक्ष। त बच्चा सबके मैथिली बाजल होइते नइ छइ। आब कहू…!!

*एहन दैवी परिस्थिति क मध्य, इ लोकइन पूजा अर्चना जोगरक शुद्ध मैथिली सिखाबक लेल कटिबद्ध छइथ।

क्रमशः….