जनकपुर मे विमर्शः नेपाल मे मैथिली लेखनक अवस्था पर चर्चा ४ मार्च केँ

नेपालदेश मे मैथिली लेखनक अवस्था
 
एकल भाषा नीति आ खसकुरा यानि नेपाली भाषा केँ राज्य द्वारा अनिवार्य पालन करैत राजकाजक भाषा बनेबाक कारण शिक्षा-दीक्षा सँ लैत सरकारी कामकाज, अदालत, आदिक भाषा बनाकय आन समस्त भाषा पर नेपाल मे दमन हेबाक कठोर इतिहास भेटैत अछि। लेकिन मैथिली भाषा प्राचीन आ समृद्ध भाषा होयबाक संग-संग नेपालक विभिन्न क्षेत्र मे पूर्वक समय राजभाषाक रूप मे सेहो स्थापित रहबाक गरिमामयी इतिहासक कारण एकटा अलग आ सम्मानजनक स्थान रखैत य। जतय मल्लकालीन शासन मे ई राजकाजक भाषा हेबाक बात विद्वान् लोकनि लिखैत छथि, ततय विद्यापति जेहेन महान स्रष्टाक हस्तलेख एवं कीर्तिलता जेहेन चर्चित पुस्तकक मूल पान्डुलिपि नेपालक अभिलेखागार सँ प्राप्त होइत अछि। आर एहि तरहें भारतक विद्वान लोकनि मैथिली भाषाक स्थिति पर गम्भीर अध्ययन, शोध आदि कय केँ आइ भारतक संविधानक आठम अनुसूची मे कुल २२ गोट सूचीकृत राष्ट्रीय भाषा मे १ महत्वपूर्ण भाषाक रूप मे सम्मानित ढंग सँ स्थापित अछि। ई बात इतर भेलैक जे मैथिलीभाषाभाषी जनमानस अपन राजनीतिक अधिकार लेल ओतेक जागरुक नहि अछि तेँ अवस्था एहेन होइत छैक एकरा सँ बहुत पाछाँ विकसित नेपाली भाषा केँ भारतक संविधान मे १२ वर्ष पहिने संविधानक आठम अनुसूची मे स्थान भेटि जाइत छैक आर मैथिली भाषा केँ बाहरी कम मुदा अपनहि घरक लोक केर अनावश्यक राजनीतिक आ कुतर्कपूर्ण विरोधक कारण राजनैतिक तौर पर सम्मान भेटय मे देरी लागि जाइत छैक। नेपाल मे सेहो संघीयताक स्थापना भेलाक बाद मोटेमोट ‘सब मातृभाषा केँ राष्ट्रीय भाषा’ कहिकय कथित विश्वक सर्वथा उत्कृष्ट नेपाली संविधान सम्मान तऽ दय दैत छैक, धरि पुनः एक गोट नेपाली भाषा केँ अनिवार्य रूप सँ पहिनहि सरकारी कामकाजक भाषा घोषित कय अन्य भाषा लेल प्रदेशक प्रतिनिधि सभा केँ अधिकार दय मामिला केँ लम्बित कय दैत छैक, आर एतहु वैह गलती सब दोहरायल जाइत छैक जे मैथिली सिर्फ उच्च जातीय समुदायक भाषा थिक, एकर विभिन्न बोली मे ठेंठी, बज्जिका, अंगिका आदि स्वतन्त्र भाषा थिक, कियो मगही भाषाक स्थापित नियम आ कायदा सब केँ ताख पर राखि मैथिली केर मजबूत संख्या केँ तोड़य लेल एकरहि बोली बजनिहार एकटा पैघ संख्या केँ ‘मगहीभाषी’ कहिकय एकरा कमजोर करय लेल आवाज उठबैत अछि। कुल मिलाकय मैथिलीक अवस्था मे संघीयताक स्थापना उपरान्तो कोनो उल्लेख्य उपलब्धिक बदला आपसी खींचतान मे नुकसानहि बेसी देखाइत अछि। आर, एहि पर विमर्श आरम्भ कयला पर पुनः आपस मे मतभेद-मनभेदक अवस्था बेसी देखाइत अछि। भारोपेली, चीन-तिब्बती, आग्नेसियाली आ द्रबिड़ – कुल चारि भाषा परिवारक लगभग १२३ गोट भाषा मातृभाषाक रूप मे हाल धरि सूचीकृत छैक, जखन कि भाषाविद् आ विभिन्न जातीय समूह केर अलग-अलग मत सँ ई संख्या आगामी समय मे आरो बढबाक आशंका कयल जा रहल छैक। हर तरहें एतय नेपाली भाषा छोड़ि आन भाषाक स्थिति मे तुरन्त कोनो सुधार हेतैक, एकर उम्मीद लगेनाय अनिश्चित देखाइत अछि।
 
मैथिलीक समग्र स्थिति सँ इतर एकर लेखनक अवस्था सेहो कोनो बेस विकसित नहि देखाइछ। हालांकि नेपालीक बाद दोसर सर्वाधिक प्रचलित भाषाक रूप मे मैथिली मानल जाइछ। मैथिलीक लेखन इतिहास सेहो नेपाली सँ बेस प्राचीन आ समृद्ध हेबाक कारण मातृभाषा अनुरागी द्वारा एकरा बचाकय रखबाक प्रयास होइत रहल अछि। मैथिली मे कोनो देखार काज लिखित आ प्रकाशित रूप मे देश-काल-परिस्थितिक कारण तेहेन उल्लेख्य भले नहि देखाइत हो, लेकिन यदा-कदा चर्चा आ विमर्श मे ई सब बात सोझाँ अबैत अछि जे मैथिली भाषा-साहित्यक लेखन अवस्था छिटफुट सही लेकिन निरन्तरता मे रहि आयल अछि। एकल भाषा नीति प्रबल रहितो महाकवि विद्यापति केर स्मृति दिवस सँ मैथिली भाषाभाषी अपन भाषा-साहित्य पर निरन्तर चिन्तन करैत रहबाक इतिहास नेपाल मे सेहो भेटैत अछि। संचारक्षेत्र मे मैथिली मे समाचारपत्र-पत्रिका सेहो काठमान्डू, राजविराज, जनकपुर, विराटनगर, लहान आदि सँ प्रकाशित होयबाक कय गोट उदाहरण भेटैत अछि; तखन निरन्तर प्रकाशन, पाठक लेल लोकप्रिय आ ताकि-ताकिकय पढयवला संचार-सामग्रीक अभाव हेबाक बात विज्ञजन कहैत छथि। बाजार-वितरणक अवस्था सेहो विपन्न आ नगण्य भेटैत अछि। लेकिन जनकपुर आ राजविराज एहि मामिला मे आर सँ बेस श्रेष्ठतर आ उच्चकोटिक योगदान दैत अछि। काठमान्डू सँ ‘अप्पन मिथिला’ केर प्रकाशन सेहो महत्वपूर्ण होयत रहल अछि। आउ, एहि सम्बन्ध मे ४ तारीख (मार्च) जनकपुर कला साहित्य आ नाट्य महोत्सव मे एकटा महत्वपूर्ण विमर्श मे भाग ली।
 
विमर्शकार लोकनि मे अनुभवी व्यक्तित्व सब छथि – १. डा. रामभरोस कापड़ि ‘भ्रमर’, २. रोशन जनकपुरी, ३. डा. सुरेन्द्र कुमार लाभ, ४. महेन्द्र मिश्र, ५. करुणा झा। पाँचो गोटे गणमान्य व्यक्तित्व अपन सृजनकर्म सँ मातृभाषा मैथिली केँ नेपाल मे नव ऊँचाई धरि पहुँचाबैत आबि रहला अछि। नेपालहि कि भारतहु मे हिनका लोकनिक व्यक्तित्व आ योग्यता केर लाभ मैथिली भाषा-साहित्यक विभिन्न विधा पर राखल जा रहल विमर्श मे कतेको बेर मैथिलीभाषी लाभ उठौलनि, हमहुँ एक लाभार्थी आ मुमुक्षु बनि एहि गुरुवर्ग श्रेष्ठ व्यक्तित्व लोकनि सँ बहुत किछु बुझबाक-गुनबाक अवसर पेने छी। एहि गरिमामयी सत्रक संचालनक भार देबाक लेल आयोजक मैथिली विकास कोष केँ पुनः आभार जे हम सब आइ फरिछाकय सब स्थिति-परिस्थिति पर चर्चा करब।
१. मैथिली भाषा केर लिखित इतिहास
२. मैथिली भाषा मे पाठ्य-पुस्तक केर लेखन आ व्यवहार
३. बहुभाषिक शिक्षा मे मैथिली भाषा आ माध्यम केर अवस्था
४. सरकारी आ गैर-सरकारी विज्ञापन मे मैथिली
५. राष्ट्रीय संचार – यथा गोरखापत्र व अन्य समाचारपत्र मे मैथिली
६. स्थानीय संचार मे मैथिली
७. उच्च शिक्षा मे मैथिली
८. साहित्यक विभिन्न विधा मे मैथिली – उपन्यास, कथा, कविता, नाटक, आदि
९. सरकारी कामकाज मे मैथिली

एहि सब विन्दुक अलावे विभिन्न विन्दु पर विमर्श करैत एहि सत्र केँ उपयोगी बनेबाक प्रयास रहत।

 
हरिः हरः!!