नेपाल-भारत मित्रता केँ प्रगाढ बनायत मैथिल नेतृत्वकर्ताक आपसी मेल-मिलाप

पैछला वर्ष शाहनवाज हुसैनजी, एहि वर्ष के!!
 
गत वर्ष आजुक दिन विराटनगर भ्रमण मे आयल छलाह भारतीय जनता पार्टीक राष्ट्रीय प्रवक्ता – शाहनवाज हुसैन Shahnawaz Hussain – शाहनवाज हुसैन। हुनक आगमन सँ दुइ राष्ट्रक बीच मित्रता केँ प्रगाढ करबाक विभिन्न आधारविन्दु पर चर्चा कयल गेल। भारत सरकार केर सत्ता संचालक दल केर एकटा पैघ नेताक आगमन सँ एहि महानगर केर उद्योगी-व्यवसायी, नागरिक संगठन, सामाजिक संगठन आदि केँ अपन मांग पत्र हुनका सोझाँ रखबाक मौका भेटल। मैथिलीभाषी लेल ई अवसर आरो बेसी महत्वपूर्ण छल। कारण स्वयं शाहनवाजजी एकटा मैथिलीभाषी रहबाक कारण भाषिक सामीप्यता सँ उत्साह बढब स्वाभाविके छल। ताहि पर सँ जखन भरल सभा मे शाहनवाजजी नेपाली भाषाभाषी जनसमुदाय सँ मुखातिब होइत अपन कुशाग्रताक परिचय दैत सब केँ हँसबैत ई बाजि देथि जे अहाँ सब जे नेपाली भाषा मे आपस मे हमरा बारे मे बात कय रहल छी से सब बात हम बुझि रहल छी, कारण हमर भाषा आ अहाँक भाषा यानि मैथिली आ नेपाली बेसी फराक नहि अछि। एहि पर समूचा सभागार मे ठहक्का त लगबे कयल, ओतय उपस्थित मैथिल जनसमुदाय केँ अपन भाषाक मान बढबैत देखि छाती आरो चौड़ा भऽ गेल।
 
माननीय शाहनवाजजी तदोपरान्त किछु समय मैथिली मे बजलनि आ ई सिद्ध कयलनि जे मैथिली-नेपाली कतेक समीप आ कतेक गहींर सम्बन्ध रखैत अछि। विदिते अछि जे जखन कोनो पैघ नेता औपचारिक वा अनौपचारिक भ्रमण पर मित्रराष्ट्रक यात्रा पर जाइत छथि त हुनक पहिल आ आखिरी इच्छा दुइ राष्ट्रक बीच सम्बन्ध आरो प्रगाढ आ सुमधुर बनेबाक रहैत छन्हि। ताहि पर सँ रेलवे मंत्रालय, नागरिक उड्डयन मंत्रालय सहित भारत समान विशाल गणतांत्रिक राष्ट्र केर सत्ता संचालकक अनुभव प्राप्त एक सुविख्यात व्यक्तित्व जखन सोझाँ रहथि तऽ लोकक अपेक्षा आ आशा मे बढोत्तरी स्वाभाविके छैक। एहि अवसरक लाभ आर सब कियो उठेलनि, अपन-अपन मांगपत्र आ अपेक्षाक सूची सम्माननीय नेता केँ थम्हौलनि। ताहि बीच मैथिलीभाषीक रूप मे हमरो लोकनि हुनका पाग, माला आ दोपटा सँ नागरिक अभिनन्दन सभा मे सम्मानित कय सकलहुँ, ई एकटा ऐतिहासिक आ महत्वपूर्ण अवसर बनल छल।
 
अपेक्षित छथि एक पैघ नेता, औता मिथिला भ्रमण पर
 
चूँकि एक महत्वपूर्ण ओहदा पर विराजमान् नेतृत्वक भ्रमण सँ जनसरोकारक मुद्दा पर चर्चा करबाक अवसर भेटैत अछि, परिणामस्वरूप विकास आ मित्रताक सम्बन्ध आगू बढेबाक लेल विभिन्न परियोजना निर्माण करबाक मौका सेहो सक्षम नेतृत्व एहि तरहें निकालैत छथि। एहि वर्ष पुनः हमरा लोकनि एकटा एहने ओहदेदार मैथिल व्यक्तित्व केँ नेपालक मिथिलाक्षेत्र भ्रमण लेल आमंत्रित कयलहुँ अछि। हुनक यात्रा पुष्टि होइत देरी सविस्तार जानकारी करायब। चूँकि मैथिल नेतृत्वकर्ता भारत आ नेपाल दुनू राष्ट्रक सदन मे जनप्रतिनिधिक हैसियत सँ कार्य कय रहला अछि, तखन मिथिलाक प्राचीनता आ एतुका पहिचानक आधार प्रति किनकर कहिया केहेन योगदान रहलनि ताहि बातक अध्ययन होयब, शोध करब, ई काज बाकिये अछि तेना बुझा रहल य। लेकिन आब नव संघीयता प्राप्त नेपाल राष्ट्र मे अनुभवी संघीय गणराज्य भारतक नेतृत्वकर्ताक भ्रमण आ अध्ययन सँ दुइ राष्ट्रक बीच मित्रता केँ आरो सुदृढ बनेबाक काज होयत ई सुनिश्चित अछि। बहुत बातक समुचित जानकारी भारत दिश नेपाल आ एतुका राजनीति केर बारे मे अत्यल्प देखैत छी, ताहि कारण हम सब मैथिली भाषा-संस्कृति-समाज लेल कार्य कयनिहार कार्यकर्ताक नजरि एहि तरहक भ्रमण आ अध्ययन केँ बढेबाक दिश बेसी अछि। गोटेक सामाजिक कूरीति यथा दहेज, बाल-विवाह, कन्या भ्रुण हत्या, बेरोजगारी, कुपोषण, पिछड़ापण, वर्गीय विभेद आदि दुनू कात एक समाने छैक, ताहि सँ आपस मे एक-दोसरा संग वार्ता आ विमर्श दूरगामी लाभ देतैक जे एक प्राचीन सभ्यताक संरक्षण संग-संग दुनू देशक बीच केर मित्रता केँ आरो मजबूती प्रदान करत। अपेक्षा करी जे मिथिलाक एक एहने उच्च कद्दाबर नेताक भ्रमण अहु साल जनकपुर, लहान, राजविराज, विराटनगर धरि होयत आर हमरा लोकनि जगह-जगह हुनकर सम्मान करबाक संग-संग आपसी सम्बन्ध केँ आरो प्रगाढ करय लेल दुइ देशक बीच केहेन सहयोग-सहकार्य बढय ताहि पर सुझाव-सलाह दी।
 
नेपाल-भारत बीच मित्रताक एकटा मजबूत आधारशिला मैथिली भाषा आ मिथिला संस्कृति थिकैक, कियैक तँ ई दुनू कात एकसमान छैक। इतिहास एहि बातक गबाह छैक जे मिथिलाक प्राचीन राजधानी मे दू गोट प्रमुख स्थान – जनकपुर आ सिमरौनगढ आइ नेपाल मे छैक। ओत्तहि सीताजीक प्राकट्यस्थली पुनौराधाम (सीतामढी) सँ लैत हुनकर पूजित आराध्या गौरी (गिरिजा नाम्ना पार्वतीजी) केर स्थान यानि गिरिजास्थान, फूल लोढबाक स्थली फूलहर, अहिल्या उद्धार भेल पवित्र स्थान अहिल्यास्थान सहित जनकपुर परिक्रमाक एकाधिक ऐतिहासिक परिक्रमा विन्दु-मार्ग भारत-बिहार केर मिथिलान्तर्गत पड़ैत छैक। नेपाल-भारत बीच रोटी-बेटीक सम्बन्ध सेहो मूल रूप सँ मिथिलाक राजकुमारी जानकीक विवाह भारतक अयोध्याक राजकुमार रामचन्द्र संग आ वर्तमान समय धरि मिथिलावासी जनसमुदायक बीच वैवाहिक सम्बन्ध सँ आइ धरि एतहि कायम छैक। रोजी-रोजगार लेल सेहो एहि मिथिलाक लोक अदौकाल सँ मोरंग केर औद्योगिक नगरी विराटनगर मे स्थापित देशक पहिल उद्योग विराटनगर जुट मिल सँ लैत विद्यालयक शिक्षक अथवा अन्य पूर्वाधार निर्माण मे इंजीनियर सँ लैत मजदूर धरि यैह मिथिलाक लोक एहि पार आ ओहि पारक श्रमदान कय केँ आगू बढेलकैक। एतेक तक कि खेती-पातीक कला मे निपुण एहि मिथिलाक कामत समुदाय एतहु अपन अगाध श्रम सँ कृषि आ पशुपालन मे स्थानीय जमीन्दार सभ केँ संग दैत आर्थिक अवस्था केँ सुदृढ केलकैक। भाषा, संस्कृति, कर्मकाण्ड, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, उद्योग, हरेक क्षेत्र मे मैथिल जनसमुदायक योगदान केर इतिहास विद्यमान् नगर, शहर, गाम आ टोल-टोल मे भेटैत अछि।
 
किछु महत्वपूर्ण विन्दु पर सहकार्यक आवश्यकता केँ हम सब बेर-बेर चिह्नित करैत आबि रहल छीः
 
१. मिथिला पर्यटन विकास
२. मिथिला कृषि विकास
३. मिथिला उद्योग विकास
४. मिथिला फिल्म विकास
५. मिथिला अक्षय कोष
 
दुइ देशक बीच प्रबुद्ध व्यक्ति समूह सेहो काज कय रहल अछि, लेकिन ई जैड़ केर बात सब हुनका लोकनिक एजेन्डा मे कहियो नहि देखायल। हँ, भारतक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपन हालक जनकपुर यात्रा मे एहि सब विन्दु पर आपसी सहकार्यक दृष्टिकोण जरूर रखलनि। मैथिली फिल्म केर बात त ओ खुलिकय बढावा देबाक आह्वान कयलनि। रामायण सर्किट, बुद्धा सर्किट आदिक बात सर्वविदिते अछि। लेकिन, हम-अहाँ अपन सीमा केँ बुझैत अपन क्षेत्रक सरोकार पर कार्य करय लेल जा धरि जनप्रतिनिधि लोकनि केँ दृष्टि नहि देबनि ता धरि कोनो योजना विकास केना होयत? समान भाषा, समान संस्कृति, समान लोकचर्या – समान लक्ष्य आ समान विकास लेल सहकार्यक संस्कृति बढय – यैह लक्ष्य अछि। विशेष क्रमशः….!
 
हरिः हरः!!