मैथिली संचार केर सर्वोत्तम आ सर्वसुलभ माध्यम बनल अछि सामाजिक संजाल

मैथिली-मिथिला लेल फेसबुक अछि सहज क्रान्तिकारी संचार माध्यम
फेसबुक लाइव इफेक्ट आ मैथिली
 
फेसबुक लाइव मैथिली लेल नव वरदान सिद्ध भऽ रहल अछि। आब टाइप कय केँ लंबा-लंबा लेख लिखबाक बदला अपन सम्पूर्ण विचार वीडियोक रूप मे हमरा लोकनि राखि रहल छी। कतेको छुपल कलाकार अपन भिन्न-भिन्न कला केँ एहि वीडियोक मार्फत सामाजिक संजाल पर अपना संग जुड़ल मित्र, फोलोवर्स आ आम दर्शक लेल राखि पबैत छथि। आइ भोरे-भोर विद्यापतिक दुइ रचना – पहिल हे भोलानाथ कखन हरब दुःख मोर – श्री विजयदेव झा केर आवाज मे सुनबाक लेल भेटल, आ दोसर हे हर हमर करहु प्रतिपाला सब विध बाझलहुँ मायाजाला ई गीत श्री निखिल आशा केर स्वर मे सुनय लेल भेटल। भिन्न-भिन्न ग्रुप पर अलग-अलग विधा मे फेसबुक लाइव मार्फत अपन भीतर रहल कला व अन्य सृजनशीलता केँ प्रदर्शन करब मैथिली-मिथिला लेल संचारक्षेत्र मे रेडियो, टिवी, एफएम, प्रिन्ट मीडिया आदिक कमी केँ भरपूर पूरा करैत बुझा रहल अछि। कहि सकैत छी जे कड़की मे यैह संचार माध्यम हमरा सभक अवलम्बन सिद्ध भऽ रहल अछि।
 
आब करीब १० वर्ष सँ फेसबुक पर एक्टिव छी। मित्रक सीमा ५००० कहिया न पूरा भऽ गेल, लेकिन घटैत-बढैत नव-नव मित्रता एखनहुँ होयबाक क्रम जारिये अछि। फेसबुक फीचर्स मे फोलोवर्स केर संख्या सेहो बहुत महत्वपूर्ण होइत छैक। जखन मित्रक संख्याक निर्धारित सीमा पुरि गेल तखन मित्रताक बदला फोलोविंग – अहाँक लिखल (पोस्ट कयल) रचना-विचार वा फेसबुक पर अपलोड कयल फोटो-वीडियो वा फीलिंग्स, चेक-इन, एक्टीविटीज, फेसबुक लाइव आदिक नोटिफिकेशन मित्रक संग-संग समस्त फोलोवर्स केँ सेहो देखाइत छन्हि। जे उचित ढंग सँ फेसबुक चलेनाय बुझैत छथि, तिनका वास्ते टेलिविजन वा अन्य मीडिया केर महत्व आब लगभग नगण्य भऽ गेलैक कहि सकैत छी। सब तरहक स्वाद न्युज फीडबैक मे पढल जा सकैत अछि। ई फेसबुक एकटा असाधारण क्रान्ति थिकैक से मानय मे हमरे टा नहि अधिकतम लोक केँ कोनो हर्ज नहि छन्हि।
 
हम मैथिलीभाषी फेसबुक केर आभारी बेसी एहि लेल छी जे आइ हमरा सभक मिथिला युगों-युगों सँ अपन अस्तित्व केँ बचेबाक संघर्ष करैत आब २१म शताब्दी मे अपन पहिचान केँ जोगेबाक कोनो आसरा नहि देखि बहुत विकल रही। लेकिन एहेन कूबेर मे ई सामाजिक संजाल आ इलेक्ट्रानिक मीडियाक सर्वसुलभ ओर्कुट, फेसबुक, ब्लौग, गुगल प्लस, ट्विटर, वाइवर, व्हाट्सअप इत्यादि अनेकों माध्यम जे भेटल ताहि सँ वैचारिक संप्रेषण नीक जेकाँ भऽ रहल अछि। जतेक तिव्रता सँ विचारक आदान-प्रदान आजुक दुरुह परिस्थिति जे रोजी-रोटी लेल भागल-भागल कतहु आश्रित रहिकय प्रवास-अप्रवास मे रहि रहलहुँ अछि तेहेन घड़ी मे पर्यन्त भऽ रहल अछि, ई एकटा असाधारण क्रान्ति थिक हमरा सभ लेल। वर्ग विभेद, जातीय विभेद, धार्मिक विभेद – एहि सभक कोनो सीमा नहि अछि एहि आभासी संसार मे। लेकिन स्पष्टतः वर्गीय दूरी एतहु कम नहि भऽ सकल अछि, कारण डिफाल्ट मे समस्या रहला पर कोनो सोफ्टवेयर भला कि कय सकतैक। संस्कार मे जा धरि सुधार नहि करब, शिक्षा मे बढोत्तरी नहि करब, अपना अन्दर सँ हीनताबोध आ हीनभावनाक समस्या दूर नहि करब तऽ एहि सामाजिक संजालहु मे बाभन-सोलकन वला प्रथा ओहिना चलैत रहत। जखन कि फेसबुक या व्हाट्सअप एहि तरहक जातीय वा धार्मिक सीमा नहि बनेने अछि, लेकिन ई हमरा-अहाँक अपन भीतर जे कुन्ठा या अहं केर रूप मे बोध बैसि गेल अछि, तेकर प्रभाव एहि आभासी संसार मे सेहो स्पष्ट देखाइत अछि। मिथिलाक लोकमानस मे समरसता आबय, एहि दिशा मे सामाजिक संजाल पर सघन अभियान चलय, कल्याण अवश्य होयत। शिक्षाक प्रसार होइत गेला सँ लोक मे आपसी सौहार्द्र बढि रहल अछि, ज्ञानक अभाव मे लोक अपन पूर्वाग्रही सोच सँ ऊपर नहि उठि पबैत अछि। समस्त भाषाभाषी लेल हमर विशेष शुभकामना, अपन स्थिति मे सुधार आनी हमरा लोकनि। जय मिथिला – जय जानकी!!
 
हरिः हरः!!