मैथिली मचान कि थिक आ एकर लक्ष्य कतय अछि, साक्षात्कार डा. सविता झा खान संग

काठमांडू मे मैथिली मचान भव्यता सँ सम्पन्न

साक्षात्कार

मैथिली मचान केर संचालिका डा. सविता झा खान संग संपादक प्रवीण नारायण चौधरीक वार्ता – सन्दर्भ काठमांडू 

मैथिली जिन्दाबाद केर संपादक प्रवीण नारायण चौधरी द्वारा मैथिली मचान केर संचालिका डा. सविता झा खान संग हालहि संपन्न काठमांडू (नेपाल) केर २२म अन्तर्राष्ट्रीय पुस्तक मेलाक सन्दर्भ तथा समग्रता मे किछु महत्वपूर्ण सवाल-जबाब कयलनि अछि। प्रस्तुत अछि हिनका लोकनिक बीच भेल साक्षात्कारक संपादित अंशः जनतब भेटय जे लिखित प्रश्नक जबाब डा. सविता झा खान द्वारा अपन फेसबुक लाइव मार्फत कराओल गेल अछि, धन्यवाद आजुक तकनीकी युग जे विराटनगर आ दिल्लीक बीच वार्ता क्षण मे पूरा कय देलक।

प्रवीणः समय अनुकूल अछि जे मैथिली मचान आ अहाँक प्रयास सँ जुड़ल किछु बात साक्षात्कार रूप मे प्रकाशित करी। कृपया निम्न प्रश्न पर अपन विचार प्रेषित कय आभारी बनाउ। नेपालक राजधानी काठमांडू केहेन लागल?

डा. सविता झा खानः बहुत नीक लागल काठमांडू, एकर प्राचीनता, बाबा पशुपतिनाथ मन्दिर, कलाकृति सँ परिपूर्ण काष्ठ मंडप ओ आर्किटेक्चर सब किछु नीक लागल। एहि ठामक तापमान सेहो एहेन भयावह गर्मी मे आराम पहुँचाबय वला छल। सब किछु अनुकूल – लोक सभक सहयोगपूर्ण रवैया – हुनका लोकनिक स्नेह, खूब नीक लागल काठमांडू मे।

प्रवीणः मैथिली मचान आ सिनेहबंध – सोचल आ देखल पर विचार देल जाउ।

डा. सविता झा खानः मैथिली मचान एकटा उपक्रम थिक। एकर बहुत व्यापक परिकल्पना अछि। भूमिका सेहो काफी गंभीर आ मैथिली सनक प्राचीन ओ समृद्ध भाषा-साहित्य लेल ओतबे आवश्यक सेहो अछि। मचान सँ तात्पर्य जे किताब कीनबाक-देखबाक बहन्ने सब कियो आबि सकैत छथि, अपन बात राखि सकैत, सभक लेल एक मंच हो जतय भाषा-साहित्य-समाज-संस्कृति सब पक्ष पर विमर्श हो। मैथिली जेहेन समृद्ध साहित्यक छाहैर मे ई मचान सब सान्दर्भिक विषय पर अपन लोकवेद संग बैसिकय चर्चा करय। आ, सिनेहबंध भेल भारत-नेपाल बीच अदौकालक मित्रता, कि एहि पार आ कि ओहि पार, मैथिली अछि दुनू पार आ यैह मित्रताक अकाट्य सेतु थिक। सदियों-सदियों सँ हमरा लोकनि एक जेकाँ छी। एहि प्राचीनता केँ आत्मसात कय मैथिली मचान संग नेपालक राजधानी काठमांडू ‘सिनेहबंध’ केर सनेश संग गेल रही। सभक सहयोग आ सक्रियता सेहो एहि सनातन आ अकाट्य मित्रता केँ निर्वाह करैत देखौलक।

प्रवीणः नेपाल मे मचान पर ब्राह्मणवाद केँ बढावा देबाक आरोप किछु गोटा लगा रहल अछि, कियैक?

डा. सविता झा खानः कियैक से त हम नहि कहि पायब! ई त कहनहारहि पर भार अछि जे ओ कि सोचि एहि तरहक बात-विचार करैत छथि। मचानक गतिविधि मे सबसँ पहिल काज छैक मैथिली पोथीक बिक्री-वितरण-प्रदर्शन, एतय ब्राह्मण-गैरब्राह्मण आ जतेक सर्जक-स्रष्टा-लेखक जाहि कोनो जाति वा धर्मक भेलाह अछि सभक किताब राखल गेल छल। तेकर बाद दोसर पक्ष छलैक ‘विमर्श’, उद्घाटन सँ समापन धरि हरेक विमर्श मे ब्राह्मण संग गैरब्राह्मणक नीक आ प्रभावकारी उपस्थिति रहल छल। तखन कोन बातक ब्राह्मणवाद आ कियैक, ई हमरे प्रश्न अछि ओहेन कहनिहार संग। वैह कहथि से बात। मैथिली मचानक उद्घाटन मे डा. उपेन्द्र महतो समान प्रखर मैथिल हस्तीक उपस्थिति आ डा. सी. के. लाल समान प्रखर आ प्रसिद्ध विचारक केर अध्यक्षता, समापन मे सुप्रसिद्ध भाषाविद् डा. रामावतार यादव – प्रत्येक विमर्शक सहभागी लोकनिक नामक सूची सार्वजनिक मंच – सोशल मीडिया आदि मे राखल गेल अछि।

ई सब कियो देखि सकैत छथि जे कोनो एक जातिक वर्चस्व केँ स्थापित करबाक मनसाय मैथिली मचानक कतहु सँ नहि रहल। हँ, एकटा बात आरो कहय चाहब। समावेशी बनाबय लेल टोकेनिज्म केर पृष्ठपोषण करैत किनको वगैर योग्यता आ निष्ठा केँ मंच पर स्थान देल जायत ताहि सिद्धान्त केँ हम सब नहि मानैत छी। जाहि कोनो व्यक्तित्व मे योग्यता छन्हि, ओ कोनो जातिक रहथि, मंच लेल वैह योग्य होएत छथिन। जेना, मैथिली लोकगीत-संगीतक बात हो आ लोरिकायन सँ लैत दीना-भद्री ओ सलहेस समान अनेकों वीरक भगति गीतक लोकधुन आ वीररस सँ परिपूर्ण गायन आदि मे डा. महेन्द्र नारायण राम केर नाम छूटत त अन्याय होयत। मैथिली मचान द्वारा प्रस्तुत कार्यक्रम मे डा. राम केर उपस्थिति सँ लैत आरो कोनो सत्र मे योग्य आ अनुभवी व्यक्तित्व केँ मात्र प्राथमिकता देल गेल।

कतेको लोक एलाह, कतेक विभिन्न निजी कारण सँ नहियो एलाह। परमेश्वर कापड़ि तथा श्यामसुन्दर यादव केँ सेहो एबाक रहनि, लेकिन अन्तिम समय मे जनतब भेटल जे कोनो अपरिहार्य कारण सँ नहि आबि पायब। गुफरान जिलानी केँ एबाक छलन्हि, ओहो अन्तिम समय घर मे कियो बीमार पड़ि जेबाक कारणे उपस्थित नहि भऽ सकलाह। जनकपुर सँ संचारकर्मी ओ मैथिली अभियानी जिनकर नामक सुझाव अहीं देने रही हुनको ईमेल सँ सम्पर्क कएने रही। परन्तु चनमा नामक आयोजन मे कोनो प्रस्तुति सँ असन्तुष्टिक कारण बना निराजन सँ ओहो आबय सँ मना कय देलनि।

सत्र आ समावेशिकताक विलक्षण स्थिति तँ एहि सँ स्पष्ट अछि। जेना नवतुरिया लेखन – नव सोच – नव उमंग केर सत्र मे मैथिल प्रशान्त – गुन्जन श्री – विजेता चौधरी – नित्यानन्द मण्डल – पंकज पृयांशु – मिहिर झा – अम्रेन्द्र यादव छलाह। मैथिली मीडिया पर चर्चा मे डा. रामभरोस कापड़ि भ्रमर समान विद्वान् आ अभियानीक उपस्थिति छल। मैथिली फिल्म आ रंगकर्म विषय पर राजकुमार महतो, सरिता साह, कृष्णा रोचक-घोचक स्टार केर उपस्थिति महत्वपूर्ण भेल। भाषायी आन्दोलनक सत्र मे रामरिझन यादव ओ डा. अशोक मेहताक उपस्थिति ओतबे महत्वपूर्ण आ सम्माननीय रहल। गीत-संगीत पर राखल गेल विमर्श मे डा. महेन्द्र नारायण राम, गुरुदेव कामत, दिगम्बर झा दिनमणि, डा. बुद्धिनाथ मिश्र, सुनील मल्लिक आ धीरेन्द्र प्रेमर्षि छलाह। जखन पोथी मे नहि, विमर्शहु मे नहि, तखन फेर निराधार आरोप या लांछणायुक्त टीका-टिप्पणी कियैक!

प्रवीणः विद्वत् समुदाय द्वारा मैथिली पुस्तक आ पाठक केँ जोड़बाक अहाँक एहि प्रयास केँ भागिरथी प्रयास कहिकय सराहना कय रहल छथि। केना-केना ई आइडिया विकसित भेल छल अहाँक दिमाग मे?

डा. सविता झा खानः आइडिया हमरा आ अमित आनन्द केँ पहिने आयल मैथिली सनक समृद्ध भाषा-साहित्यक दुर्दशापूर्ण अवस्था देखिकय, मैथिलीक पोथी केर उपलब्धता आ बाजार व्यवस्थापनक विपन्नता केँ हम सब दूर करय चाहैत छी। मैथिली मे लेखन कयनिहार केँ रोयल्टीज सँ जीविकोपार्जन होइन्ह से सदिच्छा अछि। आइ जतेक आइडिया हम सब एहि मे जोड़ने जा रहल छी से एकटा टीम-वर्क थिकैक। एहि मे हम सब बहुत लोक छी। आयोजन मे जेना आ जाहि तरहें योगदान दैत छियैक हुनकर सभक आइडिया अछि। एकटा बड़ा खास बात छैक, एकर नामकरण ‘मैथिली मचान’ केँ ‘समावेशीकरण’ केर सिद्धान्तक परिपालनक क्रम मे राखल गेलैक। मचानक मौलिकता यैह छैक जतय वगैर कोनो विभेद आ भेदभाव सब कियो आबिकय बैसि सकैत अछि, अपन बात राखि सकैत अछि। ताहि मे एकटा समृद्ध सभ्यता आ तेकर साहित्य लेल सोच आयल हमरा सभक दिमाग मे। एहि प्राचीन आ विकसित सभ्यता केँ पाछू पड़ि जायब बहुत चिन्तनीय विषय अछि। एहि पछुआपन सँ मुक्ति पेबाक लेल हम सब मैथिली मचान केर स्थापना केलहुँ। कतहु-कतहु ईहो चर्चा मे अबैत अछि जे मैथिली पढनिहार मात्र मैथिलीक काज करथि, तखन तऽ डा. सुभद्र झा मैथिली नहि पढने छलाह, डा. उदय नारायण सिंह नचिकेता मैथिली नहि पढलनि, लेकिन हिनका लोकनिक काज मैथिली लेल काफी महत्वपूर्ण भेल अछि। एहि तराजू पर तौलब तऽ हमहूँ मैथिली नहि इतिहास पढलहुँ, तखन त हम मैथिलीक लोक नहि भेलहुँ। लेकिन हमरा बुझने मैथिलीभाषाभाषी भले मैथिली पढलनि वा नहि, ई सभक एकसमान चिन्ताक विषय थिक जे एहेन प्राचीन आ समृद्ध भाषा-साहित्य-सभ्यताक रक्षा कोना कयल जाय। मैथिली मचान ताहि क्रमक एक उपक्रम थिक। लेखक, प्रकाशक, पाठक सब केँ जोड़िकय चलबाक अछि। बहुत व्यापक सन्दर्भ आ लक्ष्य अछि।

प्रवीणः सिनेहबंध – मचान – ई सब गूढ शब्द सब निरन्तर मंथन आ समर्पणक बोध करबैत अछि अहाँक मातृभूमि आ अहाँक मातृभाषा मैथिली प्रति। ई अहीं सँ आरम्भ भेल अछि आ कि ऊपरके पीढी सँ? पाठक वर्ग केँ एहि विलक्षण जुड़ाव पर विस्तार सँ जानकारी कराउ।

डा. सविता झा खानः हमर पारिवारिक पृष्ठभूमि मे विद्याधनक महत्वक परम्परा परापूर्वकाल सँ चलैत आबि रहल अछि। हमर परबाबा नेपाल सँ सेहो जुड़ल छलाह। काफी विद्वत्कार्य ओ ओतहु जा कय कएने छलाह। मातृभाषा प्रति हमर लगाव किछु एहि जुड़ाव सभक कारण सँ अछि। निश्चित एहि कार्य मे सहकर्मी-सहयात्री लोकनिक विशेष प्रेरणा सेहो कार्य कय रहल अछि। नेपाल सँ सिनेहबंधक पुरान परम्परा ओतय धरि पहुँचेलक। बहुत नीक लागल जे मैथिली मचान काठमांडू धरि अपन कार्यक्षेत्र बनौलक।

प्रवीणः सिनेहबंध मे जँ खटास आबि जाएत अछि त अहाँ बड़ा निर्विकारी जेकाँ कनिकबो विचलित होएत कहियो नहि देखाइत छी। कि तपस्या आ सिद्धि-विद्धि कएने छी कि?

डा. सविता झा खानः खटास क्षणिक होएत छैक। क्षण भरिक खटास लेल कखनहुँ तनाव आ विचलन उचित नहि होएत छैक। बुझय मे फरक पड़ि जाएत छैक। ई प्राकृतिक अवस्था थिकैक। हम अपन गंभीरता केँ क्षणिक क्रिया-प्रतिक्रिया सँ भंग नहि करय लेल प्रतिबद्ध छी।

प्रवीणः मचानक ऐगला डेग?

डा. सविता झा खानः नहि पता एखन। पहिने तऽ काठमांडू मे सम्पन्न कार्य केँ समेटय मे समय लगतैक। फेर लक्ष्य मुताबिक मिथिलाक विभिन्न कटल क्षेत्र सभ जेना पुर्णिया, कटिहार, बेगूसराय, खगड़िया, मुजफ्फरपुर, आदि मे सेहो मैथिली मचान लगेबाक अछि, पाठक सभ सँ मैथिली पोथीक उपलब्धता आ मिथिलाक विभिन्न औचित्यपूर्ण विमर्श केँ स्थापित करबाक अछि। किछु सम्पर्कित ईष्ट-मित्र कोलकाता लेल आमंत्रण कएलनि अछि। कोलकाताक मैथिली लेल बड़ा पैघ इतिहास आ भूमिका रहलैक अछि। हमरो ओतय जेबाक इच्छा अछि। देखय छी, केना कि होएत छैक।

प्रवीणः डकुमेन्टेशन जे वीडियो फोर्म मे भऽ रहल अछि तेकर उपयोगिता आ प्रदर्शन लेल सेहो कोनो क्रान्तिकारी सोच अछि कि मोन मे? जँ हँ त से कि?

डा. सविता झा खानः डकुमेन्टेशन अनिवार्य कार्य थिक। श्रुति केँ दृश्य मे परिवर्तित करबाक सुगम मार्ग थिक। बहुत एहेन महत्वपूर्ण इतिहास आ ऐतिहासिकता अछि जाहि पर जानल-मानल व्यक्तित्वक बात केँ वीडियो रूप मे परिणति देबाक लेल हम सब नीक टीम डेवलप केलहुँ। बड़ा विज्ञ तकनीकी सहयोगी लोकनि संग छथि। एकर उपयोगिता भविष्यक पीढी लेल होयत। इलेक्ट्रानिक मीडिया लेल एहि तरहक ३० मिनट, ४५ मिनट, ६० मिनट केर महत्वपूर्ण वार्ता-साक्षात्कार मैथिली-मिथिलाक अलग-अलग विषय पर मैथिली मचानक संग समानान्तर रूप सँ बनि जायब एकटा अनमोल धरोहर होयत। ई बड पैघ महत्वक सिद्ध हेब्बे टा करत।

प्रवीणः मिथिला आ मैथिली केँ अहाँ सँ राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय हाईट भेटल, अपनो लोक जुड़ि रहला अछि। केहेन भेट रहल अछि अनुभव?

डा. सविता झा खानः नहि-नहि, हमरा त एना नहि लगैत अछि जे हमरा सँ कोनो ताहि तरहक उपलब्धि भेटलैक अछि। पूर्व मे एक सँ एक महान विभूति लोकनि भेलाह जिनकर योगदान सँ मैथिली भाषा-साहित्य ओ मिथिला सभ्यता विश्व परिवेश मे परिचित भेलैक। तखन आयोजन कय केँ छोट प्रयास हमहुँ सब कय रहल छी, अपन लोक सब निश्चित जुड़ि रहला अछि। नव-नव लोक संग भेंट भेला पर अपन भाषा-साहित्य-समाज-संस्कृति लेल नया उम्मीद जगैत रहैत अछि। एकर सार्थकता भविष्य मे सिद्ध हो से कामना करैत छी।

प्रवीणः मैथिली जिन्दाबाद पाठक लेल किछु अपन खास सन्देश देल जाउ।

डा. सविता झा खानः पाठक वर्ग सँ मैथिली पठन संस्कृति केर पोषणक अपेक्षा अछि। लेखक लोकनि सेहो पाठकक रुचि केँ बुझैत अपन लेखनी केँ ताहि दिशा मे केन्द्रित करथि, सब कियो अपन भाषा-साहित्यक पोथी सब जरूर कीनि-कीनिकय पढू। मैथिली जिन्दाबाद सेहो खुब दूर धरि संचारधर्म केर नीक निर्वहन करय। शोधमूलक, गैर-शोधमूलक लेख-विचारक संग अपन मिथिलाक समाचार सब प्रकाशित होएत रहय, शुभकामना अछि।