भाषाविद् नन्दलाल आचार्य केर बात मैथिली पर, सन्दर्भ नेपालक भाषा आन्दोलन

भाषाविद् केर विचारः बात मैथिली केर

– नन्दलाल आचार्य (मूल लेख नेपाली, भाषा अनुवादः प्रवीण नारायण चौधरी, स्रोत साभारः हिमाल खबर पत्रिका)

 
कोनो भाषा कतबो समृद्ध रहितो ओकर महत्व केँ स्थापित करबाक लेल ताहि भाषाक वक्ता लोकनि केँ अन्य भाषा सभ केँ आदर करय पड़ैछ।
 
कोनो एक भाषा दोसर भाषाक विरोधी नहि, सहयोगी होएछ। अपन भाषिक आवश्यकता पूरा करबाक लेल स्वयं भाषा अपने एक-दोसर सँ सहयोग लैत रहैत छैक, भले तेकर व्याकरणात्मक व्यवस्था मे समानता कम आ असमानता बेसी होइक। सब भाषा सब समुदायक सम्पत्ति थिक। अपन ज्ञानभण्डार तथा भाषाक महत्व बढेनाय सेहो दोसर भाषा सभक जानकारी आर तेकरा प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण राखय पड़ैत छैक। कोनो भाषाक पक्षपोषण कय केँ अन्य भाषाक उपेक्षा करब नीक बात नहि। लेकिन, विगत किछु समय नेपाल मे कोनो खास भाषाप्रति केर विशेष मोह सँ प्रेरित भऽ कय भाषा विवाद सभ उठायब शुरू भेल देखाइछ। नेपाल जेहेन बहुभाषिक, बहुसांस्कृतिक तथा भौगोलिक विविधता वला मुलुक मे एक द्वारा दोसरक भाषाक उपेक्षा कय केँ सुमधुर तथा प्रगाढ सामाजिक सम्बन्ध कायम करब संभव नहि छैक। एतुका सब भाषा केँ राष्ट्रभाषा आर नेपाली केँ सरकारी कामकाजक भाषा मानि चुकल नेपालक अन्तरिम संविधान २०६३ द्वारा अपन–अपन परम्परा एवं सांस्कृतिक पहिचान वला समस्त भाषा केँ राष्ट्रक अमूल्य निधिक रूप मे स्वीकार कयल गेल।
 
भाषा मूलतः विचार विनिमयक माध्यम भेलाक चलते मानव समुदाय मे सरल, ठोस एवं सार्थक ढंग सँ विचार प्रेषण करबाक यादृच्छिक वाक्प्रतीक सभक व्यवस्था करैत अछि। भौगोलिक रूप मे छोट भेलो पर नेपाल मे विश्व भरि अस्तित्व मे रहल १३ भाषा परिवार (भारोपेली, द्रविड, चिनी या एकाक्षरी, सेमेटिक–हमेटिक, यूराल–अल्टाइक, ककेशियन, जापानी–कोरियाई, मलय–पलिशियन, आस्ट्रो–एसियाटिक, बुशमेन, बांटू, सुडान आर अमेरिकी) केर करीब २७९६ भाषा मध्यक चारि (भारोपेली, भोट–बर्मेली, आस्ट्रिक आर द्रविड) परिवारक ९२ भाषा बाजल जाइत अछि। यैह बहुभाषा आर बहुसंस्कृति मे नेपालक राष्ट्रियता निहित अछि।
 
मैथिलीक स्थान
 
२०५८ सालक जनगणना अनुसार नेपाल मे ४८.९८ प्रतिशत जनसङ्ख्याक मातृभाषा नेपाली रहलाक बाद दोसर पैघ समूह (१२.४ प्रतिशत) मैथिली भाषीक छैक। मैथिली भारत मे सेहो एकटा समृद्ध भाषाक रूप मे सम्मान पेने अछि, जतय ६१ लाख २१ हजार ९२२ जन मैथिली मातृभाषी रहबाक हालसालक तथ्याङ्क देखबैछ। भारत मे नेपाली भाषी सेहो १३ लाख सँ बेसी अछि। नेपाली तथा मैथिली दुनू भाषा भारतीय संविधानक आठम अनुसूची मे सूचीकृत अछि। भाषाप्रति केर ई सम्मान जातिप्रति केर सम्मान सेहो थिक।
 
नेपाल मे झपा सँ बारा धरि मैथिली भाषा बाजल जाएछ। मैथिली भाषी लोकनिक सघनता महोत्तरी, सर्लाही, धनुषा, सिरहा तथा सप्तरी मे बेसी छैक। भारत सहित जोड़िकय ई भाषा ५५ हजार ९७० वर्ग किमी क्षेत्रक आबादी मे बाजल जाएछ। नेपाल आर भारतक प्राथमिक विद्यालय सँ विश्वविद्यालय धरि मैथिली भाषाक पठन-पाठन होएछ। नेपाल सरकार मैथिली भाषा, साहित्य, कला तथा संस्कृति केर संरक्षण तथा सम्वर्धनक लेल रु.१ करोडक अक्षयकोष ठाढ कय केँ विद्यापति पुरस्कार स्थापना करबाक बात सँ एहि भाषा केँ देल गेल महत्व स्वतः झलकैत अछि।
 
एहेन अवस्था मे मैथिली भाषा केँ बङ्गाली आ हिन्दीक उपभाषिका सिद्ध करबाक प्रयास तथा नेपाली वा मैथिलीक बदला हिन्दी मे शपथ लेबाक जेकाँ नहि बुझय योग्य प्रयास सभ सेहो भेल अछि। जखन कि भाषा विज्ञानक दृष्टि सँ मैथिली मागधी आनुवंशिक भाषा थिक त हिन्दी शौरसेनी। मैथिलीक साहित्यिक परम्परा हिन्दी सँ प्राचीन आर सुदीर्घ अछि। ताहि लेल अपनहि लिपि (तिरहुता वा मिथिलाक्षर) रहल मैथिली केँ सम्पूर्ण आर्य भाषा मे विलक्षण मानल जाएछ।
 
मैथिली भाषाक प्रथमाप्रथम अध्येयता डा. जर्ज अब्राहम ग्रिअर्सन सन् १९०३ मे भारतक भाषा सभक चर्चा करबाक क्रम मे मैथिली केँ आर सब सँ अलग कहिकय चिन्हौने छथि। पण्डित गोविन्द झाक उच्चत्तर मैथिली व्याकरण (सन् १९७९) मे मैथिलीक आधुनिक भाषावैज्ञानिक विश्लेषण अछि। ताहि सँ पूर्व १९६६ मे डा. रामावतार यादवक लिखल मैथिलीक सन्दर्भ व्याकरण मे वर्ण, रूप, वाक्य आदिक विशद चर्चा अछि। डा. दुर्गानाथ झाक मैथिली साहित्यिक इतिहास पुस्तक मे मिथिला जाति, भाषा, संस्कृति आर साहित्यक विहङ्गम दृश्य सभ भेटैछ। तेकरा बाद प्रा. डा. सुनिलकुमार झा द्वारा “मैथिलीः सम आस्पेक्टस् अफ इट्स फोनेटिक्स् एण्ड फोनोलोजी” शीर्षक मे विद्यावारिधि शोध आर सत्यनारायण गडेरी द्वारा “नेपाली र मैथिली भाषाका पदसङ्गतिको तुलना” शीर्षक मे स्नातकोत्तर तहक शोधपत्र प्रस्तुत कयल गेल अछि। एहि दुइ भाषाक व्याकरणात्मक कोटिसभ (लिङ्ग, वचन, पुरुष, कारक, काल, पक्ष आर भाव)केर तुलनात्मक अध्ययन धरि बाकिये अछि।
 
भाषा सभ केँ व्याकरणात्मक व्यवस्था द्वारा अलग कयल गेल अछि। भाषाक वर्ण, व्याकरण, शब्द आर अर्थ फरक-फरक होएत छैक। मैथिलीक व्याकरण, शब्दकोश आदि प्रकाशन भेलाक बादो नेपाली भाषा संगक अन्तर्सम्बन्ध स्पष्ट कयल जेबाक बात नहि भेटैत अछि। मैथिली भारोपेली परिवारक भाषा थिक। विशाल क्षेत्र मे पसरल रहबाक कारण मैथिलीक अनेको क्षेत्रीय भाषिका सभ सेहो छैक। नेपालक मैथिली मे जनकपुरिया, सिरहाली आर सप्तरिया उपभाषिका छैक। नेपालक सप्तरी आर भारतक मधुबनी क्षेत्र मे बाजल जायवला भाषिका केँ स्तरीय मैथिली मानल जाएछ। एहि मे सेहो विद्याजीवी जाति (ब्राम्हण, कायस्थ, राजपूत आदि) तथा कृषिजीवी (यादव, धानुक, कुर्मी आदि) जातिक बोली अनुरूप दुइ गोट मुख्य स्थानीय भेद छैक। फेर ताहि भीतर सेहो अनेकन् उपभेद छैक जेकरा सभक अध्ययन नहि भऽ सकल छैक।
 
डा. ग्रिअर्सनक अनुसार आदर्श, दक्षिणी, पूर्वी, छिकाछिकी, पश्चिमी, जोलही आर केन्द्रीय जनधारणा करैत मैथिली भाषा मे सात भाषिका छैक। भौगोलिक दृष्टि सँ मैथिलीक आदर्श मैथिली (उत्तरी दरभंगा क्षेत्र), दक्षिणी मैथिली (दक्षिणी दरभंगा, मधुबनी, पूर्वी मुजफ्फरपुर, सीतामढी, उत्तरी मुंगेर, उत्तरी भागलपुर, पश्चिमी पूर्णिया), पूर्वी मैथिली (पूर्वी पूर्णिया, मालदह तथा दिनाजपुर) छिकाछिकी मैथिली (दक्षिणी भागलपुर, उत्तरी सन्थाल परगना, दक्षिणी मुंगेर), पश्चिमी मैथिली (पश्चिमी मुजफ्फरपुर, पूर्वी चम्पारण), जोलही मैथिली (उत्तरी दरभंगाक मुसलमान सभक बोली), केन्द्रीय जनधारणाक मैथिली (पूर्वी सीतापुरा बोली, मधुबनी जिलाक निम्न श्रेणीक बोली आर नेपालमे विद्याजीवी तथा कृषिजीवी जातिक बोली) करैत विभिन्न उपभाषिका क्षेत्र छैक। भौगोलिक दूरी, कम सामाजिक सम्पर्क, भौतिक विकास आर अन्य प्रभावक कारण भाषा मे क्षेत्रीय भेद सभ जन्म लैछ, अपभ्रंश तथा एक्के क्रियाक फरक प्रयोग देखल जाइछ, जे मैथिली मे सेहो अछि। कतिपय ठाम मैथिलीक कथ्य आर लेख्य फरक छैक।
 
नेपालक विद्याजीवी जातिक बोली केँ स्तरीय तथा कृषिजीवी बोली केँ ठेंठ मैथिली मानल जाएछ। विद्याजीवी जातिक बोली मैथिलीक लेख्यरूप होयबाक चलते स्तरीय मानल गेल अछि। नेपाल मे स्तरीय मैथिली बाजनिहार सप्तरी मे २०४८ मे ७२.६ प्रतिशत रहल मैथिली भाषी २०५८ मे ७५.१ प्रतिशत पहुँचि गेल। २०५८ केर जनगणना सँ धनुषा, महोत्तरी, सिरहा, सर्लाही, झपा, मोरङ, सुनसरी, सप्तरी, बारा आदि जिला मे मैथिली भाषाभाषीक संख्या उल्लेख्य रहब देखेबैछ।
 
आर, अन्त मे
 
समुदाय सभक बीच केर सम्बन्ध विस्तार तथा आत्मीयताक कडी सेहो थिक भाषा। एक-दोसराक भाषा, संस्कृतिक महत्व–मान्यता नहि देला सँ नहिये सम्बन्ध विस्तार भऽ सकैत अछि, नहिये त आत्मीयताक भावे उत्पन्न होएछ। अङ्ग्रेजी मे कहलो गेल छैक, ‘रेस्पेक्ट अदर्स एण्ड गेट रेस्पेक्टेड’ अर्थात् स्वयं सम्मानित होयबाक लेल दोसराक सम्मान करू । कोनो भाषा कतबो समृद्ध हो, ओकर महत्ता स्थापित करबाक लेल ओहि भाषाक वक्ता लोकनि केँ आनो भाषा केँ आदर करहे पड़ैछ। तेनाही, कोनो समृद्ध भाषा केँ कम आँकिकय ओकरा जगहपर दोसर भाषा केँ जबरदस्ती स्थापित करबाक प्रयास फलदायी नहि भऽ सकैत अछि।