मुम्बई मे मैथिली पुस्तक उपलब्ध करेबाक अनुपम प्रयास

साभारः धर्मेन्द्र कुमार झा फेसबुक स्टेटस

दिल्ली में मैथिली मचान बनल पुस्तक मेला में काफी सराहना भेल। पाठक, रचनाकार आ प्रेमी लोकनिक जमावड़ा सेहो देखायल। मैथिली पोथी लोक किन क’ पढ़य एहि दिशा में दिनोदिन नव प्रयास भ’ रहल अछि आब । नबका तुर सब सेहो रुचि ल रहलाह अपन भाषाक साहित्य काव्य में, ई नीक संकेत अछि मैथिलीक लेल ।

काल्हि सम्पन्न भेल कार्यक्रम जे की नवी मुम्बई मैथिल समाज द्वारा आयोजित छल, ओहि ठाम सेहो मुख्य प्रवेश द्वार पर मैथिली पोथीक प्रदर्शनी संगहि बिक्री केंद्र मौजूद छल । मुम्बई में रहनिहार बैंककर्मी तथा मैथिली साहित्यक सर्जक श्री राजकुमार मिश्र एवं श्री हीरेन्द्र कुमार झा द्वारा एकर व्यवस्था कयल गेल छल ।

मैथिली पोथीक प्रदर्शनी ओहो मुम्बई में, नव प्रयास भेल जे लोक सभक बीच कौतुहलक विषय छल। एहि प्रयास केँ मंच संचालक श्री रामसेवक ठाकुर द्वारा सेहो प्रशंसा होइत रहल समय समय पर । हम सेहो चारि गोट मैथिली पोथी किनलौ, आ उपस्थित लोक सब सेहो उत्साहित देखेला । मिला जुला क’ अधिकांश पोथी बिका गेलनि । बहुत लोक देखबा लेल सेहो केंद्र पर मौजूद होइत रहला ।

ई शुभ संकेत अछि मैथिली साहित्य आ पोथी लेल । कम स कम शुरुआत त भेल, नहि त मैथिली पोथी लोक मोल ल’ क पढ़ता से बहुत कम देखबा में आबैत छल, अधिकांश लोक उपहारस्वरूप भेटल मैथिली पुस्तक पढ़ैत रहला । और जे मोल ल’ क पढ़ता हुनका सहजता स उपलब्ध नहि होइत छैन्ह । ऑनलाइन शॉपिंग साइट स मंगेला पर पोथी बड़ मंहग प्राप्त होइत छैक ।

एक बातक ध्यान राखय पड़तनि प्रकाशक, रचनाकार लोकनि केँ, जे मैथिली पोथी मिथिलाक बाहर मैथिल बाहुल्य क्षेत्र में सहज रुपे कोना उपलब्ध होयत, एहि लेल ऊत्तम आ नवीन तकनीक के सहारा लेल जा सकैछ । हर महानगर आ नगर में कम स कम दु टा केंद्र वा दु टा व्यक्ति के जिम्मेदारी देल जा सकैछ जे पाठक तक पोथी शुलभता स पहुंचा सकैथ । नगर महानगर में हर मैथिली कार्यक्रम में मैथिली पुस्तक प्रदर्शनी संगहि विक्री केंद्र लगायल जाय जाहि स कार्यक्रम में उपस्थित मैथिल पाठक पोथी किनथि । लोक में अपन भाषा , साहित्य, काव्य के प्रति प्रेम के उत्पति होइ । एक दु बेर प्रदर्शनी देखलाक बाद कोनो व्यक्ति जरूर मैथिली पुस्तक किनता, ई विश्वास अछि ।

सही मार्केटिंग और लोक केँ अपन भाषा के प्रति जागरूक करबाक आवश्यकता अछि । आब लोक स्वतः अपन भाषा, अपन साहित्य, लेल संवेदनशील छैथ, विलुप्त भेल अपन मिथिलाक्षर लिपि सेहो शनैः शनैः अपन प्राचीन गौरव प्राप्त करबाक पथ पर अग्रसर अछि । नव तकनीक के सहारे लोक सब श्री अजयनाथ शास्त्रीजीक पाठशाला में मिथिलाक्षर सिख रहल छैथ, हजारक संख्या में लोक मिथिलाक्षर प्रवीण भेलाह । ई संख्या आगामी किछ समय मे लाखो में पहुंच जायत ।

हम सादर धन्यवाद देबनि आयोजक रवि मंडलजी केँ, प्रदर्शनी लागौनिहार श्री राजकिशोर मिश्र एवं श्री हीरेन्द्र कुमार झा जी के जे एहेन प्रयास केलनि । कतेक काल धरि लोक रोकत अपन मैथिली प्रेम, ओ त जग्जियार हेबे करतै, जरूरत छै साक्षात्कार के । ई सब जिम्मेदारी प्रकाशक, आ रचनाकार के छैन्ह जे ओ कोना ई कार्यक संपादन करताह । लोक आब बेसी जागरूक छैक, देखबे करैत छी जे जहां कियो किछु अनर्गल बाजल मैथिली के संदर्भ में त सब गोटे ओकरा पर प्रहार करबा लेल तैयार भ जाइ छी । सभक मोन में अपन भाषा, माटि आ पानि के प्रति प्रेम छैक, बस ओहि प्रेम केँ जगेबाक जरूरत अछि ।

अंत मे विनम्र निवेदन जे अपन भाषा साहित्य के प्रधानता दियौ सब गोटे, अपन लिपि के संरक्षण में अपन भागीदारी सुनिश्चित करु । अपन पहचान के संजोगि राखब हमर सभक कर्तव्य अछि। जय मिथिला ।

(लेखक दहेज मुक्त मिथिला सहित विभिन्न सामाजिक अभियानक अभियन्ता सेहो छथि।)