मधेशक आन्दोलन आ १० वर्षक उपलब्धि

मधेशक इतिहास आ ऐतिहासिकता
 
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यात्रा आरम्भ होएत अछि २००८ सँ – आब २०१८ मे आबि नेपाल मे संघीयता स्थापित भेल आर मधेश अन्तर्गत कय टा प्रदेश सहितक कुल ७ गोट प्रदेश बनाओल गेल अछि। एहि १० वर्ष मे यात्रा कोन-कोन मोड़ सँ आ केना-केना निकलल, ई बात सब मधेश लेल संघर्ष कयनिहार कतेको नेतृत्वकर्ताक संग चर्चा केला पर ज्ञात होएत अछि। वर्तमान समय मधेश लेल संघर्ष कयनिहार कतेको दिग्गज नेतृत्वकर्ता लोकनि नया नेपाल केर संघीय संरचना मे समायोजित हेबाक बाट पर देखा रहला अछि। तूफान रुकि गेलाक बाद जे मौनताक बोध होएत छैक, किछु तेहने ‘मंजर’ – दृश्य आँखिक सोझाँ हम सब देखि रहल छी।
 
ई जे लिंक शेयर केलहुँ अछि, एकरा पढब, एहि मे देल गेल प्रतिक्रिया केँ पढब आ तेकर बाद लिखब शुरू करब एकटा तिथिवार डायरी। पता चलत जे राजतंत्र समाप्त भेलाक बाद, जनआन्दोलन २ केर सफलता आ जनविद्रोह मे लागल माओवादी छापामार सँ शान्ति समझौता आदिक पृष्ठभूमि मे पूर्वक कइएक दशक पहिनुका मधेशक मुक्तिक मांग २००८ केर ऐतिहासिक मधेश आन्दोलन सँ आरम्भ होएत अछि आर नेपाल मे परिवर्तनक प्रक्रिया मे १० वर्षक समय मे देश आगू बढबाक लेल किछु निर्णय जबरदस्ती करैतो देश केँ अग्रगामी निकास देलक अछि।
 
मधेश आन्दोलन आ संक्रमण कालक पैछला १० वर्ष मे किछु बड़का हिरो त किछु बड़का विलेन केर भूमिका करैत सेहो देखाय पड़ैछ। दुइ मित्रराष्ट्र भारत आ नेपाल बीचक मैत्रीपूर्ण सम्बन्ध पर सेहो खराब असर विभिन्न कारण सँ देखाय पड़ैछ एहि आन्दोलनक परिणामस्वरूप – केकरो दृष्टि मे ई भारतहि केर प्रायोजित एजेन्डा थिक मधेश आन्दोलन त कियो भारत द्वारा नेपाल मे सिक्किमीकरणक योजना कहिकय पड़ोसी मित्रराष्ट्र पर सन्देह करैत अछि, बड़का-बड़का खिस्सा आ मिस्ट्री आदि सुनय लेल भेटैत अछि। लिखब शुरू करी त प्रतिदिन एकटा उपन्यास आ कथा लिखैत कतेको लेखकक जीवन बीति जायत, मुदा लेखन कार्य पूरा नहि होयत।
 
एहि बीच एतेक आन्दोलन सँ देशक विधान त बदलिये गेल, नेपालक जनताक जनमानस मे राजनीतिक स्याह छाप सेहो एहेन पड़ि गेल अछि जे नेतृत्वपर सँ भरोसा सेहो कमजोर आ क्षणभंगुरता केँ प्राप्त कय लेलक। मधेशहि केर परिप्रेक्ष्य मे देखल जाय त जाहि नायक सभक नेतृत्व मे एहेन कठोर संघर्ष कयल गेल, ओकरे ऊपर लोक अपन जमीर बेचि लेबाक आरोप लगाबय सँ नहि पाछू पड़ैत अछि। किछु एहनो हिरो सोझाँ आबिकय मुंह बाबिकय जनता मे अपन छवि ‘नायक’ वला बनेनाय शुरू करैत अछि जेकर हास्यास्पद इतिहास लेखन आ गूगल सँ प्राप्त तथ्य ओ लिंकक सहारे ‘अन्हा गाम मे कन्हा राजा’ वला कहाबत चरितार्थ होएत देखाय पड़ैछ।
 
प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक जुंग केर जैतर्मुखी व्यक्ति जेकाँ अपनहि तरहक चिन्तन, भावना, संवेदन आ सहजबोध मे आत्मरती बनिकय किछु व्यक्तित्व नव-नव प्रयोग करैत देश केँ अपना सोच मुताबिक आगू बढेबाक गोटेक प्रमाण सेहो देखाय दैछ। दोसरहु केर इतिहास केँ अपन मनबोध आ मनोभावना अनुरूप जोड़ि-जाड़ि जबरदस्तियो एकटा भाव – उन्माद आम जनमानस मे पसारबाक खतरनाक खेलाड़ी सब सेहो अभरल। लेकिन प्रकृति केर कोरा मे अवस्थित ई देश प्राकृतिक न्याय केँ मनोगत करैत बहुत कठिन परिस्थिति सँ आगू बढि सकल अछि। राजाक तानाशाही भले नहि हो, परञ्च बौद्धिक रणनीतिक विचारधाराक बलपर एहेन दुरुह अवस्था सँ आगू बढब एकटा देशक संप्रभुताक हित मे हम मानैत छी। जनताक लिलसा जे आर्थिक विकासक युग मे संपन्नता आ सुखक अनुभव करितहुँ, तेकर बाट खुजल जेकाँ हम बुझैत छी। परञ्च एहि करिया सियाह रहस्यमयी नकाबपोश सब सँ देशक रक्षा स्वयं जनता अपने टा कय सकत, ताहि दिशा मे ध्यानाकर्षण करबैत ई क्षणभंगूर लोक सँ सावधान रहबाक अपील करैत छी।
 
हरिः हरः!!