दिल्ली मे गणतंत्र दिवस राष्ट्रीय कवि सम्मेलन, मैथिली भोजपुरी अकादमी द्वारा आयोजित

राम बाबू सिंह, दिल्ली। जनवरी २३, २०१८. मैथिली जिन्दाबाद!!

मैथिली भोजपुरी अकादमी द्वारा आयोजित गणतंत्र दिवस राष्ट्रीय कवि सम्मेलनक सफल आयोजन दिल्लीक प्यारेलाल भवनमे परसू रवि दिन २१ जनवरी केँ सम्पन्न भेल। अकादमी द्वारा एक पर एक महत्वपूर्ण साहित्यिक आ साँस्कृतिक कार्यक्रमक आयोजन विगत किछु समय सँ निरन्तरा मे अछि। २१ जनवरी गणतंत्र दिवसक उपलक्ष्यमे आयोजित मैथिली आ भोजपुरी भाषाक एक सँ बढिकय एक कवि लोकनि भाग लेलनि। अपन भाषा-साहित्य प्रति दर्शकक रुचि अपार सहभागिता सँ सिद्ध भेल। मैथिल दर्शक माछ भात आ गाड़ी घोड़ा द्वारा लियौन केलापर मात्र अबैत अछि, एहि प्रचलित बदनामी केँ आजुक उपस्थित भीड़ गलत सिद्ध कयलक। बारहो मास राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्लीमे मिथिला-मैथिलीक कार्यक्रम चलिते रहैत अछि, विभिन्न सँस्था-समूहक प्रयाससँ मिथिलाक पाबनि-तिहार आ साहित्यिक-सामाजिक विभूति लोकनिक स्मृति उत्सव, मैथिली पोथी बिक्री-प्रदर्शनी, राजनीतिक चिन्तन, विद्वत् सभा, वैवाहिक परिचय सभा आदिक बीच मैथिली भोजपुरी अकादमीक सक्रियता सेहो पहिनेसँ बेसी तेजीसँ बढ़ल जा रहल अछि। निश्चित रूप सँ एहि लेल नवनियुक्त अकादमी उपाध्यक्ष नीरज पाठक केँ श्रेय दैत देखाएत छथि एतुका अगुआ समाज।
 
उपरोक्त कवि गोष्ठीक आयोजन पूर्ण उत्साह सँ भरल रहल। दीप प्रज्वलनकें संगहि “देश भक्ति गीत” आ “जय जय भैरवि” मिथिलाक पारंपरिक गोसाउनिक गीत गबैत विधिवत शुरुआत कयल गेल। मंच संचालन मनीष झा बौआभाइ जे अपनो एक कवि छथि हुनका द्वारा कयल गेल जखन कि अध्यक्षता भोजपुरीक वरिष्ठ लोकप्रिय जनकवि गोरख प्रसाद “मस्ताना” कयलनि।
 
मैथिलीक नवोदित कवि डॉ. संजीत झा सरस केर वीर रस सँ ओतप्रोत कविता “विजयी नाद हुँकार भरब” सँ गोष्ठी आरम्भ भेल। सभागारमे श्रोताजनक थोपड़ी स्वतः कविताक ओज केँ नमन कय रहल छल। पुनः भोजपुरीक कवियित्री डॉ संध्या सिन्हा “काठी” शीर्षक अन्तर्गत नारी सशक्तीकरणक आह्वान कयलीह। कवि मुख्तार आलम जे सहरसा सँ आयल छलाह ओ “महत्वपूर्ण नैS से” केर पाठ केलथि। कवि मिथिलेश मैकश अपन भोजपुरी कविता “कुँवार आ बिआहल मे का अंतर बा” केर प्रस्तुति देलनि आ सौंसे सभागारक लोककेँ हँसैत-हँसैत लोटपोट कय देलनि। हालांकि ई कविता कोनो ग्रन्थ जेकाँ नमरैत गेलाक बाद नीरस होमय लागल छल जेकरा कवि बुद्धिमतापूर्वक सम्हारलनि।
 
मैथिलीक चर्चित कवियित्री निवेदिता मिश्रा झा द्वारा “हाय पिया मिलन हुए होलीमे” आ दोसर “गोरे बदन पर कमाल गोदना” गीत दुनु गीत सँग सभागारक लोक जुड़ल। फेर भोजपुरीक चर्चित कवि मनोज भावुक मन्च सम्हारैत छोटछोट पाँतिमे जिनगीक झंझावतक विषयमे मुक्तक सब प्रस्तुत कयलन्हि। भोजपुरीमे अश्लीलताक मुद्दापर हिनकर अभिव्यक्ति सराहनीय रहल जनिकर शीर्षक छल ‘सँस्कृति” – बड़ी बेवाकी सँ अश्लीलताक विरोध करैत ओ कहलनि जे एक ओर कुकुड़मुत्ता नियर फैलल भकचोंनर गीतकारन के बीआयल कैसेट में लंगटे होके नाचत बिया भोजपुरिया सँस्कृति जैसे कोठा वाली के बेटी होखे बा कोनो गटर में फेकल मजबूर लड़कीं के नाजायज औलाद, त दूसरा ओर लोक रागिनी के किताब में कैद भइल भोजपुरिया सँस्कृति के दुलहिन के चाटत बा दीमक सुंघत बा तिलचट्टा आ काटत बा मुस। 
 
तत्पश्चात् मैथिलीक चर्चित कवि मधुबनी सँ आयल दिलीप झा वीररस सँ ओतप्रोत देशभक्ति कविता “भारत भूमि महान” सँ शुरू कएलाह आ फेर दोसर कविता जकर शीर्षक “कोदारिक पसाठ सँ बहरायत संगीत” समकालीन कविताक प्रस्तुति कयलनि। हिनक कवितक प्रवाहमे सभागार डूबल देखायल। फेर भोजपुरी सँ कवि गंगा प्रसाद “अरुण” द्वारा समाजिक सरोकारपर अपन मनगीत गाबि लोकक उत्साहवर्धन कएलनि। हुनकर कविताक शीर्षक छलनि “का का बोले”।
 
कवि सम्मेलनक मंचपर पहिल बेर अपन प्रस्तुतिक संग नवोदित कवियत्री जयन्ती कुमारी द्वारा “मुखिआइन” शीर्षकक कविता पाठ करैत समसामयिक पंचायती राजक स्थितिपर श्रोता सबकेँ भव्य आ रमणगर स्मृति दियाओल गेल। आत्मविश्वास सँ भरल प्रस्तुति देखि सभागार थोपड़ी सँ गुँजायमान भऽ गेल छल। पहिल प्रस्तुति छलनि मुदा अपन दमदार रचनासँ सभकेँ अचंभित आ आकर्षित केलीह जयन्ती कुमारी। फेर भोजपुरीसँ वरिष्ठ साहित्यकार कवि जौहर शफियाबादी कविताक शीर्षक “ई का गजब भइल, गमला में नागफनी” सँ शुरुआत कएलाह आ दोसर सद्भावना भाइचारा पर सुन्नर जोशवर्धक कविता सँ पूरा सभागार थोपड़ी सँ गुँजायमान करा देलनि।
एक मैथिली – एक भोजपुरीक सिलसिला एहेन चलल जे सौंसे सभागार मे काव्यरसक जादू चलैत रहल। आब मैथिलीक भाँज पुरय लेल कवि – गीतकार विमलजी मिश्र एलाह आर हिनका द्वारा देशभक्तिक कविता “तिरँगा शान छैक” केर प्रस्तुति बेस सुन्दर आ जोशगर स्वर सँग कएलाह। तहिना मणिकान्त झा सेहो अपन कविता देशभक्ति केँ झलकबैत “नमन मिथिले नमन मैथिल नमन मिथिला धाम” केर पाठ कयलन्हि।
 
समस्तीपुर सँ आयल कवि सुधीर कुमार मन्चपर एलाह त मैथिली कविक रूप मे मुदा ओ अपन विचारक मार्फत अपन मातृभाषाकेँ मैथिली सँ फराक अंगिका कहिकय दर्शकक माथ मे भ्रम प्रसार कयलन्हि। बजैत छलाह ओ मैथिली मुदा नाम दैत रहथिन अंगिका-अंगिका, जेकर सभा मे बेस भर्त्सना सेहो भेल। हुनकर कविता सेहो दरवारी कवि जकाँ बुझाएल जेना बिहारमे बहार आबि गेल हो, कोनो रोग शोक नै, किछु ताहि तरहक राज्य व्यवस्थाक महिमा-मंडन कयलनि।
 
मंच संचालक कवि बौआभाइ सेहो अपन कविता दर्शक लोकनि बीच परसलाह। वर्तमान परिप्रेक्ष्यमे सुन्नर सारगर्भित प्रस्तुति “बना देलक बिलटौआ” लोकपलायन केर स्थितिपर प्रहार कयलनि। अन्तमे कार्यक्रमक अध्यक्षता कय रहला कविवर मस्ताना केर कविता जेकर शीर्षक छल “सुन तोहके पुकारे सीमान राजाबु” भारतीय नारिक शक्ति, भक्ति देशक आओर समाजक प्रति दायित्व पर गज्जब केर प्रस्तुति छल। एकबेर फेर सँ सभागार गुँजायमान भेल, ताहि बीचमे विशिष्ट अतिथि राज्यसभा सांसद संजय सिंह, बुरारी विधायक संजीव झा, ऋतुराज झा आओर अखिलेश पति त्रिपाठी सभ सेहो सम्मेलन मे भाग लेबय पहुँचल छलाह। मान सम्मान सँग संजय सिंह हिन्दीमे एक प्रभावशाली कविताक वाचन कयलनि आर अध्यक्षीय भाषण मस्ताना जी द्वारा कयला उपरान्त मैथिली भोजपुरी अकादमीक उपाध्यक्ष नीरज पाठक द्वारा समस्त आगन्तुक कवि लोकनिक संग अपार दर्शकक भीड़ आ संस्था आदिक प्रतिनिधि लोकनिक भरपूर धन्यबाद करैत अपन भाषा आ संस्कृति प्रति सेवाक भावना संग आगू बढबाक सन्देश देलनि।