श्रीमद्देवीभागवतसुभाषितसुधा – ज्ञान प्राप्तिक संछिप्त आ अत्यन्त महत्वपूर्ण आधार

श्रीमद्देवीभागवतसुभाषितसुधा   येन केनाप्युपायेन कालातिवाहनं स्मृतम्। व्यसनैरिह मूर्खाणां बुधानां शास्त्रचिन्तनैः॥   जाहि कोनो प्रकार सँ समय त बीतिते रहैत छैक, मुदा मूर्खक समय व्यर्थ दुर्व्यसन मे बीतैत छैक आर...

के छलाह महर्षि दधीचि – कियैक अमर भेल हिनक नाम

हिन्दू दर्शनक एक अविस्मरणीय पात्रः महर्षि दधीचि - अनुवादः प्रवीण नारायण चौधरी (मूल - भारतकोश) दधीचि प्राचीन काल केर परम तपस्वी और ख्यातिप्राप्त महर्षि छलाह। हुनकर पत्नीक...

नवधा भक्तिक अपूर्व उदाहरण: शबरी माता

स्वाध्याय आलेख - प्रवीण नारायण चौधरी भक्ति भगवान् प्रति पूर्ण समर्पणकेर नाम होइछ। एक सँ बढिकय एक दार्शनिक आ ज्ञानी द्वारा भक्ति पर अपन मत आ...

सीता आ राम अभिन्न छथि – बेर-बेर ‘सीताराम’ केँ प्रणाम करीः रामचरितमानस सँ सीख-१०

स्वाध्यायः रामचरितमानस सँ सीख - १० सियाराममय सब जग जानी, करहुँ प्रणाम जोड़ि जुग पाणी!! आजुक स्वाध्यायक ई दसम् भाग अति विशिष्ट अछि। हमरा सब...

काशी मे गंगालाभ सँ मुक्ति

स्वाध्याय (अनुवादः प्रवीण नारायण चौधरी) काशी मे गंगालाभ सँ मुक्ति ई कथा कल्याण मे श्रीसत्यजी ठाकुर लिखने छथि -   काशी मे एक साध्वी वृद्धा विधवा रहैत छलीह। हम...

श्रीराधामाधव केर कृपा-कटाक्ष सँ धन्य स्वामी विवेकानन्द

स्वाध्याय लेख स्वामी श्री गम्भीरानन्द जी (प्रेषकः डा. सुरेशचन्द्र जी शर्मा) - अनुवादः प्रवीण नारायण चौधरी

मैथिली सुन्दरकाण्डः श्री रामजीक वानर सेना संग चलिकय समुद्र तट पर पहुँचब

मैथिली सुन्दरकाण्डः श्री तुलसीदासजी रचित श्रीरामचरितमानस केर सुन्दरकाण्डक मैथिली अनुवाद श्री रामजीक वानर सेना संग चलिकय समुद्र तट पर पहुँचब दोहा : कपिपति बेगि बजेला आयल मुख्यक...

मनुष्य देहक महत्वः गूढ तत्त्व समीक्षा मे पंडित रुद्रधर झा – भाग २

मनुष्य देह केर महत्व   - पंडित रुद्रधर झा (अनुवाद - प्रवीण नारायण चौधरी)   क्रमशः उपरान्त - भाग २   असाधारण मानव शरीर केर दोसर असाधारण कार्य थिक -...

श्रीदेव्यथर्वशीर्षम् : एक अत्यन्त महत्त्वपूर्ण उपनिषद स्तोत्र – देवी उपासना (मैथिली भावार्थ सहित)

कनेक मनन करू! दुर्गा सप्तशती मिथिलाक हर घर लेल एक आवश्यक पोथी मानल जाइत अछि। जे कियो भक्ति साधना सँ जुडल छी, तिनका सभकेँ जरुर...

हम शिव छी, हम शिव छी!! शिवोहं शिवोहं!!

निर्वाणषट्कम् मनोबुध्यहंकार चिताने नाहं । न च श्रोतजिव्हे न च घ्राणनेत्रे । न च व्योमभूमी न तेजू न वायु । चिदानंदरुप शिवोहं शिवोहं ॥ १ ॥ हम...