किछु गूढ़ चिन्तन (कर्मयोग – गीताक तेसर अध्याय)

स्वाध्याय - प्रवीण नारायण चौधरी किछु गूढ़ चिन्तन (कर्मयोग - गीताक तेसर अध्याय)   गीताक तेसर अध्याय मे भगवान् कृष्ण मनुष्य द्वारा कर्म केना-केना कयल जाइछ, ताहि पर...

मैथिली फिल्म केर सफलताक नव सूत्रः लोकसाहित्य

मैथिली फिल्म - सफलताक नया सूत्र भेटि गेल? (तीरभूक्ति पत्रिका मे प्रकाशनार्थ) - प्रवीण नारायण चौधरी बहुल्यजन मे भाषिक चेतनाक प्रसार संगहि मैथिली फिल्म केर सफलताक नव...

दहेज प्रथा या कुप्रथा?

दहेज प्रथा कि कुप्रथा   "निश्चित बेटीक माय-बापक हाथ छनि दहेज कै बढ़ावा देबा मे। बेटी केँ दहेजक बलि-वेदी पर चढ़ेबा मे सेहो कतहु न कतहु...

मिथिलाभाषा रामायणः अयोध्याकाण्ड छठम् अध्याय

स्वाध्याय पाठ कविचन्द्र विरचित मिथिलाभाषा रामायण अयोध्याकाण्ड - छठम् अध्याय ।चौपाइ। ।मिथिलासंगीतानुसारेण नामान्तरेण च योगिया-मालव-छन्दः। लक्ष्मण सौँ गुह कहल निषाद। राम - दशा देखि चित्त विषाद॥ देखिअ रामचन्द्र गति भाय।...

महाशिवरात्रि एकटा नब सृजनक स्रोत केर आशा क राति थीक

लेख प्रेषित :दिलीप झा महाशिवरात्रिक महत्त्व शिव के महान रात्रि "महाशिवरात्रिक" पाबैन मिथिलाक आध्यात्मिक उत्सव सभक सूची मे सबसs महत्वपूर्ण अछि। कोनो समय मैथिल संस्कृति मे एक...

भगवान शिव अलौकिक शक्ति दाता अनाथक नाथ छथि

लेख प्रेषित : कीर्ति नारायण झा शिवरात्रिक महत्व हमर सभक सनातन धर्म मे ३३ करोड़ देवी देवता मे शिरोमणि देव महादेव छैथि। सृष्टि केर तीनू लोक मे...

त्रिनेत्रधारी जगपालक के महिमा अपार छनि

लेख प्रेषित : ममता झा #महाशिवरात्रि_कै_महत्व शिव के महादेव कहल जाइत अई कियाकी देवों के देव छैथ । सब कियो पूजा करैत अछि औघड़नाथ के। 'शिवरात्रि' शब्दक अर्थ...

महाशिवरात्रिक पूजा क विशेष महत्व अछि सांसारिक लोक लेल

लेख प्रेषित : अखिलेश कुमार मिश्र #शिवरातिक महत्व ओना त' जतेक पावनि तिहार अछि सभक अपन अपन अलग महत्व होइत अछि। मुदा जेखनि बात शिवरातिक होइत अछि...

मिथिलानी कनियाँ (काव्य)

काव्य - काजल चौधरी, योग प्रशिक्षिका, नई दिल्ली मिथिलानी कनियाँ (कनियाँ = पुतोहु, daughter-in-law) हम छी मिथिलानी कनियाँ घूँघट लैपटौप संग रखय छी! फायल मे माथा ओझराबी क्लाइंट्स सभक दुःख केँ...

मिथिलाभाषा रामायण – अयोध्याकाण्डः पाँचम अध्याय

स्वाध्याय पाठ कविचन्द्र विरचित मिथिलाभाषा रामायण  अयोध्याकाण्ड - पाँचम अध्याय ।चौपाइ। ।राग-तरङ्गिणी-ग्रन्थानुसारेण मंगलराज-विजय छन्दः। केकयि कयल कुठाठ कठोर। गुपचुप रहल न भय गेल सोर॥ केकयि - कृत शुनि शुनि उतपात।...