रामचरितमानस मोतीः रामजीक दंडकवन मे प्रवेश, जटायु मिलन, पंचवटी निवास तथा श्री राम-लक्ष्मण...

स्वाध्याय - प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती रामजीक दंडकवन मे प्रवेश, जटायु मिलन, पंचवटी निवास तथा श्री राम-लक्ष्मण संवाद १. अगस्त्य मुनि श्री रामजी केँ आगू कहैत छथि...

मिथिला कर्मकाण्डी लोकसंस्कार: विश्वभरि मे अलगे स्थान (आवश्यक व्यवहारिक मंत्र सहित)

संकलन - प्रवीण नारायण चौधरी  (स्रोत: मिथिला पंचांग एवं अन्य) मिथिला केँ तंत्रभूमि - सिद्धभूमि - तपोभूमि आदिकाल सँ मानल जाइत रहल अछि। एतय एक सँ...

दियाबाती आ लक्ष्मी पूजा पद्धति

संस्कृतिः दियाबाती आ महालक्ष्मी पूजा पद्धति महालक्ष्मी पूजाक संछिप्त विधि सहित दीपावली पाबैन यानि कार्तिक कृष्ण अमावस्याक दिन - भगवती श्रीमहालक्ष्मी आ भगवान् गणेशक नवीन प्रतिमाक प्रतिष्ठापूर्वक...

प्रवीण डायरी – २०१२ – भाग ४

पूर्व केर ३ भाग उपरान्त १ अक्टूबर २०१२ चलू चलै छी पिता मिलन लऽ! पंछी छी हम हुनकहि पोसा, नाम हमर छी मनु तोता। खन विचरी पसरी आ...

रामचरितमानस मोतीः श्री राम संग श्री हनुमान केर भेंट आ सुग्रीव सँ मित्रता

स्वाध्याय - प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती श्री राम संग श्री हनुमान केर भेंट आ सुग्रीव सँ मित्रता १. श्री रघुनाथजी आगू बढ़लाह। ऋष्यमूक पर्वत नजदीक आबि गेल।...

कठिन व्रत निराजल रहबाक कारण कहल गेल अछि जितिया पावनि बड्ड भारी

अपना सभक ओहिठाम जखन लोक कोनो दुर्घटना सँ साफ साफ बचि जाइत अछि तऽ सभ कहैत छैक जे एकर माय खरजितिया पावनि कयने छलैक...

तनुजाक ‘रोचक संस्मरण’ मे काज कयनिहाइर पिंकी संग मधुबनीक भेंट

कथा-संस्मरण - तनुजा दत्ता साल भरिक बाद सासुर जेबाक मौका भेटल । गेला पर सब किछ बदलल-बदलल बुझाइत रहय । कमेनहाइर सेहो बदलि गेल छलीह । ‎........

जेहेन खायब अन्न तेहेन होयत मनः संस्कृति पर भोजनक प्रभाव

विचार - संजय कुमार झा संस्कृति पर भोजनक प्रभाव मिथिला संस्कार आ संस्कृति लेल विश्वव्यापी आ सुप्रसिद्ध अछि। मिथिलाक भोजनक सहचार आर पहुनाय सेहो कम लोकप्रिय नहि...

रामचरितमानस मोतीः श्री हनुमान्‌जी आ श्री विभीषणजीक भेंट

स्वाध्याय - प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती हनुमान्‌-विभीषण संवाद १. ओ महल श्री रामजीक आयुध (धनुष-बाण) केर चिह्न सँ अंकित छल। ओ एतेक शोभनीय छल जे एकर शोभाक...

“सोशल मीडिया आजुक समयमे लोकक एकटा स्टेटस सिम्बल बनि गेल छैक।”

-- कीर्ति नारायण झा।    अति रूपेण वै सीता चातिगर्वेण रावणः। अतिदानाद् बलिर्बद्धो ह्यति सर्वत्र वर्जयेत्॥ अर्थात अत्यंत रूपवती होयवाक कारणे सीता के हरण भेल छलैन्ह,...