रामचरितमानस मोतीः श्री रामजीक सुग्रीव सँ तमसायब, श्री लक्ष्मणजीक कोप
स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती श्री राम केर सुग्रीव पर तमसायब आ लक्ष्मणजी द्वारा कोप १. वर्षा बिति गेल, निर्मल शरद्ऋतु आबि गेल, लेकिन हे तात! सीताक कोनो खबरि एखन धरि नहि भेटल। एक बेर कोहुना खबरि टा भेटि जाय त फेर कालहु केँ जीतिकय पलहि भरि मे जानकी केँ लय आनी! कतहु … रामचरितमानस मोतीः श्री रामजीक सुग्रीव सँ तमसायब, श्री लक्ष्मणजीक कोप




