रामचरितमानस मोतीः कौसल्या सुनयना-संवाद, श्री सीताजीक शील
स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती कौसल्या सुनयना-संवाद, श्री सीताजीक शील १. सब गोटे कहि रहल छथि जे हम एहि सुखक योग्य नहि छी, हमरा एहेन कतय भेटत? दुनू समाज केँ श्री रामचन्द्रजीक चरण मे सहज स्वभावहि सँ प्रेम छन्हि। एहि तरहें सब कियो मनोरथ कय रहल छथि। हुनका लोकनिक प्रेमयुक्त वचन सुननिहारोक मोन … रामचरितमानस मोतीः कौसल्या सुनयना-संवाद, श्री सीताजीक शील




