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प्रवीण नारायण चौधरी

हम छी चौबटियाः रूपा झा रचित जुड़ि शीतल विशेष मैथिली कविता

कविता – रूपा झा हम छी चौबटिया। भरि बरख अहाँक लतखुरदन स’ आहत मर्माहत हम, प्यासल रहै छी भरि बरख, बाट जोहैत, टकटकी लगेने रहै छी, कहिया आओत जुड़ि शीतल, कहिया हैत हमरो भोर, आ जुड़ाएब हमहुँ, ओइ मनुक्खक हाथ स’, जे मनुक्ख भरि बरख हमरा छातीपर करैत अछि, निशाभागो राति मे लतखुरदन, आ हम हम छी चौबटियाः रूपा झा रचित जुड़ि शीतल विशेष मैथिली कविता

मैथिलजनः डिफरेन्ट वर्सेस डिफिकल्ट

विचार – राजकिशोर झा हे बंधुगण! अपन गलती, हरगिज़ नहि अहाँ करू कबूल, दोसर के माथा मढ़ि दियौ, अप्पन हिस्सा केर सब भूल? #Different vs. #Difficult साहित्यकार, गीतकार, गायक, प्रोफेशनल्स, संगीतकार, शिक्षक, अधिकारी, व्यापारी, कर्मचारी, राजनेता आदि – ई सब different छथि की difficult? मानव दर्शन (ह्यूमन साइकोलॉजी) केर अध्ययनानुसार एहि संसारमे सब व्यक्ति अलग मैथिलजनः डिफरेन्ट वर्सेस डिफिकल्ट

नव वर्ष २०८० विक्रम संवत सालः अपन मोनक किछु बात पाठक लेल

विक्रम संवत २०७९ के हमर अनुभवः तीत आ मीठ आइये के दिन राजा विक्रमादित्य भारतवर्षीय भूमि, भेष, भूषण पर बाहरी आक्रान्ता शक पर विजय हासिल करैत मुक्त करौलनि तेँ एकरा ‘विक्रम संवत’ साल कहल जाइछ। एतबा नहि – आइ नव वर्ष, ‘जुड़ि शीतल’। जुड़ायल रहू – पैघक आशीर्वादक लोकरीतिक मंत्र। खाली ढ़कोसला आ आडम्बर नहि, नव वर्ष २०८० विक्रम संवत सालः अपन मोनक किछु बात पाठक लेल

मुम्बई वाली भौजी – मैथिली कथा माध्यम सँ मैथिली लिटरेचर फेस्टिवलक एक छोट विवेचना

मैथिली कथा – प्रवीण नारायण चौधरी मुम्बई वाली भौजी बड़का बौआ आ पढुआ बाबू केँ मुम्बई वाली भौजी बड बेसी हुथियारैत रहथिन। बड़का बौआ दून स्कूल सँ पढ़लन्हि तेँ ओ अपनहि बड़ काबिल लोक। पढुआ बाबू 5 गो विषय सँ एमए कय डिग्री के भरमार लगा रेकर्ड बनेनिहार महापुरुष। ताहि बीच बिड़ला कम्पनी के मुम्बई मुम्बई वाली भौजी – मैथिली कथा माध्यम सँ मैथिली लिटरेचर फेस्टिवलक एक छोट विवेचना

प्रवासी मैथिलक हार्दिक इच्छाः फेर सँ सीखी अपन भाषा

१४ अप्रैल २०२३, मैथिली जिन्दाबाद!! “अखिल भारतीय मिथिला संघ” छत्तीसगढ़ समूह केर एक सदस्य प्रभात दत्त झा द्वारा समूह के एडमिन सँ एकटा प्रस्ताव राखल गेल छल जे प्रवासी समाज जे अपन भाषा-संस्कृति सँ बहुत पहिनहि दूर भ’ गेलथि, हुनका सब लेल किछु एहेन कार्य कयल जाय जाहि सँ ओ लोकनि फेर सँ घरवापसी कय प्रवासी मैथिलक हार्दिक इच्छाः फेर सँ सीखी अपन भाषा

साहित्य प्रशंसक आ साधक मे फर्क – मुम्बई एमएलएफ सँ वापसी उपरान्त

मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल २०२३ – मुम्बई सँ वापसी उपरान्त साहित्य प्रशंसक आ साधक मे फर्क #मैथिलीसाहित्य #घटैतपाठक #आत्मप्रशंसीसाहित्यकार साहित्यक प्रशंसक (दीवाना) आ साहित्यक साधक मे फर्क होइत छैक। हमरा ई कहय मे कनिकबो हर्ज नहि जे साहित्यक साधक बनय लेल हमरा मे धीरता, गम्भीरता आ लगनशीलताक जेहेन परमावश्यक गुण विकसित नहि भ’ सकल अछि एखन साहित्य प्रशंसक आ साधक मे फर्क – मुम्बई एमएलएफ सँ वापसी उपरान्त

नीति, नीयत आ नियमः सन्दर्भ नारी आ नारी धर्म

कतय जा रहल अछि मानव समाज?    मानव समाज मे नारीक महत्ता बहुत बेसी छैक। नारी मात्र ओ शक्ति छथि जिनका मे मातृत्वक गुण होइत छन्हि। पुरुषक आध्यात्मिक स्वरूप मे नारीक प्रतिरक्षा प्रति बेसी जिम्मेदार प्राकृतिक नियम थिक। मानव कि, पशुअहु सब मे यैह नीति लागू कयल गेल छैक प्रकृति द्वारा। एकटा नर चिड़ैयाँ अपन नीति, नीयत आ नियमः सन्दर्भ नारी आ नारी धर्म

रामचरितमानस मोतीः जनक-वशिष्ठादि संवाद, इन्द्रक चिन्ता आ सरस्वती द्वारा सीख

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरिमानस मोती जनक-वशिष्ठादि संवाद, इन्द्रक चिन्ता आ सरस्वती द्वारा सीख १. श्री रामजी आ वशिष्ठजीक बीच बातचीत भेला उपरान्त श्री रामजी गुरु वशिष्ठ केँ प्रणाम कयकेँ चलि गेलाक बाद ऋषि वशिष्ठजी धीरज धारण कय जनकजी लग अयलाह। गुरुजी श्री रामचन्द्रजीक शील आ स्नेह सँ युक्त स्वभावहि सँ सुन्दर वचन राजा रामचरितमानस मोतीः जनक-वशिष्ठादि संवाद, इन्द्रक चिन्ता आ सरस्वती द्वारा सीख

मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल २०२३ः कि सब होयत एहि बेर

३ अप्रैल २०२३ । मैथिली जिन्दाबाद!! पटना सँ २०१४ मे भेल शुरुआत “मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल” केर पाँचम बेरुक आयोजन भारतक आर्थिक राजधानी मुम्बई महानगर के मड आईलैन्ड सनक प्राइम लोकेशन मे होयत। एहि बेरुक आयोजन ७ अप्रैल सँ प्रारम्भ भ’ ९ अप्रैल धरि रूपवीर बंगला मे आयोजित अछि। विदित हो जे वैश्विक गाम (Global Village) मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल २०२३ः कि सब होयत एहि बेर

रामचरितमानस मोतीः सुनयना-जनक संवाद

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती जनक-सुनयना संवाद, भरतजी की महिमा १. राजा-रानी सीताजी सँ बेर-बेर भेटि आ हृदय सँ लगा सम्मान करैत विदाह कयलनि। चतुर रानी समय पाबि राजा सँ सुन्दर वाणी मे भरतजीक दशाक वर्णन कयलीह। सोना मे सुगन्ध आर समुद्र सँ निकलल सुधा मे चन्द्रमाक सारतत्त्व अमृत समान भरतजीक व्यवहार सुनिकय रामचरितमानस मोतीः सुनयना-जनक संवाद