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प्रवीण नारायण चौधरी

स्वर्ग सँ सुंदर मिथिला धाम, मंडन अयाची राजा जनक के गाम: मिथिला यात्रा

दहेज मुक्त मिथिलाक साहित्यिक अभियानः लेखनीक धार अन्तर्गत २० अप्रैल २०२३ ‘मिथिला यात्रा संस्मरण’ पर संकलित आलेख “स्वर्ग सँ सुंदर मिथिला धाम, मंडन अयाची राजा जनक के गाम” – कीर्ति नारायण झा मिथिला के स्वर्ग सँ सुंदर धाम कहल गेलैक अछि आ एहि स्वर्ग में देवी देवता के सभ ठाम बास छैन्ह। मिथिलाक सभ आंगन स्वर्ग सँ सुंदर मिथिला धाम, मंडन अयाची राजा जनक के गाम: मिथिला यात्रा

#जानकीनवमीविशेष – सीताजी संग हनुमानजीक प्रथम भेंट आ श्रीरामक सन्देश

जानकी नवमी विशेष स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी #जानकीनवमीविशेष   अपन समूह ‘दहेज मुक्त मिथिला’क कमान्डर इन चीफ पराम्बा जानकीजी छथि। हम सब हुनक दूत सब थिकहुँ। जानकीदूत होयबाक सौभाग्य कम भारी बात नहि! रामजीक दूत बजरंगबली भ’ कय जानकीजी सँ भेटय गेल रहथिन। फेर जानकीजीक दूत बनिकय रामजी लग घुमि अयलथि बजरंगबली। एखन अपन #जानकीनवमीविशेष – सीताजी संग हनुमानजीक प्रथम भेंट आ श्रीरामक सन्देश

#जानकीनवमीविशेष – हमर जानकी आ पाहुन श्री रामजी

हमर जानकी आ पाहुन श्री रामजी – प्रवीण नारायण चौधरी   देखू भाइ-बहिन-मित्र लोकनि!! हम सब मिथिलावासी जानकीक नैहरा सँ छी। श्री रामजी जखन वनवास गेल रहथि त हमरा लोकनिक धिया जानकीजी सेहो हुनका संग ओहिना साधूक वेश बनाकय गेलथि जेना रामजी केँ जेबाक लेल कैकेइ माँ पिता दशरथ सँ वचनानुसार आज्ञा करबौलीह। रघुकुल के #जानकीनवमीविशेष – हमर जानकी आ पाहुन श्री रामजी

उर्विजा द्वारा जानकी साहित्य कला महोत्सव दिल्ली मे सम्पन्न भेल

२५ अप्रैल २०२३ । मैथिली जिन्दाबाद!! मैथिली भाषा-साहित्यक क्षेत्र मे उन्नति-प्रगतिक नित्य नव आयाम बनेबाक विभिन्न कार्यक्रम केँ निरन्तरता दैत काल्हि सोम दिन दिल्ली मे सम्पन्न एक अति महत्वपूर्ण कार्यक्रम पर श्री अरुण कुमार मिश्र द्वारा फेसबुक मे पोस्ट कयल गेल अछि जेकर सम्पादित रूप प्रस्तुत अछि। रिपोर्टः साभार अरुण कुमार मिश्र, दिल्ली विगत किछु उर्विजा द्वारा जानकी साहित्य कला महोत्सव दिल्ली मे सम्पन्न भेल

अर्थशास्त्र – कौटिल्य चाणक्यक ओ महान नीतिशास्त्र जे राजधर्म सिखबैत अछि

प्राचीन साहित्यः अर्थशास्त्र – अनुवादित लेख (अनुवादकः प्रवीण नारायण चौधरी) अर्थशास्त्र (सामग्री विज्ञान) कौटिल्य, या सामान्यतया विष्णुगुप्त चाणक्य के नाम सँ जानल गेनिहार, भारतक प्रथम प्रधानमंत्रीक रूप मे जानल जाइत छथि। ईसा पूर्व ४था शताब्दी मे भारतक सब सँ पैघ सम्राज्यक संस्थापक सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य केर मुख्य सलाहकार कौटिल्य मौर्य सम्राज्यक अत्यन्त महत्वपूर्ण हस्ती छलाह अर्थशास्त्र – कौटिल्य चाणक्यक ओ महान नीतिशास्त्र जे राजधर्म सिखबैत अछि

ई पाप छियैक या पुण्य – दुविधा सँ ऊबार केना भेटत

एक मनोनुभूति अपना सब बेसीकाल कोनो कर्म करय सँ पहिने पाप आ पुण्य केर पक्ष पर ध्यान दैत छियैक, किंवा दैत हेबय। हमर हाल एहि मादे बच्चे सँ द्वंद्वबन्धन मे फँसयवला होइत आयल अछि। ई शायद माँ-पिता आ परिजनक बेर-बेर टोकबाक कारण भेल, बच्चा मे बड बदमाशी करियैक…. आ बेर-बेर बात-कथा सुनैत-सुनैत ई हाल भ’ ई पाप छियैक या पुण्य – दुविधा सँ ऊबार केना भेटत

सद्गृहस्थ सन्त जगन्नाथ चौधरी पुण्य स्मृति समारोह सुल्तानपुर मे सम्पन्न

25 अप्रैल 2023 । मैथिली जिन्दाबाद!! रिपोर्ट साभार: दीप नारायण विद्यार्थी सुलतानपुर गाममे मनाओल गेल सद्गृहस्थ सन्त जगन्नाथ चौधरी पुण्य-पर्व समारोह काल्हि 24 अप्रैल 2023केँ कुशेश्वरस्थानक सुलतानपुर गाममे सद्गृहस्थ सन्त जगन्नाथ चौधरीक पुण्य-पर्व समारोहक आयोजन आइ जय-राम शोध संस्थान, सुलतानपुर द्वारा आयोजित भेल। एहि सारस्वत समारोहमे लब्धप्रतिष्ठ विद्वान् सभक जुटान भेल। जय-राम शोध संस्थान, सुलतानपुर सद्गृहस्थ सन्त जगन्नाथ चौधरी पुण्य स्मृति समारोह सुल्तानपुर मे सम्पन्न

रामचरितमानस मोतीः राम-भरत संवाद, पादुका प्रदानक संग भरतजीक बिदाइ

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती श्री राम-भरत-संवाद, पादुका प्रदान, भरतजीक बिदाइ १. ऐगला (छठम्) दिन भोरे स्नान कयकेँ भरतजी, ब्राह्मण समाज, राजा जनक और अन्य समस्त समाज आबि जुटलथि। आइ सबकेँ विदा करबाक लेल नीक दिन अछि, ई मोन मे जानि कृपालु श्री रामजी कहय मे सकुचा रहल छथि। श्री रामचन्द्रजी गुरु वशिष्ठजी, रामचरितमानस मोतीः राम-भरत संवाद, पादुका प्रदानक संग भरतजीक बिदाइ

पिंकी के ओ लभ लेटर मन्टू के नाम – मैरी झाक कलम सँ

प्रेम पत्र – मिथिला मे केहेन प्रेम होइत छैक तेकर जीवन्त चित्रण – मैरी झा हमर जानेमन मंटू, अहाँ के चिठ्ठी आय भेटल . जखन स पढ़लौ हमर #लभलाइटिस बैढ़ गेल…। बोरसी में आयग जकाँ आय हमर दिल सुनैग रहल अईछ।… कते बेर दिल बना क अहाँ के नाम लिखू… कतेक बेर ओई पर तीर पिंकी के ओ लभ लेटर मन्टू के नाम – मैरी झाक कलम सँ

हम आबि रहल छी – मैथिली धारावाहिक भाग ५ एवं ६

उपन्यास पर आधारित मैथिली धारावाहिक  उपन्यासकारः रबीन्द्र नारायण मिश्र हम आबि रहल छी- भाग 5 5 दुपहरिआमे  डेराक घंटी बाजल । हम औंघाइत रही । अकचका गेलहुँ । जाबे उठी-उठी ताबे तँ तरातर-तरातर कैकबेर घंटी बाजि गेल । “खोलि रहल छी ।” हम ससरि कए केबार लग जाइत छी । केबार खोलबाक प्रयास करैत छी हम आबि रहल छी – मैथिली धारावाहिक भाग ५ एवं ६