रामचरितमानस मोतीः किष्किन्धाकाण्ड मंगलाचरण
स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती मंगलाचरण श्लोक : कुन्देन्दीवरसुन्दरावतिबलौ विज्ञानधामावुभौ शोभाढ्यौ वरधन्विनौ श्रुतिनुतौ गोविप्रवृन्दप्रियौ। मायामानुषरूपिणौ रघुवरौ सद्धर्मवर्मौ हितौ सीतान्वेषणतत्परौ पथिगतौ भक्तिप्रदौ तौ हि नः ॥१॥ कुन्दपुष्प आर नीलकमल समान सुन्दर गौर एवं श्यामवर्ण, अत्यन्त बलवान्, विज्ञान केर धाम, शोभा संपन्न, श्रेष्ठ धनुर्धर, वेद द्वारा वन्दित, गौ एवं ब्राह्मण लोकनिक समूह केर प्रिय (अथवा … रामचरितमानस मोतीः किष्किन्धाकाण्ड मंगलाचरण




