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प्रवीण नारायण चौधरी

जानकी नवमीः मैथिली दिवस

लेख – कुमुद मोहन झा मैथिली दिवस – जानकी चरित्र सँ समाज केँ प्रेरणा लेबाक फराक दृष्टिकोण मिथिलेश कुमारी जानकी के प्राकट्य दिवस बैशाख शुक्ल नवमी तिथि केँ मैथिली दिवस के रूप मे मनाओल जाइत अछि. ई पवित्र तिथि सीता नवमी आ’ जानकी नवमीक नाम सँ प्रसिद्ध अछि. एहि तिथि मे मिथिलाक पवित्र भूमि पर जानकी नवमीः मैथिली दिवस

रामचरितमानस मोतीः जयन्तक कुटिलता आ फल प्राप्ति

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती जयन्तक कुटिलता आ फल प्राप्ति १. एक बेर सुन्दर-सुन्दर फूल सब तोड़िकय श्री रामजी अपना हाथ सँ तरह-तरह के गहना बनौलनि आर सुन्दर स्फटिक शिला पर बैसि प्रभु बड़ा आदरक संग ओ गहना सब श्री सीताजी केँ पहिरौलनि आ सजौलनि। २. ताहि घड़ी देवराज इन्द्रक मूर्ख पुत्र जयन्त रामचरितमानस मोतीः जयन्तक कुटिलता आ फल प्राप्ति

ब्राह्मणक सम्मान स्वयं ब्राह्मण सहित सब समाज केँ करहे टा पड़त

ब्राह्मण विरूद्ध विषवमन सँ केकर लाभ? ब्राह्मण प्रति शत्रुताक भाव जाहि तरहें प्रचारित-प्रसारित कय केँ ब्राह्मणेतर समाज केँ गोलबन्द करैत सत्ताक राजनीति आरम्भ भेल स्वतंत्र भारतक किछु पैघ राज्य सब मे, जाहि मे बिहार आ यूपी सर्वोपरि अछि – तेहेन अवस्था मे अन्तर्द्वंद्वक अवस्था एखन किछु नहि देखलहुँ अछि। आबय वला समय मे देखब। ब्राह्मण ब्राह्मणक सम्मान स्वयं ब्राह्मण सहित सब समाज केँ करहे टा पड़त

रामचरितमानस मोतीः अरण्यकाण्ड तृतीय सोपान मंगलाचरण

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती अरण्यकाण्डः तृतीय सोपान-मंगलाचरण श्लोक : मूलं धर्मतरोर्विवेकजलधेः पूर्णेन्दुमानन्ददं वैराग्याम्बुजभास्करं ह्यघघनध्वान्तापहं तापहम्‌। मोहाम्भोधरपूगपाटनविधौ स्वःसम्भवं शंकरं वंदे ब्रह्मकुलं कलंकशमनं श्री रामभूपप्रियम्‌॥१॥ धर्मरूपी वृक्षक मूल, विवेकरूपी समुद्रक आनन्द देनिहार पूर्णचन्द्र, वैराग्यरूपी कमल केर (विकसित करयवला) सूर्य, पापरूपी घोर अन्धकार केँ निश्चय टा मिटेनिहार, तीनू ताप केर हरनिहार, मोहरूपी मेघक समूह केँ छिन्न-भिन्न रामचरितमानस मोतीः अरण्यकाण्ड तृतीय सोपान मंगलाचरण

गीता, धृतराष्ट्र आ हम मानव समुदाय

जीतल ओ जे समय पर बुझलक धृतराष्ट्र उवाच। धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः। मामकाः पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत सञ्जय॥१॥ धृतराष्ट्र बजलाह – हे सञ्जय! कुरुक्षेत्र जेहेन धर्मक्षेत्र मे युद्ध लेल एकत्रित हमर लोक आ पाण्डव लोकनि कि सब कयलनि? गीताक एहि प्रथम श्लोक मे राजा धृतराष्ट्र दिव्यदृष्टिसम्पन्न सञ्जय सँ पुछलखिन जे ‘हमर लोक’ आ ‘पाण्डव लोकनि’ युद्धक मैदान गीता, धृतराष्ट्र आ हम मानव समुदाय

मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल २०२३ मुम्बईः हमर दृष्टि – मनोरमा रामसुन्दर झा

विचार २७ अप्रैल २०२३ । मैथिली जिन्दाबाद!! समकालीन भारतीय भाषा परिधि मे मैथिली साहित्यः मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल २०२३ पर हमर दृष्टि – मनोरमा रामसुन्दर झा मिथिला समाजक पैघ साहित्यिक आयोजन मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल 2023 के आयोजन एहि वर्ष मायानगरी मुम्बई मे भेल। कुल 17 टा बहुआयामी सत्र सँ समृद्ध ई साहित्यिक महोत्सव अनेक रूप सँ मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल २०२३ मुम्बईः हमर दृष्टि – मनोरमा रामसुन्दर झा

रामचरितमानस मोतीः भरतजीक अयोध्या लौटब, भरतजी द्वारा पादुकाक स्थापना, नन्दिग्राम मे निवास आर श्री भरतजीक चरित्र श्रवण केर महिमा

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती भरतजीक अयोध्या लौटब, भरतजी द्वारा पादुकाक स्थापना, नन्दिग्राम मे निवास आर श्री भरतजीक चरित्र श्रवण केर महिमा १. छोट भाइ लक्ष्मणजी और सीताजी समेत प्रभु श्री रामचंद्रजी पर्णकुटी मे एना सुशोभित भ’ रहला अछि मानू वैराग्य, भक्ति और ज्ञान शरीर धारण कएने शोभित भ’ रहल होइथ। २. मुनि, रामचरितमानस मोतीः भरतजीक अयोध्या लौटब, भरतजी द्वारा पादुकाक स्थापना, नन्दिग्राम मे निवास आर श्री भरतजीक चरित्र श्रवण केर महिमा

हम आबि रहल छीः मैथिली धारावाहिक भाग ७ व ८

श्री रबीन्द्र नारायण मिश्र केर लिखल उपन्यास “हम आबि रहल छी” पर आधारति मैथिली धारावाहिक भाग – ७ आ ८ 7 रातिमे भुखले सुति रहलहुँ । टेबुलपर निशा हमर भोजन राखि देने रहथि । हम ओमहर तकबो नहि केलहुँ । असलमे खेबाक मोनो नहि होइत छल । ओ दुनूगोटे भोजन केलाह आ अपन कोठरीमे चलि हम आबि रहल छीः मैथिली धारावाहिक भाग ७ व ८

#लेखनी के धार: यात्रा मिथिला के धर्म स्थान के

दहेज मुक्त मिथिलाक साहित्यिक अभियानः लेखनीक धार अन्तर्गत २० अप्रैल २०२३ ‘मिथिला यात्रा संस्मरण’ पर संकलित आलेख #लेखनी के धार: यात्रा मिथिला के धर्म स्थान के – किरण झा बाबा धाम – बाबा धाम हम अपन बड़का बौआ के मुंडन कर’ गेल रही। ओकर मानल रहय। ट्रेन स यात्रा केलौं। दिन मे विश्राम केला के #लेखनी के धार: यात्रा मिथिला के धर्म स्थान के

यात्रा: मिथलाक पवित्र और प्रसिद्ध स्थान के – अहिल्यास्थान

दहेज मुक्त मिथिलाक साहित्यिक अभियानः लेखनीक धार अन्तर्गत २० अप्रैल २०२३ ‘मिथिला यात्रा संस्मरण’ पर संकलित आलेख यात्रा: मिथलाक पवित्र और प्रसिद्ध स्थान के – मधू मिश्रा आइ हम अपन घर लग के प्रसिद्ध और पवित्र स्थान अहिल्यास्थान के बारे मे लिखि रहल छी । हमर सबके स्टेशन अछि कमतौल स्टेशन जतय स हम सब यात्रा: मिथलाक पवित्र और प्रसिद्ध स्थान के – अहिल्यास्थान