“पुनर्विवाह”

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— अखिलेश कुमार मिश्र।                       

सभ सँ पहिले “पुनर्विवाह” शब्द कें शाब्दिक अर्थ बुझु। पुनर्विवाह दू शब्द पुनः आ विवाह कें मिला कs बनल अछि। अर्थात जिनकर विवाह पुनः अर्थात दुबारा, तिबारा आदि आदि होन्हि। तहन तs मिथिला में पुरुष के लेल पुनर्विवाह कहियो वर्जित नै रहल तैं पुनर्विवाहक चर्चा स्त्रीक दोसर-तेसर विवाहक परिपेक्ष्य में कैल जा रहल अछि।
हमरा हिसाबे तs अहि सृष्टि में सभक जन्मक मुख्य उद्देश्य ही अछि अपन जेनेरेशन कें आगाँ बढ़ेबाक लेल। अन्य सभ जीव-जन्तु (जड़-चेतन) सभ प्रत्यक्ष रूपेण प्रकृति सँ जुड़ल अछि आ प्रकृति पर ही निर्भर अछि, तैं ओ सभ तदनुसार ही अप्पन जेनेरेशन कें आगाँ बढ़बैत अछि। मुदा मनुष्य अप्पन बुद्धि आ विवेक सँ अपना आप कें अहि लेल सामाजिक मर्यादा में बान्हि लेने अछि, तs विवाहक जरूरत पड़लै। देखल जै तs एतय प्रकृति सभ कें अधूरा बना कs छोड़ि देने अछि तैं ओकरा अपन पूरक कें आवश्यकता छै। सभ स्त्रीक वा पुरुष, सभक पूरक विपरीत ही अछि अर्थात स्त्री-पुरुष एक दोसरक पूरक अछि जाहि में विवाह पूर्णता प्रदान कड़ैत अछि। जेखन विवाह जीवन में अतेक जरूरी अछि तs स्त्री-पुरुषक विवाह में भेद कियै। जेखन पुरुषक जीवनसंगिनी कुनो विधिये (पत्नीक स्वर्गवास अथवा तलाक) अलग भs जाइ छैथि तs हुनका दोसर विवाह करै में कुनो संकोच नै, मुदा ऐह परिस्थिति अगर कुनो स्त्रीक संग उतपन्न भ जै तs पुनर्विवाह में संकोच कियै?
सामाजिक बन्धन, मान-मर्यादाक निर्माण मनुष्य अप्पन सुविधा लेल तैयार केने अछि जाहि सँ कि जीवन-यापन में असुविधा नै होइ, मुदा पुनर्विवाह लेल स्थिति अलग कियै। हमरा हिसाबे तs स्त्रीक स्वतंत्रता के ई हनन अछि। चूँकि स्त्री बहुत तरहें, खास कs सामाजिक सुरक्षा कें दृष्टिकोण सँ पुरुष पर बेसी निर्भर छैथि तैं किछु नियम सभ (नियम कम परम्परा ज्यादा) तेहेन बनि गेल जाहि में पुरुष कें बढ़त भेंटि जाइत छैन्ह आ हुनका किछु मनमाना कर के अधिकार सेहो। मुदा आब समाज में स्त्रीक स्थिति नीक भs रहल छैन्ह चाहे तो आर्थिक हो वा शैक्षणिक, सामाजिक तैं पहिलुका परम्परा पर प्रश्न उठनाई स्वाभाविक।
चलु आब अहाँ सभ कें सौ वर्ष पहिले मिथिला में व्याप्त कुरीति पर ध्यान दियाबी जाहि में स्वतः स्त्रीक सामाजिक स्थिति पता लागि जैत। जेखन लोक नीक मूल आ पाँजि में अप्पन बेटीक विवाह कें उत्तम बुझैथि तs नीक मूलक दूल्हा सभ कें दस बीस टा विवाह आम बात रहै। हुनका घर जमाय बना राखल जै। एक्कर विपरीत में बहुते गरीब लड़का कुमारे रहि जै। ई जे दस-बीस पत्नी दस-बीस में रहथिन्ह तs हुनका पते नै जे हमर श्रीमान कहिया ऐता, एखन क़त छैथि आदि आदि। ई थोड़े व्यभिचार कें सेहो बढ़ाबा दै। लोक एकरा झापs लेल राति कs पोखड़ि घाट लग खेनाइ (तरुआ तरकारी) के अंश सभ फेंकि कs भोर में प्रचार कड़ैथि जे राति में ओझा जी, मिसर जी ऎल रहैथि। अगर ओहि ओझा जी या मिसर जी कें मृत्यु भs गेलैन्ह तs दस-बीस कनियाँ एके सँग विधवा। ओहि पत्नी सभक ई स्थिति नै रहैन्ह जे एक्कर विरोध में कुनो आवाज उठेती। खैर आब स्थिति बदलि गेल आ निरन्तर निके होयत (आशा अछि) तैं स्त्रीक पुनर्विवाह सर्वथा उछित अछि आ एक्कर सहमति अप्पन सभक संविधान में सेहो अछि।
हम तs कहब जे पुनर्विवाह कें कुनो उम्र सीमा सेहो नै होबाक चाही, जहिया जिनका बचल जिनगी नीक सँ जीवक लेल जीवनसाथी कें जरूरत होन्हि तs अवश्य बनाबैथि।