“बदलैत गाम”

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— रेखा झा।                             

 

#बदलैत गाम
पहिने नहि छल सड़क ढलैया नहि छल बिजली बत्ती,
बदलि गेल अछि गाम सबहक फैलल सब तरि ज्योति,
गाड़ी, मोटर फटफटिया सब चलैत रहैया धरधरधर,
नल जल शौचालय सबके घर देखा रहल इ उन्नति स्तर,
जारनि काठि के गेल जमाना गैस गोदाम बनल सबतर,
मोबाइल के टावर गामे गामे रेडियो के नहि आब अवसर,
बुढ पुरान के जमघट अखनो होइते अछि देखू निरंतर,
नव परिवर्तन के हुनका पर भेल नहि देखू कोनो असर,
शिक्षा लेल निकलल बाहर मुनिया , मोनू, दुनु चटिया,
साइकिल चढलि जा रहल ओ बेटी
हाथ नहि आब गोबरक पथिया,
स्वास्थ्य केंद्र सेहो किछु जगह पर चला रहल अछि नीक व्यवस्था,
सीएसपी सेंटर खुलल सगरो इ भेल बैंकक नीक व्यवस्था
नव परिवर्तन नवयुग के नीक दिशा में भेल अग्रसर,
अहि विकास में साथ मंगैत अछि सदा सोच जे रहै सकारात्मक,
आब ने ककरो पर एहन दवाब समाजक लोक सब दैया,
कनि उन्मुक्त जीवन सब आब गामों में जीबैया,
किछु परिवर्तन जखने आयत संग ओकर दुष्परिणामों
छायत,
इ रीत सदा स चलल तखन किया कहू अहि पर हम सब
घबरायब,
नीक दिशा के इ परिवर्तन बदलि रहल की सब से देखू,
प्रगति विकास के नाम पर किछु उच्छश्रृंखलता सेहो देखू,
बदलि गेल ओ रूप गाम के जे पहिने हम सुनि,
नीक लगैया ई परिवर्तन किया ने हम गाम घूमि।