“दियाबातीक मधुर संस्मरण”

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— कृति नारायण झा।                       

दुर्गा पूजा के विजया दशमी के दिन हमर सभक गाम पूर्णरूपेण उदास भऽ जाइत छल मुदा ओकर पाँच दिनक बाद कोजगरा के राति झोरा भरि मखान आ बतासा वसुली कऽ हमरा लोकनि दीयाबाती केर प्रतीक्षा में लागि जाइत छलहुं। कोजगरा के पन्द्रह दिनक बाद सुखराती अबैत छैक तकर तैयारी बहुत जबरदस्त होइत छलैक। बँसबिट्टी सँ बांसक कनसुपती हमरा लोकनि बिछैत छलहुँ आ ओकरा एकटा बासक डंटा में खोंसैत छलहुँ आ ओ दियावाती के राति एक नम्बर के उक्का लोली बनैत छल। ओना हमर सभक बाबूजी सेहो गामक मुनीफ्फा दर्जी के ओहिठाम सँ पांच छ टा कपङा बला उक्का लोली मंगबैत छलाह। मुनीफ्फा के ओहिठाम जे रंग बिरंग केर कपङा के कतरन बचैत छलैक ओकरा ओ पतरका लोहाक तार में खूब नीक जकाँ बान्हि कऽ उक्का लोली बनबैत छल जे खूब बेसी काल चलैत छलैक। हम सभ दुपहरिये सँ ओकरा किरासन तेल में बोरि दैत छलियैक। दीयाबाती के दिन दुपहरिया मे दलान पर चारि टा केराक थम गारल जाइत छल जाहि में एक लाइन सँ चारि टा बाँस के फठ्ठा लगैत छलैक आ ओहि फठ्ठा पर कनेक कनेक गोबर राखल जाइत छलैक आ ओहि पर माटिक गोलका डिबिया बला दीया रखाइत छलैक। ओ गोलका दीया के पहिले सँ आडर रहैत छलैक जकरा हमरा लोकनि दुपहरिया मे पानि के भरल बाल्टी में राखि दैत छलियैक आँ सांझ मे ओहि में किरासन तेल दैत छलियैक जाहि सँ तेल कम खर्च होअय।मुदा हमरा सभक मुख्य ध्यान फटक्का पर रहैत छल। भैयारीमे सभ सँ छोट भेलाक कारणे हमरा फूलझङी भेटैत छल मुदा हमर ध्यान रहैत छल आकाश तारा अर्थात राकेट बम पर जे एकटा खाली में राखि कऽ उङाओल जाइत छल। हमरा सभक समय मे चटाई बम बहुत चर्चित छल। हम सभ ओकरा नागिन कहियै। चटाई बम के नाम लैतहिं हमरा एकटा घटना मोन पङि गेल। हमरा गाम में नाटक बहुत दिन सँ होइत छैक। एक बेर एकटा नाटक होइत रहैक सिरायुद्दौला। एहि में एकटा अंग्रेज केर भूमिका रहै आ ओकरा रंगमंच पर सिगरेट पीवाक रहै। हम सभ जखन ई पार्ट खेलाइयै तऽ एकटा संठी लैत रही आ ओकरा सिगरेट के रूप में ब्यवहार करी कारण ओहो उज्जर होइत छैक। मुदा हमरा गामक एकटा उकठ्ठी अंग्रेज के पार्ट खेलेवाक काल ओहि चटाई बम में जाहि में प्रायः २८ टा डंटी बला फटक्का रहैत छलैक ओकर एकटा फटक्का जे फूटल नहिं छलैक खाली ओकर लोली जरि गेल छलैक ओ लाल रंग के फटक्का सिगरेट के रूप में मुंह में लेलक आ स्टेज पर जरेलक। संयोग एहन छलैक जे ओ फटक्का स्टेज पर एकरा मुहेँ में फूटि गेलैक। नाटक सभ बन्द भ गेल सभ एकर इलाज में जूटि गेल, खैर हमरा लोकनि चर्चा कऽ रहल छलहुँ हुक्कालोली के। ओ कनसुपती बला हुक्कालोली लऽ कऽ दरबज्जा पर सांझे सँ हुक्कालोली लोली लोली चैल जो कुम्हरटोली ।त कियो कहै चैल जो गुअरटोली एवं क्रमे बभनटोली, मलहटोली, चमरटोली सभ होइत छल। हमर सभक घर ज्योतिषि जी के घर होयवाक कारणे पूजा पाठ पर विशेष जोर देल जाइत छलैक। हमर बाबूजी सांझ में हाथ में ऊक लऽ कऽ एकटा मंत्र पढैत छलखिन्ह जकर हिन्दी अर्थ छलैक “अन्न धन लक्ष्मी घर होऊ आ दारिद्र्य बहार होऊ” हम सभ एही समय केर प्रतीक्षा करैत रहैत छलहुँ, बस शुरू भऽ जाइत छल “हुक्कालोली लोली” आ तकर बाद फटाका। फटक्का खूब कीनल जाइत छल। सरकारी अर्थात परिवार के दिस सँ जे भेटल से भेटल आ दुर्गा पूजा के जतरा दिनुका के मेला के बचाओल गेल पाई सँ छुरछुरी, फूलझरी, चक्री, चटाई बम राकेट बम इत्यादि। की प्रसन्नता के क्षण होइत छल। आब सोचैत छी जे ओ दिन कतय चलि गेल?………….. 🙏