“शक्तिपूजा”

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आभा झा।                         

नवरात्रि या दुर्गा पूजा हिंदूक एक प्रमुख पाबैन अछि। नवरात्रि शब्द एक संस्कृत शब्द अछि जेकर अर्थ होइत अछि ‘नौ राति ‘।अहि नौ राति और दस दिनक दौरान,शक्ति देवीक नौ रूपक पूजा होइत छैक। दसम दिन दशहरा के नाम सँ प्रसिद्ध अछि।
सर्वप्रथम विक्रम संवत के प्रारंभ के दिन सँ अर्थात चैत्र मास शुक्ल पक्षक प्रतिपदा यानी पहिल तीथ सँ नौ दिन पर्यंत अर्थात नवमी तक नवरात्र निश्चित कैल गेल अछि। अहि प्रकार ठीक छह मासक बाद शारदीय नवरात्र आश्विन मास शुक्ल पक्षक प्रतिपदा सँ महानवमी अर्थात विजयादशमी सँ एक दिन पूर्व तक नवरात्रक पाबैन मानल गेल अछि।
दुर्गा पूजा उत्सव देवी अंबाक (विद्युत)के प्रतिनिधित्व अछि। बसंतक शुरूआत और शरद ॠतुक शुरूआत,जलवायु और सूरजक प्रभाव के महत्वपूर्ण संगम मानल जाइत अछि। दुर्गा पूजाक पाबैन,माँ दुर्गाक अवधारणा भक्ति और परमात्माक शक्ति (उदात्त,परम,परम रचनात्मक ऊर्जा)के पूजाक सब सँ शुभ अवधि मानल जाइत छैक। ई पूजा वैदिक सँ पहिने,प्रागैतिहासिक काल सँ चलल आबि रहल अछि। दुर्गा पूजा में देवी के शक्तिपीठक और सिद्धपीठ पर भारी मेला लगैत अछि। माताक सब शक्तिपीठक महत्व अलग-अलग अछि। शक्तिक पूजा लेल विशेष मंत्र ‘ऐं हीं क्लीं ‘अछि और ई तीनू ध्वनि संसार के संचालित करय वाली सर्जक,पालक और संहारक शक्तिक प्रतिनिधित्व करैत अछि।
अपन पूर्वज सब रात्रिक महत्व के वैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य में बुझै और बुझाबै के प्रयत्न केने छथि। रात्रि में प्रकृतिक बहुत रास अवरोध कम भऽ जाइत छैक। आधुनिक विज्ञान सेहो अहि बात सँ पूर्णतः सहमत अछि कि दिन में आवाज दूर तक नहीं जाइत अछि किन्तु रात्रिक बहुत दूर तक जाइत अछि। दिन में सूर्यक किरण आवाज के तरंग और रेडियो तरंग के आगू बढ़ै सँ रोकैत अछि।
दुर्गा पूजाक पहिल तीन पूजा देवी दुर्गाक पूजा करै लेल समर्पित अछि। ई पूजा हुनकर ऊर्जा और शक्तिक होइत अछि। प्रत्येक दिन दुर्गाक एक अलग रूप के समर्पित अछि।पहिल दिन माता के शैलपुत्री,दोसर दिन ब्रह्माचारिणी और तेसर दिन चंद्रघंटा स्वरूपक अराधना कैल जाइत छैक। पूजाक चारिम,पांचम और छठम दिन लक्ष्मी-समृद्धि और शांतिक देवी के पूजा लेल समर्पित अछि। शायद व्यक्ति खराब प्रवृति और धन पर विजय प्राप्त करि लैत अछि,मुदा ओ एखन सच्चा ज्ञान सँ वंचित अछि। सब पुस्तक आर साहित्य सामग्री के एक स्थान पर इकट्ठा कऽ देल जाइत अछि और एक दीप देवी आह्वान और आशीर्वाद लेबाक लेल देवताक सामने जरायल जाइत अछि। आठम दिन एक यज्ञ कैल जाइत छैक। ई एक बलिदान अछि जे देवी दुर्गाक सम्मान तथा हुनका विदा करैत अछि। अपन मिथिला में अष्टमी कऽ खोंइछ भरल जाइत छैक। नवम दिन महानवमी के नाम सँ सेहो जानल जाइत छैक अहि दिन कन्या पूजन होइत अछि। जाहि में नौ कन्याक पूजा होइत छैक। अहि नौ कन्या के देवी दुर्गाक नौ रूपक प्रतीक मानल गेल अछि। कन्याक सम्मान तथा स्वागत लेल हुनकर पैर धोअल जाइत छैन। पूजाक अंत में कन्या के उपहार के रूप में नब वस्त्र या कोनो चीज प्रदान कैल जाइत छैक।
दुर्गा पूजा के वास्तव रूप में शक्ति पाबै के इच्छा सँ मनाओल जाइत छैक जाहि सँ बुराई के अंत भऽ सकै। हिंदू धर्म के हर त्योहारक पाछू सामाजिक कारण होइत छैक। दुर्गा पूजा एहेन त्योहार अछि जे हमर सबहक जीवन में उत्साह एवं ऊर्जाक संचार करै में अपन महत्वपूर्ण भूमिका निभबैत अछि। अहाँ सब सँ हम कहब कि जहिना दुर्गा पूजा में कन्या के पूजा करैत छी तहिना हरदम अहाँ ओहि कन्याक सम्मान करू इज्जत करू। कन्याक संग दुर्व्यवहार नहीं करू।

आभा झा
गाजियाबाद