ई जातीय व्यवस्था सिर्फ हिन्दुस्तानहि टा मे छैक या अन्तहु

वर्ण व्यवस्था आ चीनक कथा

– प्रवीण नारायण चौधरी

Chinese flag in beijing tiananmen square

समाजक संरचना आ संचालन देखि स्पष्ट छैक जे एहि मे सभक सामुहिक योगदान रहैत छैक। सब जाति, सब धर्म, सब वर्ग, निर्बल-सबल, होशियार-जोशियार कि बकलेल-बुधियार – सभक। तखन मानव प्रकृति मे अपन जाति के नाम पर कखनहुँ श्रेष्ठताक भावना (Superiority Complex) या फेर हीन भावना (Inferiority Complex) केर कारण लोक आपस मे विभाजित होइत अछि सेहो केकरो सँ छुपल नहि अछि। लेकिन एकटा ज्ञानी व्यक्ति केँ ई पता छैक जे एतय सभक आवश्यकता पहिनो छलैक, एखनहुँ छैक आ आगुओ एहिना रहतैक।

 
काल्हि हम चीन केर सामाजिक संरचनाक सम्बन्ध मे पढि रहल छलहुँ। बुझले होयत कि जे चीन १९७० केर दशक मे हिन्दुस्तान केर विकास सँ लगभग बराबर छलैक से २००० अबैत-अबैत हिन्दुस्तान सँ कइएक गुना आगू निकलि गेलैक। चीन मे २२० ई. पू. के किन सम्राज्य सँ १८४० ई. केर किंग सम्राज्य धरि राज्य द्वारा जनता केर चारि भाग (जाति) मे वर्गीकृत कयल जाइत रहल, आर बादहु मे विभिन्न सरकार द्वारा लगभग एहि चारि प्रमुख जाति केर संग राष्ट्रक निर्माण आ विकासक सारा योजना बनबैत रहल। ई चारि छी – भूस्वामी (Landlord), कृषक (Peasant), शिल्पी (Craftsman), आ सौदागर (Merchant)। आधुनिक चीन यानि २०म् शताब्दीक आरम्भकाल १९११ ई. के बाद कम्यूनिष्ट आन्दोलन आ कम्यूनिष्ट केर १९४९ ई. मे हासिल जीत उपरान्त उपरोक्त चारि वर्ग केँ नव रूप सँ माओ जेडोंग द्वारा व्याख्या कयल गेल।
 
शि, नोङ, गोङ, शाङ – अर्थात् श्रमिक वर्ग (The Working Class), किसान जनता (The Peasantry), शहरी छोट पूँजीपति (The Urban Petty Bourgeoisie), राष्ट्रीय पूँजीपति (The National Bourgeoisie) – माओ केर प्रसिद्ध भाषण मे एहि बातक जिक्र कयल गेलैक जे कम्यूनिष्टक जीत एहि चारि वर्गक बीच एकता स्थापना कयलक अछि।
 
एतय एकटा बात आर बड़ा रोचक छैक – चीन के राष्ट्रीय झंडा मे जे चारि गोट छोट-छोट तारा थिक से एहि चारि वर्गक जनताक द्योतक आ एकटा बड़का ‘तारा’ जे छैक से ‘कम्यूनिष्ट सरकार’ केर द्योतक थिकैक।
 
१९५० सँ १९७७ धरिक बीच ‘श्रमिक वर्ग’ मे हजारों लोक केँ प्रवेश देल गेलैक। १९७८ सँ एतय आर्थिक क्रान्ति आ औद्योगिकरण केर दौर चलल। आर एहि ठाम सँ सोवियत संघ केर सूत्र ‘दुइ वर्ग आ एक परत’ (Two Classes and One Stratum) केर अवधारणा अपनायल गेल चीन मे। ई दुइ गोट वर्ग मे कृषक वर्ग आ श्रमिक वर्ग तथा बुद्धिजीवीक एक परत पड़ैत अछि। १९७८ सँ २००० धरि एहि मे सेहो अनेकों बेर परिवर्तन अबैत रहल, कृषक वर्ग जे हमेशा सँ चीन मे सर्वाधिक संख्या मे रहल तेकर संख्या मे तेजी सँ ह्रास आयल आ श्रमिक वर्ग मे ओतबे तेजी सँ बढोत्तरी भेल।
 
एहि तरहें चीनक सामाजिक संरचनाक अध्ययन सँ वर्तमान अवस्थाक सम्बन्ध मे जे ज्ञात होइत अछि से फेर वैह ‘बहुजातीय व्यवस्था’ केँ सिद्ध करैत अछि। लोकक आर्थिक आ सामाजिक स्थिति अनुसार कुल दस स्तर (परत) छैक जाहि मे सामान्य अर्थ मे, सरकारी अधिकारी, निजी और छोट व्यवसाय के मालिक, औद्योगिक श्रमिक, खेतिहर मजदूर आर बेरोजगार शामिल छैक।
 
अन्त मे, श्रीकृष्णक कहल गीताक महावाक्य – अध्याय ४ केर ई १३म् श्लोक सनातन सत्य थिक जे हमेशा लागू रहल, लागू रहतः
 
चातुर्वर्ण्यं मया सृष्टं गुणकर्मविभागशः।
तस्य कर्तारमपि मां विद्ध्यकर्तारमव्ययम्॥
 
आजुक आर्थिक युग मे अर्थ प्रधान दृष्टिकोण मे पर्यन्त यैह व्यवस्था लागू अछि। समय आ स्थितिक बदलाव होइत रहैत अछि। तथापि अपन जातीय घमन्ड या हीनभावना सँ यदि हम सब मानवता विरूद्ध कोनो काज करैत छी त सावधान भऽ जाय। समय पर चेतना प्राप्त कय ली।
 
हरिः हरः!!